झारखंड: रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की मांग पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, सेवानिवृति की उम्र 65 साल करने की थी याचिका
सेवानिवृत्ति उम्र 65 साल करने और DACP लाभ देने के एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी। दिसंबर में अगली सुनवाई होगी।

रांची: झारखंड में रिटायरमेंट ऐज को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने सेवानिवृति की आयु सीमा को 65 साल करने को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है। दरअसल पशु चिकित्सकों ने सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पशु चिकित्सकों की रिटायरमेंट उम्र 65 साल करने और उन्हें डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) का लाभ देने संबंधी एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है।
राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। इस फैसले के बाद फिलहाल पशु चिकित्सकों को 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति उम्र का लाभ मिलने का रास्ता रुक गया है। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
65 साल रिटायरमेंट की मांग पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
पशु चिकित्सक लंबे समय से एलोपैथिक चिकित्सकों की तरह अपनी सेवानिवृत्ति उम्र 65 वर्ष करने की मांग कर रहे थे। इसके साथ ही उन्हें डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन यानी डीएसीपी का लाभ देने की मांग भी उठाई गई थी। इसी मामले में डॉ. मृत्युंजय कुमार एवं अन्य ने झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने 26 नवंबर 2024 को पशु चिकित्सकों के पक्ष में आदेश पारित किया था। एकल पीठ ने उनकी सेवानिवृत्ति उम्र एलोपैथिक चिकित्सकों के समान 65 वर्ष करने और डीएसीपी का लाभ देने का निर्देश दिया था।
राज्य सरकार की अपील पर एकल पीठ के आदेश पर रोक
एकल पीठ के फैसले से असहमति जताते हुए राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि राज्य सरकार की नीतियों का निर्धारण न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। सरकार ने इसी आधार पर एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी।
अपील पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय, अधिवक्ता अशोक यादव, अधिवक्ता विभोर मयंक और अधिवक्ता अभिजीत आनंद ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी।
450 से अधिक पशु चिकित्सकों की निगाहें दिसंबर की सुनवाई पर
झारखंड में 450 से अधिक पशु चिकित्सक कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट की खंडपीठ के इस आदेश का असर बड़ी संख्या में चिकित्सकों से जुड़े मामले पर पड़ सकता है। फिलहाल 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति उम्र और डीएसीपी का लाभ देने वाला एकल पीठ का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।
अब सभी की निगाहें दिसंबर में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। उस दौरान खंडपीठ राज्य सरकार की अपील और पशु चिकित्सकों की मांग पर आगे विचार करेगी। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पशु चिकित्सकों की रिटायरमेंट उम्र स्थायी रूप से 65 वर्ष नहीं होगी, क्योंकि मामले में अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।
क्या है पूरा मामला?
26 नवंबर 2024: एकल पीठ ने पशु चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 वर्ष करने और डीएसीपी का लाभ देने का आदेश दिया।
इसके बाद: राज्य सरकार ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की।
अब: चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी।
अगली सुनवाई: दिसंबर में निर्धारित की गई है।












