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प्रेग्नेंसी में अचानक ब्लीडिंग देखकर घबराएं नहीं! हर बार मिसकैरेज नहीं होता, लेकिन इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग या स्पॉटिंग क्यों होती है? जानिए पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में इसके कारण, कब यह सामान्य हो सकती है और किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Pregnancy Bleeding: प्रेग्नेंसी का दौर किसी भी महिला के लिए बेहद खास होता है, लेकिन इस दौरान अचानक ब्लीडिंग या स्पॉटिंग हो जाए तो चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। गर्भावस्था के दौरान शरीर बदलाव के दौर से गुजरता है। इस दौरान कई तरह की शारीरिक परेशानियां भी होती है। अक्सर परिवार में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि कहीं गर्भपात तो नहीं हो गया। हालांकि, प्रेग्नेंसी में हर तरह की ब्लीडिंग का मतलब मिसकैरेज नहीं होता।

ब्लीडिंग की वजह गर्भावस्था के किस चरण में हुई है, कितनी मात्रा में खून आया है और इसके साथ दर्द या दूसरे लक्षण हैं या नहीं, इस पर निर्भर कर सकती है। कुछ मामलों में वजह अपेक्षाकृत सामान्य हो सकती है, जबकि कुछ स्थितियों में तत्काल मेडिकल जांच जरूरी होती है।

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पहली तिमाही में ब्लीडिंग क्यों होती है?

गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में हल्की स्पॉटिंग कुछ महिलाओं में देखी जा सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान सर्विक्स में रक्त प्रवाह बढ़ने से वह अधिक संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में सेक्स या किसी मेडिकल जांच के बाद भी हल्की ब्लीडिंग हो सकती है।कुछ मामलों में संक्रमण भी ब्लीडिंग की वजह बन सकता है। शुरुआती प्रेग्नेंसी में मिसकैरेज या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जैसी गंभीर स्थितियां भी ब्लीडिंग का कारण हो सकती हैं। इसलिए इसे केवल सामान्य स्पॉटिंग मानकर छोड़ना सही नहीं है।

दूसरी तिमाही में ब्लीडिंग को न करें नजरअंदाज

प्रेग्नेंसी के दूसरे चरण में ब्लीडिंग अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है। इस दौरान अगर ब्लीडिंग होती है तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।प्लेसेंटा की स्थिति से जुड़ी कुछ समस्याएं, सर्विक्स में बदलाव या संक्रमण इसके पीछे कारण हो सकते हैं। सही वजह जानने के लिए डॉक्टर प्रेग्नेंसी के सप्ताह, ब्लीडिंग की मात्रा और दूसरे लक्षणों के आधार पर जांच की सलाह दे सकते हैं।

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आखिरी महीनों में ब्लीडिंग का क्या मतलब?

गर्भावस्था के अंतिम महीनों में हल्की ब्लीडिंग कभी-कभी डिलीवरी नजदीक आने के संकेतों के साथ भी हो सकती है। लेकिन इस समय ब्लीडिंग को सामान्य मान लेना ठीक नहीं है।प्लेसेंटा प्रिविया, प्लेसेंटल एब्रप्शन या प्रीटर्म लेबर जैसी स्थितियों में भी ब्लीडिंग हो सकती है। खासकर अगर ब्लीडिंग के साथ पेट में तेज दर्द, नियमित ऐंठन या पानी जैसा फ्लूइड निकल रहा हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

क्या प्रेग्नेंसी में पीरियड्स आ सकते हैं?

नहीं, प्रेग्नेंसी के दौरान सामान्य मासिक धर्म नहीं आता। इसलिए गर्भावस्था की पुष्टि होने के बाद होने वाली किसी भी ब्लीडिंग को पीरियड समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।ब्लीडिंग की वजह जानने के लिए डॉक्टर प्रेग्नेंसी की अवधि, ब्लीडिंग का रंग और मात्रा, दर्द तथा महिला की मेडिकल हिस्ट्री को देखते हैं। जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट या अन्य जांच की जा सकती है।

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सेक्स के बाद भी हो सकती है हल्की स्पॉटिंग

प्रेग्नेंसी के दौरान सर्विक्स ज्यादा संवेदनशील हो सकता है। ऐसे में सेक्स के बाद हल्की स्पॉटिंग देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर ब्लीडिंग बार-बार हो रही है, मात्रा बढ़ रही है या इसके साथ दर्द और ऐंठन है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कुछ विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर कुछ समय के लिए सेक्स से परहेज करने की सलाह भी दे सकते हैं।

किन लक्षणों में तुरंत अस्पताल जाएं?

प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें तो इंतजार नहीं करना चाहिए:
• बहुत ज्यादा या लगातार रक्तस्राव होना
• तेज पेट दर्द या ऐंठन
• एक तरफ तेज पेट दर्द
• चक्कर आना या बेहोशी
• कंधे में दर्द के साथ ब्लीडिंग
• कमजोरी या बहुत ज्यादा असहज महसूस होना
• पानी जैसा फ्लूइड निकलना
• बाद की प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग के साथ नियमित संकुचन
खासकर तेज दर्द, चक्कर या बेहोशी के साथ ब्लीडिंग एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जैसी आपात स्थिति का संकेत हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेना जरूरी है।

ब्लीडिंग होने पर क्या करें?

सबसे जरूरी बात यह है कि घबराने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। खुद से दवा लेना या ब्लीडिंग को लंबे समय तक नजरअंदाज करना सही नहीं है।ब्लीडिंग का कारण हर महिला में अलग हो सकता है। इसलिए केवल ब्लीडिंग देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि मिसकैरेज हुआ है या नहीं। समय पर जांच कराने से सही कारण पता लगाया जा सकता है और जरूरत के मुताबिक इलाज किया जा सकता है।

 

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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