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मां के साथ आखिरी सफर पर निकले हेमंत सोरेन, फूलों से सजी एंबुलेंस में बेटे ने निभाया अंतिम साथ, बहती आंसूओं के साथ अंतिम विदाई,…

Hemant Soren set out on the final journey with his mother; the son accompanied her in a flower-adorned ambulance for the last time, bidding a tearful farewell...

रामगढ़। मां के साथ जिंदगी का सफर तो हर बेटा तय करता है, लेकिन मां के साथ आखिरी सफर… शायद इससे ज्यादा भावुक पल किसी बेटे के लिए नहीं हो सकता। गुरुवार को ऐसा ही मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी मां स्वर्गीय रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर के साथ पैतृक गांव नेमरा के लिए रवाना हुए।

 

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गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर को फूलों से सजी एंबुलेंस में रखकर काफिला कोठार ओवरब्रिज के समीप से नेमरा के लिए रवाना हुआ। एंबुलेंस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी मां के पार्थिव शरीर के समीप बैठे रहे। मां की अंतिम यात्रा में बेटे का यह साथ वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला दृश्य था।

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एंबुलेंस आगे बढ़ती रही और उसके भीतर एक बेटा अपनी मां के साथ अंतिम सफर पर था। फूलों से सजी एंबुलेंस के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, लेकिन उस पूरे काफिले के बीच सबसे ज्यादा महसूस हो रही थी तो वह थी एक मां को खोने की पीड़ा और अंतिम विदाई का मौन।

 

मां के साथ आखिरी बार गांव की ओर

रूपी सोरेन का पार्थिव शरीर अब उसी नेमरा गांव की ओर जा रहा था, जहां से सोरेन परिवार की कई यादें जुड़ी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का अपनी मां के पार्थिव शरीर के साथ एंबुलेंस में बैठकर गांव की ओर जाना लोगों को भावुक कर गया।

एंबुलेंस के पीछे भी बड़ी संख्या में लोगों का काफिला चल रहा था। रास्ते में लोगों की निगाहें उस एंबुलेंस पर टिकी थीं, जिसमें एक मां अपने अंतिम सफर पर थीं और उनका बेटा आखिरी बार उनके साथ था।

 

मुख्यमंत्री के काफिले की अगुवाई रामगढ़ उपायुक्त ऋतुराज और पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुनायत कर रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। काफिले में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे लोग और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल रहे।एंबुलेंस के आगे मुख्यमंत्री का काफिला चल रहा था, जबकि पीछे बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल थे।

 

नेमरा में होगी अंतिम विदाई

रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए नेमरा ले जाया जा रहा है। गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं। जिस गांव की मिट्टी से उनका जीवन जुड़ा रहा, अब उसी मिट्टी में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।रूपी सोरेन के निधन की खबर के बाद से ही अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। मोरहाबादी से लेकर नेमरा तक हर जगह शोक का माहौल है।

 

आज एक मां अपने अंतिम सफर पर है और एक बेटा उनके साथ कदम-दर-कदम चल रहा है। फूलों से सजी वह एंबुलेंस सिर्फ एक पार्थिव शरीर को नहीं ले जा रही, बल्कि अपने भीतर एक बेटे की अनगिनत यादें, मां की ममता और बिछड़ने का वह दर्द समेटे हुए है, जिसे शब्दों में बयान करना शायद संभव नहीं।नेमरा की मिट्टी अब रूपी सोरेन को अंतिम विदाई देगी। मां की छांव भले ही हमेशा के लिए उठ गई हो, लेकिन उनकी यादें और ममता की छाप परिवार और उनसे जुड़े लोगों के जीवन में हमेशा बनी रहेगी।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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