सुप्रीम कोर्ट का कड़ा फैसला, ‘कुत्ते ने काटा तो राज्य सरकार देगी मुआवजा’, कोर्ट ने कहा, जो आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित, वे अपने घर ले जाएं
The Supreme Court issued a strong ruling, stating that if a dog bites, the state government will provide compensation. Those concerned about stray dogs should take them home.

Stray Dog Attack Case/15.1.25: देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग को कुत्ते काटते हैं या उसकी मौत होती है, तो राज्य सरकारों को मुआवजा देना होगा। साथ ही, कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जिम्मेदारी तय करने के संकेत भी दिए गए हैं। यह टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने की है।
कोर्ट ने साफ कहा कि पिछले कई वर्षों से नियम और दिशा-निर्देश मौजूद होने के बावजूद राज्य सरकारें उन्हें लागू करने में पूरी तरह विफल रही हैं, जिसका खामियाजा आम नागरिकों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग को कुत्ते के काटने से गंभीर चोट आती है या उसकी मौत होती है, तो संबंधित राज्य सरकार को मुआवजा देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, “अगर आपको कुत्तों से इतना ही प्यार है, तो उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, जहां वे लोगों को डराते हैं, काटते हैं और गंदगी फैलाते हैं। इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”
यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की दलीलों के बाद आई। मेनका गुरुस्वामी ने अदालत में कहा था कि आवारा कुत्तों का मुद्दा एक भावनात्मक विषय है और इसे संतुलन के साथ देखा जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा, “यह भावुकता सिर्फ कुत्तों के लिए ही क्यों दिखाई देती है? बच्चों और बुजुर्गों के लिए वही संवेदना क्यों नहीं?”
इसके जवाब में मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि उन्हें इंसानों की भी उतनी ही चिंता है, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि जमीन पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
मुआवजे को लेकर साफ संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कुत्तों के हमले में किसी बच्चे या बुजुर्ग को चोट लगती है या उसकी मौत हो जाती है, तो इसके लिए राज्य सरकारों को “भारी मुआवजा” देना होगा। कोर्ट ने कहा कि बीते पांच वर्षों में राज्य सरकारों ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।जस्टिस नाथ ने कहा,“हम हर ऐसे मामले में राज्य सरकारों से मुआवजा दिलवाएंगे। सरकारें आंख मूंदकर नहीं बैठ सकतीं।”
कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर भी जिम्मेदारी
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने वालों की भी जवाबदेही तय की जाएगी। बेंच ने कहा कि कुत्तों को सड़कों पर खाना खिलाने से वे उसी इलाके में झुंड बनाकर रहने लगते हैं, जिससे हमलों की आशंका बढ़ जाती है।
कोर्ट ने सवाल उठाया,“अगर कोई 9 साल के बच्चे पर कुत्तों का झुंड हमला कर दे, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या हम इस पर आंखें मूंद सकते हैं?”
पहले भी दिए जा चुके हैं आदेश
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 7 नवंबर 2025 को सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। इसके अलावा, सरकारी और सार्वजनिक भवनों में कुत्तों के प्रवेश पर भी रोक लगाने को कहा गया था। हालांकि, इन आदेशों के पालन को लेकर कई जगह विरोध और लापरवाही भी देखने को मिली।
अगली सुनवाई की तारीख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 20 जनवरी को दोपहर 2 बजे तय की है। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यदि राज्य सरकारें और स्थानीय निकाय ठोस कदम नहीं उठाते, तो भविष्य में और भी सख्त निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
यह फैसला न केवल आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताता है, बल्कि यह भी साफ संदेश देता है कि जन सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।









