झारखंड: अनुबंधित ANM ने नियमितिकरण को लेकर मोर्चा खोला, चयन प्रक्रिया पर उठाये सवाल, पूछा, इंटर पास को 20 अंक क्यों ?
Jharkhand: Contractual ANMs Launch Agitation Over Regularization; Raise Questions on Selection Process, Asking: "Why Are 20 Marks Awarded for an Intermediate Degree?"

झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले अनुबंध एएनएम कर्मियों की बैठक आयोजित हुई। बैठक में नियमितीकरण, चयन प्रक्रिया और मानदेय बढ़ाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
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देवघर। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अनुबंध एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। यह बैठक झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले संघ कार्यालय में संपन्न हुई।बैठक में बड़ी संख्या में एएनएम कर्मियों ने हिस्सा लिया और अपनी समस्याओं एवं मांगों को खुलकर रखा।
मुख्य रूप से अनुबंध पर कार्यरत एएनएम कर्मियों के नियमितीकरण का मुद्दा चर्चा के केंद्र में रहा। कर्मचारियों ने इस बात पर जोर दिया कि जो कर्मी पांच वर्ष से अधिक समय से लगातार सेवा दे रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर नियमित किया जाना चाहिए।बैठक के दौरान कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षा को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कर्मियों ने चिंता जताई कि नई चयन प्रक्रिया में कुछ ऐसे प्रावधान किए जा रहे हैं, जो पुराने और अनुभवी अनुबंध कर्मियों के हितों के खिलाफ हैं। अनुबंधित कर्मियों ने कहा कि यदि सरकार और जिला प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करते हैं, तो संघ कानूनी रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा, ताकि कर्मचारियों को न्याय मिल सके।
बैठक में एक अहम मुद्दा एएनएम के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी उठा। कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब एएनएम के पद के लिए न्यूनतम योग्यता मैट्रिक निर्धारित है, तो इंटरमीडिएट पास अभ्यर्थियों को अतिरिक्त 20 अंक देने का प्रावधान क्यों किया गया है। उनका आरोप है कि यह नियम पुराने अनुबंध कर्मियों को बाहर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
इसके अलावा, बैठक में मानदेय बढ़ाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। कर्मियों ने कहा कि कार्य मूल्यांकन के आधार पर उनके मानदेय में कम से कम 5 से 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जानी चाहिए और इसे चालू वित्तीय वर्ष में ही लागू किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान मानदेय उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। साथ ही, कर्मचारियों ने एकजुट रहकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।








