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कब्ज से होने वाली बीमारियां: कब्ज को हल्के में न लें! लंबे समय तक रहने पर हो सकती हैं 10 बड़ी बीमारियां, बवासीर से लेकर आंतों की रुकावट तक

लंबे समय की कब्ज को नजरअंदाज न करें। जानिए कब्ज से जुड़ी 10 बड़ी समस्याएं, बवासीर, एनल फिशर, फीकल इम्पैक्शन और गंभीर चेतावनी के संकेत।

Chronic Constipation: Chronic Constipation: कभी-कभार कब्ज होना आम समस्या हो सकती है, लेकिन अगर कई हफ्तों तक मल त्याग में परेशानी बनी रहे, मल बहुत सख्त हो या बार-बार शौच के लिए जोर लगाना पड़े, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। लंबे समय तक रहने वाली कब्ज कई बार बवासीर, गुदा में दरार और मल के अत्यधिक जमा होने जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, बार-बार मल सख्त हो, शौच के दौरान जोर लगाना पड़े या कई दिनों तक पेट साफ न हो, तो मामला गंभीर हो सकता है।

 

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लंबे समय की कब्ज से बवासीर, एनल फिशर और मल के अत्यधिक जमा होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। वहीं कुछ स्वास्थ्य स्थितियां ऐसी भी हैं जिनमें कब्ज एक लक्षण के तौर पर सामने आती है। इसलिए पुरानी कब्ज को केवल पेट की समस्या मानना सही नहीं है।

 

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कब्ज से जुड़ी हो सकती हैं ये 10 बड़ी समस्याएं

 

1. बवासीर

लगातार कब्ज रहने पर सख्त मल को बाहर निकालने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है। इससे गुदा और मलाशय की नसों पर दबाव बढ़ सकता है और बवासीर की समस्या हो सकती है या पहले से मौजूद बवासीर के लक्षण बढ़ सकते हैं।इसमें गुदा के आसपास दर्द, खुजली और मल के साथ चमकीले लाल रंग का खून दिखाई दे सकता है। हालांकि, मल में खून आने पर इसे केवल बवासीर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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2. एनल फिशर

कठोर और सूखा मल गुदा की त्वचा में छोटा कट या दरार पैदा कर सकता है। इसे एनल फिशर कहते हैं।मल त्याग के दौरान तेज दर्द, जलन और कभी-कभी खून आना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। कब्ज नियंत्रित करने और मल को नरम रखने से समस्या में मदद मिल सकती है।

 

3. फीकल इम्पैक्शन

लंबे समय तक मल त्याग न होने पर मल बड़ी आंत या मलाशय में जमा होकर बेहद सख्त हो सकता है। इसे फीकल इम्पैक्शन कहा जाता है।इसमें पेट फूलना, पेट दर्द, शौच में कठिनाई और कभी-कभी सख्त मल के आसपास से तरल मल का रिसाव भी हो सकता है। गंभीर स्थिति में चिकित्सकीय उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

 

4. आंतों में रुकावट

कब्ज और आंतों की रुकावट एक ही बीमारी नहीं हैं। लेकिन गंभीर कब्ज या मल के अत्यधिक जमा होने जैसी स्थितियां कुछ मामलों में आंतों की रुकावट से जुड़ सकती हैं।तेज पेट दर्द, उल्टी, पेट फूलना और गैस या मल बिल्कुल पास न होना गंभीर चेतावनी के संकेत हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

 

5. पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन

लंबे समय तक शौच के दौरान जोर लगाने की आदत कुछ लोगों में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकती है।कुछ लोगों में मल त्याग के समय ये मांसपेशियां ठीक से रिलैक्स नहीं हो पातीं, जिससे कब्ज और शौच में परेशानी लगातार बनी रह सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर पेल्विक फ्लोर फिजिकल थेरेपी की सलाह दे सकते हैं।

 

6. इरिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी IBS

IBS एक दीर्घकालिक पाचन संबंधी समस्या है जिसमें पेट दर्द, पेट फूलना, गैस और मल त्याग की आदतों में बदलाव हो सकता है।कुछ लोगों में कब्ज इसका प्रमुख लक्षण होता है, जबकि कुछ में कब्ज और दस्त दोनों की समस्या हो सकती है। इसलिए बार-बार कब्ज के साथ पेट दर्द और मल त्याग के पैटर्न में लगातार बदलाव हो तो जांच जरूरी हो सकती है।

 

7. हाइपोथायरायडिज्म

जब थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त थायरॉइड हार्मोन नहीं बनाती तो शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी हो सकती हैं। इसका असर पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है और कब्ज हाइपोथायरायडिज्म का एक लक्षण हो सकता है।अगर कब्ज के साथ लगातार थकान, ठंड ज्यादा लगना या अन्य संबंधित लक्षण हों तो डॉक्टर से जांच की सलाह ली जा सकती है।

 

8. मधुमेह से जुड़ी कब्ज

लंबे समय तक रक्त शर्करा का स्तर अधिक रहने से शरीर की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। यदि पाचन तंत्र को नियंत्रित करने वाली नसें प्रभावित होती हैं तो आंतों की गति धीमी हो सकती है और कब्ज की समस्या पैदा हो सकती है।इसलिए मधुमेह वाले व्यक्ति में लंबे समय तक कब्ज रहने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

9. पार्किंसंस और दूसरी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं

पार्किंसंस रोग सहित कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में आंतों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे मामलों में कब्ज बीमारी से जुड़े लक्षणों में शामिल हो सकती है।इसी तरह कुछ अन्य तंत्रिका संबंधी बीमारियां भी आंतों की गति और मल त्याग की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।

 

10. आंत या कोलन की गंभीर बीमारी

कब्ज का मतलब कैंसर होना नहीं है, लेकिन नई और लगातार बनी रहने वाली कब्ज, मल के आकार में बदलाव, मल में खून, पेट दर्द या बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।कुछ मामलों में कोलन या मलाशय में मौजूद ट्यूमर मल के रास्ते को प्रभावित कर सकता है। इसलिए खासकर लंबे समय से बनी नई कब्ज में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

 

कब्ज से बचने के लिए क्या करें?

कब्ज की समस्या से बचने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव मददगार हो सकता है।

• भोजन में फाइबर बढ़ाएं—फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज अच्छे विकल्प हैं।

• डॉक्टर ने तरल सीमित करने को नहीं कहा है तो दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।

• रोजाना पैदल चलने या शारीरिक गतिविधि की आदत बनाएं।

• मल त्याग की इच्छा को बार-बार न रोकें।

• लंबे समय तक खुद से कब्ज की दवाएं या लैक्सेटिव न लेते रहें।

• बार-बार कब्ज होने पर इसके मूल कारण की जांच कराएं।

 

इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

कब्ज के साथ तेज या लगातार पेट दर्द, उल्टी, बहुत ज्यादा पेट फूलना, गैस या मल बिल्कुल पास न होना, बार-बार मल में खून आना या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य कब्ज समझकर घर पर इलाज नहीं करना चाहिए।

 

एक जरूरी बात

हर कब्ज से ये सभी बीमारियां नहीं होतीं और ऊपर बताई गई कई स्थितियां कब्ज का कारण या उससे जुड़ी समस्या भी हो सकती हैं। इसलिए लंबे समय की कब्ज में खुद बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से सही जांच कराना सबसे महत्वपूर्ण है।

 

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। लगातार कब्ज, मल में खून, तेज पेट दर्द, उल्टी या मल-गैस बिल्कुल पास न होने की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लें। किसी भी दवा या लैक्सेटिव का लंबे समय तक इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।

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अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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