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झारखंड में विधानसभा की सीट 81 से बढ़कर हो जायेगी 108, बहुमत मिलेगा 55 पर, लोकसभा की सीटें बढ़कर हो जायेगी 816, जानिये क्यों बदल जायेगी लोकसभा-विधानसभा की सीट संख्या

Jharkhand's Assembly seats will increase from 81 to 108, with a majority of 55. Lok Sabha seats will increase to 816. Find out why the number of Lok Sabha and Assembly seats will change.

केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन का बड़ा फैसला लिया है। प्रस्ताव के तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों में वृद्धि के साथ महिला आरक्षण को और प्रभावी बनाने की तैयारी है। अगर ऐसा हुआ, तो झारखंड में भी विधानसभा की सीट बढ़ जायेगी।
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रांची/नयीदिल्ली । केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में महत्वपूर्ण संशोधन करने का फैसला लिया है। इस प्रस्तावित संशोधन के जरिए न केवल महिलाओं के प्रतिनिधित्व को और मजबूत करने की योजना है, बल्कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की कुल सीटों में भी बड़ा इजाफा किया जा सकता है। इस बदलाव का असर झारखंड-बिहार सहित सभी राज्यों में दिखेगा।

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झारखंड में बढ़ जायेगी सीट

सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों में लगभग 33 प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकती है। इस बदलाव का असर सीधे राज्यों की राजनीतिक संरचना पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, झारखंड विधानसभा की मौजूदा 81 सीटें बढ़कर 108 हो सकती हैं। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा भी बढ़कर 55 सीट हो जाएगा।इसी तरह अन्य राज्यों में भी सीटों की संख्या में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। यह बढ़ोतरी जनसंख्या के अनुपात में की जाएगी, जिसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाए जाने की बात कही जा रही है।

लोकसभा में भी बढ़ेगी संख्या

प्रस्तावित संशोधन का असर लोकसभा पर भी देखने को मिलेगा। बताया जा रहा है कि लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर 816 तक पहुंच सकती हैं। वहीं, महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी बढ़कर लगभग 273 हो जाएगी, जिससे संसद में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ जाएगी।यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे नीतिगत फैसलों में महिलाओं की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा।

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तीन चुनावों तक आरक्षण सुरक्षित रखने का प्रस्ताव

संशोधन के तहत एक और महत्वपूर्ण प्रावधान पर विचार किया जा रहा है, जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को लगातार तीन चुनावों तक सुरक्षित रखने की योजना है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि महिला प्रतिनिधित्व केवल एक बार के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्थिर रूप से बना रहे।

2029 से लागू हो सकती है नई व्यवस्था

पूरी नई व्यवस्था 2029 के आम चुनावों से लागू की जा सकती है। इसके लिए सरकार मौजूदा संसदीय सत्र में ही संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि 29 मार्च के आसपास इस बिल को संसद में लाया जा सकता है।इससे पहले केंद्र सरकार 2023 में ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कर चुकी है, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था। अब लगभग तीन साल बाद इस कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।

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सर्वदलीय सहमति बनाने की कोशिश

इस महत्वपूर्ण संशोधन को पारित कराने के लिए सरकार व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने में जुटी हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कई राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक भी की है। इनमें एनसीपी (एसपी), बीजेडी, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और वाईएसआर कांग्रेस के प्रतिनिधि शामिल रहे।हालांकि, अभी तक कांग्रेस और टीएमसी जैसे बड़े दलों के साथ बैठक नहीं हो सकी है। सरकार की कोशिश है कि इस संशोधन को बिना किसी बड़े विरोध के सर्वसम्मति से पारित कराया जाए, ताकि महिला आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक विवाद से दूर रहे।

परिसीमन आयोग के गठन की तैयारी

इस पूरे बदलाव को लागू करने के लिए परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया भी आवश्यक होगी। सूत्रों के अनुसार, इसी वर्ष जून तक परिसीमन आयोग के गठन की संभावना है। यह आयोग 2011 की जनगणना के आधार पर नई सीटों का निर्धारण करेगा।परिसीमन के दौरान राज्यों के बीच सीटों का संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश की जाएगी। दक्षिण भारत के कई राज्यों ने पहले यह चिंता जताई थी कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का निर्धारण होने से उत्तर भारत के राज्यों को अधिक लाभ मिल सकता है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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