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Jharkhand एयर एंबुलेंस हादसा: सवालों के घेरे में सुरक्षा, सिस्टम और जिम्मेदारी.. पारा मेडिकल एसोसिएशन (AJPMA) ने कर दी बड़ी मांग

Jharkhand air ambulance accident: Safety, system and responsibility under question. Para Medical Association (AJPMA) made a big demand.

रांची/26.2.26। झारखंड के चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं। जांच में जो बातें सामने आ रही है, वो ना सिर्फ DGCA की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग पर भी गहरे सवाल छोड़ता है। वैसा प्लेन जो 40 साल पुराना है, उसे उड़ने की इजाजत कैसे दे दी गयी? वैसा एयर एंबुलेंस, जिसमें खुद का डाक्टर नहीं हो, उसे गंभीर मरीजों को लाने-ले जाने की जिम्मेदारी कैसे दे दी गयी? अब इस मामले को लेकर ऑल झारखंड पारा मेडिकल एसोसिएशन (AJPMA) ने भी सवाल उठाये हैं। पारा मेडिकल एसोसिएशन ने हादसे में डाक्टर और पारा मेडिकल स्टाफ की मौत पर दुख जताने के साथ-साथ कई गंभीर सवाल भी उठाये हैं।

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चतरा हादसे में स्वास्थ्य विभाग क्यों है सवालों में

एसोसिएशन ने कहा है कि एयर एंबुलेंस सिर्फ एक यात्रा का माध्यम नहीं है, बल्कि जीवनरक्षक यात्रा है। एयर एंबुलेंस में कोई साधारण मरीज यात्रा नहीं करते, बल्कि गंभीर और अति गंभीर मरीज को ही दिल्ली, मुंबई या फिर बैंग्लोर जैसे स्थानों में इलाज के लिए ले जाया जाता है, ऐसे में एयर एंबुलेंस के संचालन की जिम्मेदारी और भी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन, जिस तरह से रेड बर्ड कंपनी ने जिस गैर जिम्मेदारी पूर्वक एयर एंबुलेंस का संचालन कराया, उससे एक बात तो साफ हो गया कि ये एयर एंबुलेंस नहीं मौत की एंबुलेंस बन गयी है।

डाक्टर विकास ने एयर एंबुलेंस में जाने की दी थी सहमति या फिर मजबूरी में गये ?

ऑल झारखंड पारा मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा है कि विमान हादसे में एयर एंबुलेंस में पायलट कैप्टन विवेक विकास भगत और कैप्टन सवराजदीप सिंह,  मरीज संजय कुमार, मरीज की पत्नी अर्चना देवी, उनका भांजा धीरू कुमार व परिजन के अलावे के अलावा डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता और पारा मेडिकल स्टाफ सचिन कुमार मिश्रा की मौत हुई है। अध्यक्ष श्री सिंह ने पूछा है कि, जब एयर एंबुलेंस कंपनी रेड बर्ड ने पारा मेडिकल कर्मचारी के रूप में अपने कर्मचारी की नियुक्ति कर रखी थी, तो फिर आखिर एयर एंबुलेंस कंपनी ने डाक्टर की नियुक्ति क्यों नहीं की। आखिर किस हैसियत से प्राइवेट एयर एंबुलेंस कंपनी ने सरकारी डाक्टर को एयर एंबुलेंस में ले जाने की इजाजत दी। क्या इसके लिए सरकार स्तर से कोई इजाजत ली गयी? क्या दिवंगत डाक्टर विकास कुमार गुप्ता से कोई सहमति ली गयी थी? या फिर डाक्टर विकास को जबरदस्ती एयर एंबुलेंस पर भेजा गया।

प्राइवेट प्लेन, प्राइवेट हॉस्पीटल फिर सरकारी डाक्टर क्यों – धर्मेंद्र कुमार सिंह

प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ने कहा है, कि इस घटना को लेकर कई सवाल है, जो हमारे डाक्टर और पारा मेडिकल स्टाफ साथी को खोने के बाद चुभ रहे हैं। उन्होंने पूछा है कि जब मरीज प्राइवेट हॉस्पीटल में भर्ती था, तो फिर सरकारी डाक्टर एयर एंबुलेंस के साथ कैसे गये। क्या इसकी इजाजत  किसने दी ? कहीं ये एयर एंबुलेंस कंपनी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ की बलि तो ड़ॉ विकास गुप्ता नहीं चढ़ गये। पारा मेडिकल संघ ने इस मामले में विस्तृत जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जब डॉ विकास गुप्ता की ना तो ड्यूटी थी, ना ही मरीज सरकारी अस्पताल में भर्ती था, तो फिर प्राइवेट हॉस्पीटल के मरीज के साथ उन्हें क्यों भेजा गया। क्या उन्हे एयर एंबुलेंस में जाने को मजबूर किया गया था या फिर उनकी सहमति थी?

jharkhand plane crash redbird airways says there were no defects with aircraft
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5 करोड़ रुपया मुआवजा दे-उपेंद्र कुमार सिंह

पारा मेडिकल एसोसिएशन ने इस मामले में एयर एंबुलेंस कंपनी से डाक्टर विकास गुप्ता और नर्सिंग स्टाफ सचिन कुमार के परिजनों को 5-5 करोड़ रुपया मुआवजा देने की मांग की है। संघ के महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा है कि डाक्टर व पारा मेडिकल स्टाफ की मौत से संघ काफी मर्माहत है, ऐसे में दोनों स्वास्थ्यकर्मियों के परिजनों को तत्काल 5-5 करोड़ रुपया का मुआवजा दिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि जल्द ही संघ का एक प्रतिनिधिमंडल भी प्रभावित परिवार से मिलेगा और उनसे वस्तुस्थिति जानकर मीडिया के सामने खुलासा करेगा।

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