जैप कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जैप के इन कर्मचारियों को मिलेगा 5 साल का बकाया वेतन और इंक्रीमेंट
झारखंड हाईकोर्ट ने जैप के 91 चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को राहत दी। 2016 से 2021 तक के बकाया वेतन, इंक्रीमेंट और परिणामी सेवा लाभ से जुड़ा पूरा मामला जानें।

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप) के कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सोनू कुमार एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्मचारियों को बकाया वेतन और इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) सहित अन्य परिणामी सेवा लाभ देने का आदेश दिया है। अदालत ने इन कर्मचारियों को ‘दिकेश कुमार एवं अन्य’ मामले में पहले दी गई राहत का लाभ प्रदान किया है। इस फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिली है, जो नियुक्तियां रद्द होने के बाद लंबे समय तक सेवा से बाहर रहे थे और पुनर्बहाली के बावजूद बकाया वेतन के लिए संघर्ष कर रहे थे।
जैप के 91 कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
झारखंड हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद संबंधित 91 चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को 23 जून 2016 से 22 जनवरी 2021 तक की अवधि का बकाया वेतन और इंक्रीमेंट का लाभ मिलेगा। यह वह अवधि है, जब कर्मचारी सेवा से बाहर रहे थे।मामले में कर्मचारियों की ओर से मांग की गई थी कि उन्हें सेवा से बाहर रहने की अवधि के लिए आर्थिक और परिणामी सेवा लाभों से वंचित नहीं किया जाए। अदालत ने उन्हें पूर्व के एक मामले में दी गई राहत का लाभ प्रदान करते हुए उनके पक्ष में आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2016 में झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप) के चतुर्थवर्गीय पदों पर हुई नियुक्तियों को रद्द किए जाने से जुड़ा है। नियुक्तियां रद्द होने के कारण संबंधित कर्मचारी सेवा से बाहर हो गए थे। इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत उनकी पुनर्बहाली हुई।
हालांकि, नौकरी पर दोबारा बहाल होने के बाद भी कर्मचारियों के सामने बकाया वेतन का सवाल बना हुआ था। राज्य सरकार ने ‘नो वर्क, नो पे’ यानी काम नहीं तो वेतन नहीं के सिद्धांत का हवाला देते हुए सेवा से बाहर रहने की अवधि का वेतन देने से इनकार किया था।इसके बाद कर्मचारियों ने बकाया वेतन और अन्य सेवा लाभों की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया।
कर्मचारियों ने कहा- नियुक्ति रद्द होने में उनकी गलती नहीं थी
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कर्मचारी अपनी इच्छा से सेवा से बाहर नहीं रहे थे। नियुक्तियां राज्य सरकार की ओर से रद्द किए जाने के कारण वे काम नहीं कर पाए थे।कर्मचारियों का तर्क था कि जब सेवा से बाहर रहने के लिए वे स्वयं जिम्मेदार नहीं थे, तो उन्हें उस अवधि के वेतन और अन्य सेवा लाभों से वंचित करना उचित नहीं है। उन्होंने अदालत से बकाया वेतन के साथ इंक्रीमेंट और अन्य परिणामी लाभ देने की मांग की।
‘नो वर्क, नो पे’ के विवाद में मिला लाभ
इस मामले में मुख्य विवाद सेवा से बाहर रहने की अवधि के लिए वेतन भुगतान को लेकर था। राज्य सरकार ने ‘नो वर्क, नो पे’ के सिद्धांत का हवाला दिया था, जबकि कर्मचारियों की ओर से कहा गया कि काम नहीं कर पाने की स्थिति उनके नियंत्रण में नहीं थी।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं को ‘दिकेश कुमार एवं अन्य’ मामले में पहले दी गई राहत का लाभ प्रदान किया। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों को सेवा से बाहर रहने की अवधि के बकाया वेतन और इंक्रीमेंट सहित अन्य परिणामी सेवा लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
23 जून 2016 से 22 जनवरी 2021 तक का मिलेगा लाभ
अदालत के आदेश के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों के लिए 23 जून 2016 से 22 जनवरी 2021 तक की अवधि महत्वपूर्ण है। इसी अवधि के बकाया वेतन और इंक्रीमेंट के लाभ का मामला याचिका में उठाया गया था।इस फैसले से जैप के 91 चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को लंबे समय से लंबित आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। कर्मचारियों के लिए यह राहत इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुनर्बहाली के बाद भी सेवा से बाहर रहने की अवधि के भुगतान को लेकर विवाद बना हुआ था।
निष्कर्ष: झारखंड हाईकोर्ट के आदेश से जैप के 91 चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को बकाया वेतन और इंक्रीमेंट के लाभ का रास्ता साफ हुआ है। अदालत ने उन्हें पूर्व के ‘दिकेश कुमार एवं अन्य’ मामले में दी गई राहत का लाभ प्रदान किया है।












