Sawan Kalashtami 2026: कब है सावन कालाष्टमी? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, काल भैरव की पूजा विधि, महत्व और क्या करें अर्पित
Sawan Kalashtami 2026 Date: सावन कालाष्टमी 6 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। जानें काल भैरव पूजा विधि, अष्टमी तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व, क्या अर्पित करें और कुत्ते को भोजन कराने का महत्व।

Sawan Kalashtami 2026: सावन का महीना हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। भगवान शिव की आराधना के लिहाज से इस माह कई अहम व्रत आयेंगे। इसी माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सावन कालाष्टमी मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सुख, सुरक्षा और साहस का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सावन कालाष्टमी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण अष्टमी तिथि की शुरुआत 5 अगस्त 2026 को रात 8 बजकर 42 मिनट से होगी और इसका समापन 6 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा।उदया तिथि के अनुसार सावन कालाष्टमी का व्रत और पूजा 6 अगस्त 2026 (गुरुवार) को की जाएगी।
काल भैरव कौन हैं?
भगवान काल भैरव को भगवान शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों में उन्हें समय (काल), न्याय और सुरक्षा का अधिष्ठाता देव बताया गया है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं, उन्हें भय, शत्रु और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है।काशी में भगवान काल भैरव को ‘कोतवाल’ का विशेष स्थान प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद काल भैरव के दर्शन करने से तीर्थ यात्रा पूर्ण मानी जाती है।
सावन कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
सावन कालाष्टमी पर व्रत रखने और पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो भय, शत्रु बाधा, न्यायिक परेशानियों या मानसिक तनाव से मुक्ति की कामना करते हैं।
सावन कालाष्टमी पूजा विधि
• प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
• भगवान शिव और काल भैरव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
• पूजा स्थल की साफ-सफाई कर चौकी पर काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
• सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
• फूल, अक्षत, रोली, कुमकुम, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
• ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
• काल भैरव अष्टक का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
• अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करें।
काल भैरव को क्या अर्पित करें?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन भगवान काल भैरव को ये वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है—
• सरसों का तेल
• काले तिल
• उड़द की दाल
• धूप और दीप
• गुड़ एवं मीठे पकवान
• श्रद्धानुसार काले वस्त्र का दान
साथ ही जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और दान देना भी पुण्यदायी माना जाता है।
कालाष्टमी पर कुत्ते को भोजन कराने का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन है। इसलिए कालाष्टमी के दिन कुत्ते को रोटी, दूध, बिस्कुट या अन्य उपयुक्त भोजन कराना शुभ माना जाता है। इसे सेवा, करुणा और भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त करने का प्रतीक माना जाता है।
क्या करें और क्या न करें?
ये करें
• भगवान शिव और काल भैरव का स्मरण करें।
• सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
• गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान दें।
• पशु-पक्षियों की सेवा करें।
ये ना करें
• किसी का अपमान या विवाद न करें।
• नशे और तामसिक भोजन से बचें।
• किसी जीव को कष्ट न पहुंचाएं।
• झूठ और छल-कपट से दूर रहें।
नोट: धार्मिक मान्यताएं विभिन्न परंपराओं और क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। श्रद्धालु अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करें।









