close
LIVE UPDATE

Jharkhand Transfer News: 56 लिपिकों के ट्रांसफर पर विवाद, नियमों की अनदेखी का आरोप लेकर हाईकोर्ट पहुंचे कर्मचारी, जानिये क्या है पूरा मामला

पलामू प्रमंडल में 56 उच्च एवं निम्न वर्गीय लिपिकों के स्थानांतरण को चुनौती देते हुए कर्मचारियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। नियमों की अनदेखी और पिक एंड चूज नीति अपनाने का आरोप लगाया गया है।

रांची/मेदिनीनगर। झारखंड लिपिकों के तबादले का मुद्दा हाईकोर्ट पहुंच गया है। कर्मचारियों ने अपनी याचिका में नियम विरुद्ध तबादले का आरोप लगाया है। पूरा मामला के पलामू प्रमंडल में क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक द्वारा हाल ही में किए गए 56 उच्च एवं निम्न वर्गीय लिपिकों के स्थानांतरण से जुड़ा है, जिसे लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानांतरण आदेश से प्रभावित कर्मचारियों ने पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

याचिका में स्थानांतरण प्रक्रिया में कथित अनियमितता, ‘पिक एंड चूज’ नीति अपनाने तथा माध्यमिक शिक्षा निदेशक के दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है। कर्मचारियों ने उच्चस्तरीय जांच कराकर वरिष्ठता, सेवा अवधि, दिव्यांगता और पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर नई एवं पारदर्शी स्थानांतरण सूची जारी करने की मांग की है।

नियमों के उल्लंघन का आरोप

तबादले से प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि स्थानांतरण के दौरान निर्धारित नियमों का समान रूप से पालन नहीं किया गया। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों को नियमों के बावजूद उनके वर्तमान जिले में बनाए रखा गया, जबकि अन्य कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया।

गढ़वा से सदर मेदिनीनगर स्थानांतरित उच्च वर्गीय लिपिक प्रदीप कुमार सिंह का कहना है कि स्थानांतरण आदेश जारी करते समय माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पत्र में दिए गए प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि तीन वर्ष से कम सेवा अवधि वाले कई कर्मचारियों को यथास्थान रखा गया, जबकि समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों का स्थानांतरण कर दिया गया।

वरिष्ठता और पारिवारिक परिस्थितियों की अनदेखी

याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 1999 और 2006 से एक ही जिले में कार्यरत कुछ कर्मचारियों को फिर उसी जिले में पदस्थापित कर दिया गया, जबकि कई वरिष्ठ कर्मचारियों की सेवा अवधि, पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज किया गया।

कर्मचारियों का कहना है कि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य प्रशासनिक संतुलन और सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना है, लेकिन इस मामले में दोहरे मानदंड अपनाए गए।

दिव्यांग और अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों का भी मामला उठाया

याचिका में यह भी कहा गया है कि एकमात्र चिन्हित दिव्यांग लिपिक को नियमानुसार नजदीकी स्थान पर पदस्थापित करने के बजाय लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दिया गया।इसके अलावा अनुकंपा के आधार पर नियुक्त एक कर्मचारी का एक वर्ष के भीतर दूसरी बार तबादला किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसे निर्णय स्थानांतरण नीति की मूल भावना के अनुरूप नहीं हैं।

पारदर्शी ट्रांसफर नीति की मांग

प्रभावित कर्मचारियों ने पलामू प्रमंडल में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की तर्ज पर पारदर्शी और नियम आधारित स्थानांतरण व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्पष्ट और समान नियमों के तहत स्थानांतरण होने से विवाद की स्थिति पैदा नहीं होगी।प्रदीप कुमार सिंह ने दावा किया कि हजारीबाग में भी नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आने के बाद स्थानांतरण आदेश रद्द किया गया था। इसी आधार पर उन्होंने पलामू प्रमंडल में भी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर वर्तमान स्थानांतरण आदेश निरस्त करने की मांग की है।

हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच चुका है। याचिकाकर्ताओं को उम्मीद है कि न्यायालय स्थानांतरण प्रक्रिया की वैधता और नियमों के पालन की समीक्षा करेगा। फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में कर्मचारियों और शिक्षा विभाग दोनों की नजर अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *