झारखंड का ये विभाग में घूसखोरी सबसे बदनाम, 20 दिनों में ACB ने 10 को किया गिरफ्तार, अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक कई हैं दागदार
झारखंड में ACB की कार्रवाई तेज, 25 दिनों में 10 गिरफ्तार; जमीन घोटालों की जांच Meta Description: झारखंड में जमीन से जुड़े मामलों में ACB की कार्रवाई। दाखिल-खारिज में रिश्वत, हजारीबाग वन भूमि मामला और NH-33 मुआवजा अनियमितता समेत विभिन्न मामलों में 10 गिरफ्तारियों का विवरण।

रांची। झारखंड में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी है। यूं तो रिश्वतखोरी के आये दिन मामले आ रहे हैं, लेकिन एक विभाग घूसखोरी के मामले में ज्यादा बदनाम है। जी हां, वो विभाग है राजस्व विभाग। ACB के आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में जमीन से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा है। लिहाजा सबसे ज्यादा कार्रवाई भी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इसी विभाग में की है।
बात चाहे दाखिल-खारिज के नाम पर रिश्वत लेने की हो या फिर सरकारी दस्तावेज गायब करने, वन भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री और राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में गड़बड़ी जैसे मामलों में जांच एजेंसी ने कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 15 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 के बीच अलग-अलग मामलों में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी का विवरण सामने आया है।
गिरफ्तार लोगों में राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय के कर्मी, भू-अर्जन कार्यालय के कर्मचारी और जमीन से जुड़े कथित घोटालों में शामिल अन्य लोग हैं। इन मामलों ने जमीन के रिकॉर्ड, राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं और सरकारी मुआवजे के भुगतान में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
दाखिल-खारिज के नाम पर 15 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप
ACB की कार्रवाई में जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़ा मामला भी शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 15 सितंबर को चतरा सदर अंचल के राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को 15 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
दाखिल-खारिज जमीन के स्वामित्व में बदलाव के बाद राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया है। इस काम के बदले रिश्वत मांगने का आरोप सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को सामने लाता है।
वहीं, रांची के नामकुम अंचल में दाखिल-खारिज से संबंधित दस्तावेज गायब करने के मामले में 22 सितंबर को तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है। जांच एजेंसी इस मामले में दस्तावेजों की स्थिति और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
हजारीबाग में वन भूमि के कथित घोटाले में चार गिरफ्तार
हजारीबाग में वन भूमि से जुड़े कथित घोटाले के मामले में भी ACB ने कार्रवाई की है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 23 सितंबर को कुलेश्वर प्रजापति को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 7 अक्टूबर को विशेश्वर प्रजापति, शंकर प्रजापति और रामगति गुप्ता की गिरफ्तारी हुई।
इस मामले में सरकारी जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री और दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी जमीन के वास्तविक स्वामित्व, दस्तावेजों की वैधता और लेन-देन में शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।जमीन के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी से स्वामित्व और कानूनी लेन-देन को लेकर विवाद पैदा हो सकते हैं। ऐसे में जांच के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन और जिम्मेदार लोगों की पहचान महत्वपूर्ण होगी।
NH-33 चौड़ीकरण के मुआवजे में अनियमितता की जांच
रामगढ़ जिले के मांडू क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (NH-33) के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित करीब 1.92 एकड़ जमीन के मुआवजे में कथित गड़बड़ी का मामला भी ACB की जांच के दायरे में है।इस मामले में 1 अक्टूबर को तत्कालीन अमीन बालेश्वर प्रसाद और भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान सहायक प्रवीण कुमार सिन्हा के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसी मुआवजे के निर्धारण, जमीन से जुड़े दस्तावेजों और सरकारी राशि के भुगतान की प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित अनियमितता किस स्तर पर हुई और भुगतान प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।
चतरा एसडीएम कार्यालय के प्रधान लिपिक पर भी कार्रवाई
चतरा में एसडीएम कार्यालय के प्रधान लिपिक बासुदेव राम को 8 अक्टूबर को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, तत्कालीन अंचल अधिकारी डॉ. श्वेता वर्मा के खिलाफ भी जमीन से जुड़े मामले में जांच जारी होने की सूचना है।
हालांकि, डॉ. श्वेता वर्मा के मामले में जांच की विस्तृत स्थिति और आरोपों का पूरा ब्योरा उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच चलने या गिरफ्तारी होने मात्र से आरोप सिद्ध नहीं हो जाते। संबंधित मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
जमीन के मामलों में बिचौलियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जमीन से संबंधित सरकारी कामकाज में दाखिल-खारिज, राजस्व रिकॉर्ड में सुधार, दस्तावेजों का सत्यापन और मुआवजा भुगतान जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इन प्रक्रियाओं के दौरान कथित बिचौलियों की भूमिका और सरकारी कर्मचारियों के साथ संभावित गठजोड़ को लेकर भी जांच की जा रही है।
ACB के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि कथित अनियमितताएं अलग-अलग स्तर पर हुईं या कुछ मामलों में कर्मचारियों और अन्य लोगों के बीच किसी नेटवर्क की भूमिका रही। हालांकि, किसी संगठित नेटवर्क की मौजूदगी जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
15 सितंबर से 8 अक्टूबर तक हुई गिरफ्तारियों का विवरण
तारीख मामला गिरफ्तार आरोपी
15 सितंबर चतरा सदर अंचल में कथित रिश्वतखोरी सतीश कुमार
22 सितंबर नामकुम अंचल में दस्तावेज गायब मनोज कुमार दीक्षित, दीपक कुमार
23 सितंबर हजारीबाग वन भूमि मामला कुलेश्वर प्रजापति
1 अक्टूबर मांडू में NH-33 मुआवजा अनियमितता बालेश्वर प्रसाद, प्रवीण कुमार सिन्हा
7 अक्टूबर हजारीबाग वन भूमि मामला विशेश्वर प्रजापति, शंकर प्रजापति, रामगति गुप्ता
8 अक्टूबर चतरा एसडीएम कार्यालय बासुदेव राम
अब जांच के नतीजों पर टिकी नजरें
जमीन से जुड़े मामलों में लगातार कार्रवाई के बाद अब जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। ACB को यह पता लगाना है कि कथित अनियमितताएं किन परिस्थितियों में हुईं, संबंधित लोगों की क्या भूमिका रही और सरकारी रिकॉर्ड या भुगतान प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।इन मामलों का महत्व केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जमीन के दस्तावेजों की विश्वसनीयता, आम लोगों के राजस्व संबंधी काम और सरकारी मुआवजे के पारदर्शी वितरण के लिहाज से भी जांच के परिणाम अहम होंगे।












