पारा शिक्षक ब्रेकिंग: बढ़ने वाली है पारा शिक्षकों की चुनौतियां, हाईकोर्ट के फैसले को शिक्षा विभाग चुनौती देने की तैयारी में, जानिये क्या है पूरा मामला
Para-teacher Breaking: Challenges ahead for para-teachers; Education Department preparing to challenge High Court verdict—here are the details of the case.

रांची। पारा शिक्षकों की चिंता बढ़ाने वाली एक खबर है। राज्य सरकार पारा शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ाने जा रही है। हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों के हितों में जो फैसला दिया था, अब उस फैसलो को शिक्षा विभाग चुनौती देने जा रहा है। दरअसल झारखंड के सहायक अध्यापकों यानी पारा शिक्षकों से जुड़ा शैक्षणिक प्रमाण पत्र विवाद अब एक बार फिर हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंचने जा रहा है। पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को एकल पीठ से मिली राहत के बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने इस आदेश को चुनौती देने के लिए एलपीए दायर करने का निर्णय लिया है।
जाहिर है अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट की खंडपीठ में होगी। मामला उन सहायक अध्यापकों से जुड़ा है, जिनके शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के दौरान उनकी मान्यता को लेकर सवाल उठे थे। प्रमाण पत्रों को मान्य नहीं पाए जाने के आधार पर पूर्वी सिंहभूम में संबंधित शिक्षकों को सेवा से हटाने और उनका मानदेय रोकने की कार्रवाई की गई थी। इसके खिलाफ प्रभावित शिक्षकों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
एकल पीठ से मिली थी शिक्षकों को राहत
आपको याद होगा पिछले सप्ताह झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक की ओर से की गई सेवा समाप्ति और मानदेय रोकने की कार्रवाई को निरस्त कर दिया था। अदालत ने संबंधित शिक्षकों को अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का निर्देश भी दिया था।
एकल पीठ के इस आदेश के बाद जहां प्रभावित पारा शिक्षकों को राहत मिली, वहीं अब शिक्षा परियोजना ने इसे खंडपीठ के समक्ष चुनौती देने का फैसला किया है। इसके बाद मामले की दिशा एक बार फिर बदल गई है।
प्रमाण पत्रों की मान्यता बनी विवाद की मुख्य वजह
दरअसल, सहायक अध्यापक सेवा शर्त नियमावली 2022 लागू होने के बाद पारा शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में सहायक अध्यापकों के शैक्षणिक और अन्य प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया।सत्यापन के दौरान कुछ शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की मान्यता को लेकर आपत्तियां सामने आईं।
रिपोर्टों के अनुसार, इलाहाबाद और देवघर के कुछ संस्थानों से जारी मैट्रिक और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र भी जांच के दायरे में आए थे। इनमें इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ, हिंदी महिला विद्यापीठ और हिंदी विद्यापीठ, देवघर से जुड़े प्रमाण पत्रों का उल्लेख किया गया है। इसी आधार पर अलग-अलग जिलों में संबंधित सहायक अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। कहीं सेवा से हटाने के आदेश दिए गए तो कहीं मानदेय रोक दिया गया।
अब खंडपीठ तय करेगी आगे की राह
एकल पीठ के आदेश के खिलाफ एलपीए दाखिल होने के बाद मामला हाईकोर्ट की खंडपीठ के सामने पहुंचेगा। वहां प्रमाण पत्रों की मान्यता, उनके आधार पर की गई विभागीय कार्रवाई और शिक्षकों की सेवा से जुड़े मुद्दों पर फिर से सुनवाई होगी।बकाया मानदेय का मामला भी महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि एकल पीठ ने अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय के भुगतान का निर्देश दिया है।
1500 से अधिक सहायक अध्यापकों की नजर फैसले पर
प्रमाण पत्र सत्यापन के बाद कार्रवाई से प्रभावित 1500 से अधिक सहायक अध्यापक इस मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि वर्तमान हाईकोर्ट आदेश पूर्वी सिंहभूम के मामले से संबंधित है, लेकिन आगे आने वाला न्यायिक निर्णय राज्य के अन्य जिलों में इसी तरह के प्रमाण पत्र विवादों से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।फिलहाल एकल पीठ से मिली राहत के बाद भी पारा शिक्षकों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। JEPC के एलपीए के फैसले के बाद अब सबकी नजर हाईकोर्ट की खंडपीठ पर टिक गई है।












