झारखंड: कर्मचारी की मौत पहले, नियम बाद में बदला… फिर भी बहन को मिलेगी नौकरी, झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
झारखंड हाईकोर्ट ने सीसीएल कर्मी की अविवाहित बहन को अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया। कर्मचारी की मौत 2023 में हुई, जबकि अविवाहित बहन को आश्रित मानने का नियम 2024 में बदला था।

रांची। अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने भाई के स्थान पर बहन को नौकरी देने का आदेश दिया है। दरअसल कर्मचारी की मौत हो चुकी थी, उस समय अविवाहित बहन को आश्रित मानकर नौकरी देने का प्रावधान भी नहीं था। फिर नियम बदला और अविवाहित बहन को आश्रितों की सूची में शामिल कर दिया गया। सवाल उठा—क्या अब उस दिवंगत कर्मचारी की बहन को अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है?
यही सवाल झारखंड हाईकोर्ट के सामने पहुंचा। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले में सीसीएल को दिवंगत कोयला कर्मी की अविवाहित बहन को अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सीसीएल के नियुक्ति से इनकार करने वाले आदेशों को रद्द करते हुए छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया।
कहानी में आया था ट्विस्ट, मौत 2023 में और नियम बदला 2024 में
मामला सीसीएल कर्मी अंशु उरांव की मृत्यु से जुड़ा है। अंशु उरांव की सेवा के दौरान 3 अगस्त 2023 को मृत्यु हो गई थी।इसके बाद उनकी मां अनिता देवी ने 20 दिसंबर 2023 को अपनी बेटी स्मृति कुमारी के लिए अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन किया। यह आवेदन उस समय लागू एनसीडब्ल्यूए-XI के क्लाज 9.3.0 के तहत किया गया था।लेकिन सीसीएल ने आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उस समय अविवाहित बहन को आश्रित की श्रेणी में शामिल करने का प्रावधान नहीं था। यहीं से मामला आगे बढ़ा।
11 जून 2024 को बदला नियम
मामले में अहम मोड़ 11 जून 2024 को आया। जेबीसीसीआइ की स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी ने आश्रित की परिभाषा में संशोधन किया और अविवाहित बहन को भी आश्रित की श्रेणी में शामिल कर दिया।संशोधन के बाद स्मृति कुमारी की ओर से 18 जून 2024 को दोबारा आवेदन किया गया।लेकिन इस बार भी सीसीएल ने नियुक्ति से इनकार कर दिया।
सीसीएल ने कहा- कर्मचारी की मौत तो पहले ही हो चुकी थी
सीसीएल की ओर से दूसरे आवेदन को भी इस आधार पर खारिज किया गया कि अंशु उरांव की मृत्यु 3 अगस्त 2023 को हुई थी, जबकि अविवाहित बहन को आश्रित की श्रेणी में शामिल करने वाला संशोधन 11 जून 2024 को हुआ।यानी जिस दिन कर्मचारी की मृत्यु हुई, उस दिन बहन को आश्रित मानकर अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान लागू नहीं था।सीसीएल के इस फैसले को अपीलीय स्तर पर भी बरकरार रखा गया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट ने यहीं बदला पूरे मामले का रुख
हाईकोर्ट ने मामले में संशोधित प्रावधान और आवेदन की समयसीमा को अहम माना।अदालत ने कहा कि 11 जून 2024 को किया गया संशोधन उसी तारीख से एनसीडब्ल्यूए-XI का हिस्सा बन गया। ऐसे में यदि अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन निर्धारित 18 माह की अवधि के भीतर किया गया है और आवेदन के समय संशोधित प्रावधान प्रभावी हो चुका था, तो उस आवेदन पर नए प्रावधान के तहत विचार किया जाना चाहिए।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता कि कर्मचारी की मृत्यु संशोधन लागू होने से पहले हुई थी।
CCL के तीन आदेश रद्द
स्मृति कुमारी और उनकी मां अनिता देवी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीसीएल के 22 मई 2024, 22 अगस्त 2024 और 19 मार्च 2025 के आदेशों को रद्द कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने सीसीएल को निर्देश दिया कि स्मृति कुमारी को छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।
इस फैसले में असली बात क्या है?
इस मामले में हाईकोर्ट के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं था कि कर्मचारी की मृत्यु कब हुई। अहम सवाल यह था कि जब अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन किया गया और उस समय तक नियम में बदलाव प्रभावी हो चुका था, तो क्या पुराने नियम के आधार पर आवेदन को खारिज किया जा सकता है?
अदालत ने इस मामले में संशोधित प्रावधान को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति का रास्ता साफ किया।यानी इस मामले की पूरी कहानी “मौत पहले, नियम बाद में” से शुरू हुई और आखिरकार हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिवंगत कर्मचारी की अविवाहित बहन के लिए नौकरी का रास्ता खुल गया।












