…जब शिक्षक की शादी का कार्ड सदन में लहराया, माननीय बोले, छुट्टी की इतनी लंबी प्रक्रिया है, कि, कहीं शादी ही ना छूट जाये…अनुरोध पर पिघल गयी सरकार
...When the teacher's wedding card was waved in the House, the honorable said, the leave process is so long that the wedding might be missed...the government relented on the request.

बजट सत्र के दौरान सदन में स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के अवकाश को लेकर जोरदार और हल्की-फुल्की नोकझोंक से भरी बहस हुई। इस सदन में एक शिक्षक का शादी कार्ड लहराया गया, तो चुटकुलों की भी झड़ी लग गई।
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Budget Satr 2026। बजट सत्र के दौरान सदन का माहौल उस समय दिलचस्प हो उठा, जब गंभीर मुद्दे के बीच हल्की मुस्कानें और ठहाके भी सुनाई देने लगे। विषय था—अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की छुट्टी का… । दरअसल बिहार विधान परिषद में तारांकित प्रश्न के जरिए डा. संजीव कुमार सिंह ने शिक्षकों की छुट्टी मुद्दा उठाया।
उन्होंने सदन में कहा कि शिक्षकों को छुट्टी के लिए प्रधानाचार्य के बजाय सीधे निदेशालय के स्तर से स्वीकृति लेनी पड़ रही है। बात को और असरदार बनाने के लिए उन्होंने सदन में एक शिक्षक का शादी कार्ड भी दिखा दिया। शिक्षक की शादी का कार्ड लहराते हुए सदस्य ने कहा, “शादी तय है, कार्ड छप चुका है, आवेदन दिया जा चुका है… बस छुट्टी का इंतजार है!” इतना सुनते ही सदन में हलचल और हल्की हंसी दोनों एक साथ तैर गई।
बिहार विधानसभा के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने मौके पर चुटकी लेते हुए माहौल को और हल्का कर दिया। मुस्कुराते हुए बोले, “कहीं ऐसा तो नहीं कि दूसरी-तीसरी शादी हो?” इस टिप्पणी पर सदन में हंसी की लहर दौड़ गई।
इस पर विभागीय मंत्री लखेन्द्र कुमार रोशन ने छुट्टी की ‘सरकारी यात्रा’ समझाई। उन्होंने बताया कि प्रधानाचार्य की अनुशंसा पहले जिला कल्याण पदाधिकारी के पास जाती है, वहां से निदेशालय और फिर मुख्यालय स्तर पर स्वीकृति मिलती है।
इतनी लंबी प्रक्रिया सुनते ही नीरज कुमार ने तंज कस दिया—
“यह तो नौवां आश्चर्य है! काम स्कूल में करेंगे और छुट्टी निदेशालय से मिलेगी!”
सदन में फिर हल्की खिलखिलाहट गूंज उठी।
मंत्री अशोक चौधरी ने व्यवस्था के पीछे की वजह भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ शिक्षक और प्रधानाचार्य आपसी ‘समझदारी’ से छुट्टियां ले लेते थे, जिसकी जानकारी मुख्यालय तक नहीं पहुंचती थी। इसलिए यह नई प्रणाली लागू की गई।
इस पर डा. संजीव कुमार सिंह ने फिर जोर देते हुए कहा कि यह आवासीय विद्यालय हैं, जहां शिक्षक रहते भी हैं। “ऐसे में छुट्टी की प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए,” उन्होंने आग्रह किया।
बहस के बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह समीक्षा बैठक में इस मुद्दे को देखेंगे।
सभापति ने भी मुस्कुराते हुए जोड़ा, “आप अपने स्तर से देख लीजिए… और छुट्टी भी दिलवा दीजिए।”
इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अंतिम चुटकी से माहौल को यादगार बना दिया—“इतनी चर्चा होगी तो कहीं बनी शादी बिगड़ न जाए… पहले यह देख लीजिए!”
बस फिर क्या था—सदन में मुस्कुराहटों की बरसात हो गई।









