“बाबू-सोना बस 5 मिनट और…” के चक्कर में न रोकें पेशाब, चैटिंग-कॉलिंग करते-करते रोक लेते हैं पेशाब? तो बार-बार ऐसा करना पड़ सकता है भारी
बार-बार लंबे समय तक पेशाब रोकने की आदत ब्लैडर और यूरिनरी सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। जानें UTI समेत किन परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।

Health Tips: काम के बीच, सफर में या मोबाइल पर किसी खास शख्स से बात करते समय कई लोग टॉयलेट जाने की इच्छा को टाल देते हैं। कभी-कभार ऐसा हो जाए तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती, लेकिन अगर पेशाब रोकना आपकी रोज की आदत बन गई है तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं। बार-बार लंबे समय तक पेशाब रोकने से ब्लैडर के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है और यूरिनरी सिस्टम से जुड़ी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है।
किडनी खून को फिल्टर करके शरीर के अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। पेशाब बनने के बाद उसे लंबे समय तक रोककर रखना शरीर के प्राकृतिक सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में शरीर जब टॉयलेट जाने का संकेत दे, तो उसे बार-बार नजरअंदाज करने से बचना चाहिए।
UTI का बढ़ सकता है खतरा
बार-बार पेशाब रोकने से ब्लैडर में लंबे समय तक यूरिन जमा रह सकता है। इससे बैक्टीरिया के पनपने की संभावना बढ़ सकती है और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का जोखिम बढ़ सकता है।UTI होने पर पेशाब करते समय जलन या दर्द, बार-बार यूरिन आने की इच्छा और निचले पेट में परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं।
ब्लैडर पर पड़ सकता है असर
पेशाब को लंबे समय तक रोकने की आदत से ब्लैडर जरूरत से ज्यादा खिंच सकता है। अगर कोई व्यक्ति बार-बार यूरिन की इच्छा को दबाता रहे, तो समय के साथ ब्लैडर के सामान्य तरीके से खाली होने में परेशानी हो सकती है।
इसलिए केवल व्यस्तता, मोबाइल चैट या किसी अन्य वजह से बार-बार टॉयलेट जाने को टालना अच्छी आदत नहीं है।
पेशाब करने के बाद भी लग सकता है कि ब्लैडर खाली नहीं हुआ
कुछ लोगों को बार-बार पेशाब रोकने की आदत के साथ ब्लैडर पूरी तरह खाली करने में परेशानी हो सकती है। पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस हो सकता है कि अभी यूरिन बाकी है या थोड़ी देर बाद फिर टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस हो।
अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे केवल पेशाब रोकने की आदत मानकर छोड़ना सही नहीं है। इसके पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं और जरूरत पड़ने पर मेडिकल जांच करानी चाहिए।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर पेशाब से जुड़ी कोई समस्या लगातार बनी हुई है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। खास तौर पर इन लक्षणों पर ध्यान दें—
• पेशाब में खून दिखाई देना
• पेशाब करते समय तेज दर्द या जलन
• बार-बार यूरिन आने की समस्या
• बुखार के साथ पेशाब संबंधी परेशानी
• पेशाब शुरू करने में दिक्कत
• ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का एहसास
• पेशाब बिल्कुल न आना
• कमर या पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द
इनमें से कोई लक्षण अचानक या गंभीर रूप से सामने आए तो मेडिकल मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
टॉयलेट की इच्छा को बार-बार न टालें
पेशाब की इच्छा होने पर लंबे समय तक रोकने के बजाय समय पर टॉयलेट जाना बेहतर है। साथ ही शरीर में पानी की कमी न होने दें और अपनी प्यास व जरूरत के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहें।
हालांकि, हर व्यक्ति के लिए पानी की जरूरत एक जैसी नहीं होती। उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि, खान-पान और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार तरल पदार्थ की जरूरत बदल सकती है। किडनी या हृदय से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को पानी या अन्य तरल पदार्थों की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
जरूरी बात: कभी-कभार मजबूरी में पेशाब रोकना और रोजाना लंबे समय तक पेशाब रोकने की आदत एक जैसी बात नहीं है। परेशानी तब ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है जब यह आदत नियमित हो या इसके साथ दर्द, जलन, खून, बुखार अथवा पेशाब करने में कठिनाई जैसे लक्षण भी दिखाई दें।












