दीये का रहस्य : धनतेरस से भाई दूज तक हर दिन क्यों जलाए जाते हैं दीपक? जानिए पांचों दिनों की अलग-अलग धार्मिक मान्यता, वजह कर देगी हैरान

Dharm Desk : दीपावली सिर्फ रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाली आस्था, परंपरा और पौराणिक कथाओं से जुड़ा उत्सव भी है। धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होने वाले इस पर्व में हर दिन दीपक जलाने की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि धनतेरस, छोटी दिवाली, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज पर दीपक जलाने के पीछे अलग-अलग मान्यताएं क्यों हैं? धार्मिक कथाओं में हर दिन के दीपदान का अपना विशेष महत्व बताया गया है। कहीं यमराज से परिवार की रक्षा की कामना की जाती है, तो कहीं भगवान श्रीकृष्ण और प्रभु श्रीराम की विजय की खुशी में दीप जलाए जाते हैं। आइए जानते हैं पांचों दिनों में दीपक जलाने की परंपरा के पीछे की रोचक वजह।
धनतेरस से भाई दूज तक दीपक जलाने का धार्मिक महत्व
1. धनतेरस पर क्यों जलाया जाता है यम दीपक?
धनतेरस को दीपावली पर्व का पहला दिन माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस की शाम यमराज के लिए दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। यही वजह है कि इस दिन एक विशेष दीपक जलाकर यमराज से परिवार की रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
2. छोटी दिवाली पर क्यों जलाए जाते हैं दीपक?
धनतेरस के अगले दिन छोटी दिवाली मनाई जाती है, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। मान्यता है कि नरकासुर ने बड़ी संख्या में महिलाओं को बंदी बना रखा था, जिन्हें भगवान कृष्ण ने मुक्त कराया।
इस विजय की खुशी में दीप जलाने की परंपरा जुड़ी हुई मानी जाती है। छोटी दिवाली पर जलाए जाने वाले दीपक बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देते हैं। इस दिन घर की साफ-सफाई और दीप सजाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
3. दीपावली पर सबसे ज्यादा दीपक क्यों जलाए जाते हैं?
दीपावली का नाम ही दीपों की पंक्ति से जुड़ा है। इस दिन सबसे अधिक दीपक जलाने के पीछे भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की कथा प्रचलित है। मान्यता है कि 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद जब भगवान श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों ने उनके स्वागत में पूरे नगर को दीपों से रोशन कर दिया था।
तभी से दीपावली पर घरों, मंदिरों और गलियों में दीप जलाने की परंपरा चली आ रही है। दीपक को सुख-समृद्धि, ज्ञान, सकारात्मकता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दीपों की रोशनी जीवन से अंधकार और नकारात्मकता को दूर करने का संदेश देती है।
4. गोवर्धन पूजा पर दीपक जलाने की क्या है वजह?
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र देव के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया था। इससे नाराज होकर इंद्र देव ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों और उनके पशुओं को बारिश से बचाया था। इसके बाद लोगों ने भगवान कृष्ण के प्रति आभार प्रकट करते हुए अन्नकूट और छप्पन भोग अर्पित किए। इसी श्रद्धा और उत्सव के प्रतीक के रूप में गोवर्धन पूजा पर भी दीपक जलाए जाते हैं। यह परंपरा प्रकृति, अन्न और भगवान के प्रति कृतज्ञता का संदेश देती है।
5. भाई दूज पर दीपक जलाने के पीछे क्या है पौराणिक मान्यता?
पांच दिवसीय दीपोत्सव का आखिरी दिन भाई दूज होता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर उनसे मिलने पहुंचे थे। यमुना ने उनका स्वागत किया, तिलक लगाया और उनके सुखी जीवन की कामना की।
बहन के स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा। तभी से भाई दूज पर बहनों द्वारा भाइयों को तिलक लगाने और उनकी आरती उतारने की परंपरा प्रचलित हुई। इस दिन दीपक जलाकर भाई की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल जीवन की कामना की जाती है।
पांचों दिन दीप जलाने का संदेश क्या है?
धनतेरस से भाई दूज तक हर दिन दीपक जलाने की परंपरा के पीछे अलग-अलग धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हैं। धनतेरस पर यमराज से रक्षा की प्रार्थना, छोटी दिवाली पर बुराई पर अच्छाई की विजय, दीपावली पर भगवान श्रीराम के स्वागत की खुशी, गोवर्धन पूजा पर प्रकृति के प्रति आभार और भाई दूज पर भाई-बहन के प्रेम का संदेश मिलता है।इस तरह दीपावली के पांचों दिन जलने वाला दीपक केवल घर को रोशन नहीं करता, बल्कि जीवन में सुख, शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है।












