भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई:जमीन के पंजी 2 में छेड़छाड़ करना पड़ा महंगा… रिटायरमेंट से 6 महीने पहले अंचल निरीक्षक (CI) को मिली ‘अनिवार्य सेवानिवृत्ति’
Major crackdown on corruption: Tampering with land register 2 proved costly... Six months before retirement, the Circle Inspector (CI) received 'compulsory retirement'.

धनबाद/गोविंदपुर: झारखंड सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए राजस्व विभाग के एक बड़े अधिकारी पर गाज गिराई है। धनबाद के गोविंदपुर अंचल में तैनात अंचल निरीक्षक (CI) कुमार सत्यम भारद्वाज को गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के आरोप में अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2018 का है, जब कुमार सत्यम भारद्वाज लातेहार जिले के बालूमाथ अंचल में पदस्थापित थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी दस्तावेजों के साथ गंभीर छेड़छाड़ की:
- पंजी-2 में हेराफेरी: भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड (पंजी-2) में अवैध रूप से बदलाव किए।
- रैयत का नाम बदलना: जांच में पाया गया कि उन्होंने मूल रैयत (जमीन के असली मालिक) का नाम हटाकर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम जोड़ दिया था।
- विभागीय जांच: इस मामले में लंबी विभागीय कार्यवाही चली, जिसमें उन पर लगे आरोपों की पुष्टि हुई।
रिटायरमेंट के मुहाने पर गिरी गाज
चौंकाने वाली बात यह है कि कुमार सत्यम भारद्वाज अगले 6 महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन सेवाकाल समाप्त होने से ठीक पहले सरकार की इस सख्त कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। हालांकि, भारद्वाज ने इस विभागीय कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
नई व्यवस्था: नेहा सिंह को मिला प्रभार
CI कुमार सत्यम भारद्वाज को हटाए जाने के बाद गोविंदपुर अंचल के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए राजस्व कर्मचारी नेहा सिंह को अंचल निरीक्षक (CI) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
कार्रवाई से स्पष्ट है कि राजस्व रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार पुराने मामलों की फाइलों को भी खंगाल रही है।









