भुखमरी के कगार पर झारखंड के मनरेगा कर्मी, 9 मार्च से चरणबद्ध आंदोलन और हड़ताल का बड़ा ऐलान
Jharkhand's MNREGA workers on the verge of starvation, announce a phased protest and strike from March 9th.

रांची/25.2.26: झारखंड में मनरेगा कर्मचारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले 8 से 10 महीनों तक मानदेय का भुगतान न होने और अपनी मांगों की लगातार हो रही अनदेखी से नाराज मनरेगा कर्मियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है साथ ही सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है।
ऑनलाइन बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को ‘झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ’ की एक महत्वपूर्ण गूगल मीट बैठक आयोजित की गई। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरूद्ध पाण्डेय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य भर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सरकार के उदासीन रवैये के कारण अब कड़े कदम उठाने का समय आ गया है।
आर्थिक संकट और भुखमरी की नौबत
बैठक के दौरान कर्मियों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि सरकार द्वारा लंबे समय से उनकी जायज मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। सबसे बड़ी समस्या मानदेय की है; पिछले 8-10 महीनों से कर्मियों को उनका वेतन नहीं मिला है। इस कारण सभी कर्मचारी भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और उनके परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। कर्मियों का कहना है कि वे अब और अधिक शोषण बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं हैं।
हड़ताल की रूपरेखा और अल्टीमेटम
मजबूरी और हताशा में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने सर्वसम्मति से चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है, जिसकी रूपरेखा इस प्रकार है:
- सांकेतिक हड़ताल: दिनांक 09 मार्च 2026 से 11 मार्च 2026 तक सभी कर्मचारी तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
- अनिश्चितकालीन हड़ताल: मनरेगा कर्मियों ने 11 मार्च तक सरकार द्वारा उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है और बकाया मानदेय का भुगतान सुनिश्चित नहीं होता है, तो 12 मार्च 2026 से राज्य के सभी मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
मालूम हो कि वर्ष 2024 में झारखंड में मनरेगा कर्मियों की 78 दिनों तक हड़ताल चली थी। सरकार के साथ सफल वार्ता होने पर हड़ताल समाप्त कर दी गई थी।कर्मियों की 5 सूत्री मांगों के साथ मुख्य मांगों में 30% मानदेय वृद्धि, ग्राम रोजगार सेवकों को प्रति माह 1500 रुपये ईंधन खर्च और बीमा सुविधा शामिल थी,
जिलों से एकजुटता की अपील
प्रदेश अध्यक्ष अनिरूद्ध पाण्डेय ने इसे एक बड़ा लेकिन मजबूरी में लिया गया फैसला बताया है। संघ ने राज्य के सभी जिलों की इकाइयों और मनरेगा कर्मियों से अपील की है कि वे पूरी एकजुटता दिखाएं और इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दें।
मनरेगा कर्मियों के हड़ताल से राज्य में चल रहे मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्यों के पूरी तरह से ठप होने की प्रबल संभावना है, जिसका सीधा असर ग्रामीण रोजगार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। आंदोलन के कारण एक तरफ जॉब कार्ड धारी कर्मियों के समक्ष रोजगार की समस्या होगी वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के सरकारी योजना कार्य अधूरे में फंस सकते हैं।









