झारखंड: वाह कविता दीदी! नंगे पांव साड़ी में दौड़ीं 1600 मीटर, हौसले ने जीत लिया मैदान, भर्ती ट्रायल दौड़ में महिला ने दिखाया ऐसा दम, लोग रह गये हैरान

रामगढ़। कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिनके सामने मुश्किलें छोटी पड़ जाती हैं। कुछ हौसले ऐसे होते हैं, जिन्हें किसी महंगे जूते, स्पोर्ट्स ड्रेस या सुविधाओं की जरूरत नहीं होती। बस आंखों में मंजिल और दिल में उसे हासिल करने का जुनून चाहिए। रामगढ़ के मैदान में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब दुलमी की कविता कुमारी साड़ी पहनकर, नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ में उतर गईं। उन्होंने दौड़ पूरी की तो मैदान में मौजूद हर शख्स की नजरें उनकी ओर टिक गईं।
रामगढ़ जिला में होमगार्ड की बहाली होनी है। उससे पहले एकेडमी की ओर से 1600 मीटर दौड़ का ट्राइल हुआ। उसमें कई ऐसी महिलायें शामिल हुई जो साड़ी पहनकर दौड़ी। उसी में से एक ये हैं। 284 पदों के लिए होने वाली ये बहाली रामगढ़ जिला में 24 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक होनी है। इसमें महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीट आरक्षित है साथ विधवा और तलाकशुदा महिला के लिए अलग से 5 प्रतिशत आरक्षण है।
— Sunny Sharad (@sunny_sharad) October 5, 2026
आगामी 24 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच होने वाली होमगार्ड बहाली को लेकर रामगढ़ में इन दिनों युवाओं और महिलाओं में जबर्दस्त उत्साह है। 284 पदों पर होने वाली इस बहाली के लिए अभ्यर्थी दिन-रात शारीरिक तैयारी में जुटे हैं। इसी क्रम में एक निजी डिफेंस अकादमी की ओर से 4 अक्टूबर को 1600 मीटर दौड़ का ट्रायल आयोजित किया गया था। बड़ी संख्या में युवक-युवतियां इसमें शामिल हुए। लेकिन इस दौड़ में कविता कुमारी का जज्बा सबसे अलग नजर आया।
कविता मैदान में न तो स्पोर्ट्स ड्रेस में पहुंची थीं और न ही उनके पैरों में दौड़ने वाले जूते थे। उन्होंने साड़ी पहन रखी थी और नंगे पांव ही 1600 मीटर की दौड़ में उतर गईं। आमतौर पर ऐसी कठिन दौड़ के लिए अभ्यर्थी विशेष जूते और स्पोर्ट्स कपड़े पहनकर तैयारी करते हैं। लेकिन कविता के सामने इन सुविधाओं की कमी उनकी मंजिल के रास्ते में दीवार नहीं बन सकी।
उन्होंने साड़ी को संभालते हुए दौड़ शुरू की और देखते ही देखते पूरी ऊर्जा के साथ मैदान में दौड़ती चली गईं। कदमों में थकान हो सकती थी, रास्ते में मुश्किलें हो सकती थीं, लेकिन चेहरे पर अपने लक्ष्य को पाने का जज्बा साफ दिखाई दे रहा था। जब उन्होंने 1600 मीटर की दूरी पूरी की तो यह सिर्फ एक ट्रायल की समाप्ति नहीं थी, बल्कि उनके आत्मविश्वास की जीत थी।
रामगढ़ के सोसो गांव की रहने वाली कविता का दौड़ता हुआ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो देखने वाले लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। कोई इसे संघर्ष की तस्वीर बता रहा है तो कोई इसे महिलाओं के हौसले की मिसाल। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं—“वाह कविता दीदी!”
कविता की यह दौड़ इसलिए भी खास है क्योंकि इसके पीछे सिर्फ सरकारी नौकरी पाने की कोशिश नहीं, बल्कि अपने जीवन को बदलने का सपना भी दिखाई देता है। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच मैदान में पहुंचकर शारीरिक तैयारी करना अपने आप में चुनौती है। लेकिन कविता ने दिखा दिया कि अगर लक्ष्य मजबूत हो तो परिस्थितियां इंसान के कदम रोक नहीं सकतीं।
उनकी हिम्मत ने न केवल उन्हें सोशल मीडिया पर पहचान दिलाई, बल्कि दूसरे अभ्यर्थियों का भी उत्साह बढ़ाया। कविता के वीडियो के वायरल होने के बाद अंकित रनर अकादमी ने उन्हें सम्मानित करने का फैसला किया और अकादमी के सदस्य उनके घर भी पहुंचे।
रामगढ़ में होने वाली होमगार्ड बहाली महिलाओं के लिए भी खास मौका है। कुल 284 पदों में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए अलग से 5 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में बड़ी संख्या में महिलाएं अपने सपनों को पंख देने के लिए मैदान में पसीना बहा रही हैं।
कविता की कहानी इसी संघर्ष की एक तस्वीर है। एक तरफ साड़ी, नंगे पैर और सीमित संसाधन; दूसरी तरफ खाकी वर्दी पहनने का सपना। उन्होंने बता दिया कि दौड़ने के लिए सबसे जरूरी जूते नहीं, बल्कि हौसले होते हैं।
शायद इसी वजह से कविता की वह 1600 मीटर की दौड़ सिर्फ एक दौड़ नहीं रही। वह उन तमाम महिलाओं के लिए उम्मीद बन गई, जो परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं।
कविता ने मैदान में दौड़ते हुए जैसे एक संदेश दिया—
“रास्ता मुश्किल हो सकता है, साधन कम हो सकते हैं, लेकिन अगर मंजिल पाने का हौसला हो तो कदम खुद रास्ता बना लेते हैं।”
और यही वजह है कि आज रामगढ़ के मैदान से उठी कविता की कहानी सिर्फ एक अभ्यर्थी की कहानी नहीं, बल्कि हौसले, संघर्ष और सपनों के पीछे भागती एक बेटी की कहानी बन गई है।









