झारखंड में पुलिस Vs वकील!झारखंड हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने की रांची SSP, DSP समेत 3 पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
Jharkhand High Court Advocates Association demands action against Ranchi SSP and three other police officers

रांची/23.2.26: झारखंड की राजधानी में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। झारखंड हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राकेश रंजन, हटिया डीएसपी प्रमोद कुमार मिश्रा और डोरंडा थाना प्रभारी दीपिका प्रसाद के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
एसोसिएशन का आरोप है कि इन अधिकारियों ने न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद वाहन रिलीज करने से इनकार कर ‘न्यायिक अवमानना’ की है।
क्या है पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 17 फरवरी 2026 को हुई, जब वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज टंडन अपने कार्यालय से हाई कोर्ट जा रहे थे।
- दुर्घटना और रील का चक्कर: राजेंद्र चौक के पास एक युवक, मवाज खान ने लापरवाही से बाइक चलाते हुए अधिवक्ता की कार को टक्कर मार दी।
- उकसावे का आरोप: एसोसिएशन का दावा है कि वहां मौजूद कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और सोशल मीडिया ‘रील’ बनाने के मकसद से जानबूझकर विवाद को हवा दी।
- दर्ज हुई FIR: इस मामले में डोरंडा थाना में कांड संख्या 51/2026 और 52/2026 दर्ज की गई।
हाई कोर्ट और निचली अदालत का रुख
अधिवक्ता द्वारा रिट याचिका दाखिल करने के बाद कानूनी प्रक्रिया तेज हुई:
- 19 फरवरी: हाई कोर्ट ने दोनों FIR पर रोक लगा दी।
- 21 फरवरी: न्यायिक दंडाधिकारी (JM-XIII), रांची ने BNSS की धारा 497 के तहत वाहन रिलीज करने का आदेश दिया।
पुलिस पर ‘दुर्भावनापूर्ण’ रवैये का आरोप
एसोसिएशन का कहना है कि रिलीज ऑर्डर मिलने के बावजूद डोरंडा थाना प्रभारी ने गाड़ी सौंपने से मना कर दिया। मामले की शिकायत SSP और डीएसपी से की गई, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। पत्र में इसे “जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से न्यायिक आदेश की अवहेलना” करार दिया गया है।
संवेदनशील इलाके का हवाला और आंदोलन की चेतावनी
एडवोकेट एसोसिएशन ने मुख्य सचिव को राजेंद्र चौक के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि यह एक बेहद संवेदनशील इलाका है, जहाँ पूर्व में DSP यूसी झा की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। ऐसे में पुलिस का यह ढुलमुल रवैया कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है।
एसोसिएशन का अल्टीमेटम:
“यदि तत्काल प्रभाव से अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई और वाहन रिलीज नहीं किया गया, तो राज्यभर के अधिवक्ता सड़क पर उतरकर लोकतांत्रिक आंदोलन करेंगे। साथ ही इस मामले को दोबारा हाई कोर्ट के संज्ञान में लाया जाएगा।”
पत्र में कहा कि…
एसोसिएशन द्वारा लिखे पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि राजेंद्र चौक संवेदनशील इलाका रहा है, जहां पूर्व में डीएसपी यूसी झा की भीड़ द्वारा हत्या की घटना हो चुकी है. ऐसे में पुलिस अधिकारियों का रवैया कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया गया है. एडवोकेट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई कर वाहन रिलीज नहीं किया गया, तो राज्यभर के अधिवक्ता लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से आंदोलन करने को मजबूर होंगे.









