घूसखोर दारोगा गिरफ्तार : 50000 रुपये घूस लेते दारोगा रंगे हाथों गिरफ्तार, एक केस में मदद के नाम पर ले रहे थे रिश्वत, चल रही है पूछताछ

Daroga Arrest । एक और घूसखोर दारोगा जांच टीम के हत्थे चढ़ गये। आरोप है कि एक केस के मामले में दारोगा 50 हजार रुपये की रिश्वत ले रहे थे। बिहार के बक्सर जिले में निगरानी विभाग की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ब्रह्मपुर थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर नीरज कुमार को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।
आरोप है कि दरोगा एक मामले में मदद और पैरवी करने के नाम पर परिवादी से रिश्वत की मांग कर रहा था। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग की टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की।इस कार्रवाई का नेतृत्व निगरानी विभाग के डीएसपी विनोद कुमार सिंह ने किया। नौ सदस्यीय टीम ने निर्धारित योजना के तहत दरोगा को रिश्वत लेते हुए पकड़ा। गिरफ्तारी की पुष्टि डुमरांव के एसडीपीओ भास्कर रंजन ने भी की है।
केस में मदद के नाम पर मांगी जा रही थी रिश्वत
मिली जानकारी के अनुसार, ब्रह्मपुर थाने में दर्ज एक मामले में मदद और पैरवी करने के नाम पर सब-इंस्पेक्टर नीरज कुमार द्वारा 50 हजार रुपये की मांग किए जाने का आरोप है। रिश्वत की कथित मांग से परेशान होकर परिवादी अमरनाथ यादव ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी।शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले की जांच की और कार्रवाई के लिए टीम गठित की। इसके बाद निगरानी विभाग के अधिकारियों ने जाल बिछाया और दरोगा को कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
निगरानी विभाग ने दर्ज किया था मामला
निगरानी विभाग के सीनियर डीएसपी विनोद कुमार सिंह के अनुसार, यह मामला ब्रह्मपुर थाना कांड संख्या 238/26 के परिवादी अमरनाथ यादव से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि सब-इंस्पेक्टर नीरज कुमार पर मदद करने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप था।शिकायत के आधार पर निगरानी विभाग में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद वरीय अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए नीरज कुमार को 50 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में हलचल
थाने में तैनात दरोगा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई को सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।फिलहाल, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहने की जानकारी दी गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।












