Diwali 2026: Diwali 2026: दिवाली की रात घर के दरवाजे पर क्यों बनाए जाते हैं ये 2 खास निशान? मां लक्ष्मी से जुड़ा है रहस्यमयी राज!
दिवाली 2026 पर घर के मुख्य द्वार पर रंगोली और स्वस्तिक बनाने की परंपरा क्यों है? जानें मां लक्ष्मी के स्वागत और इन शुभ चिह्नों का धार्मिक महत्व।

Diwali 2026: रोशनी और खुशियों का पावन त्योहार दिवाली इस साल 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। दीपावली के दिन घरों को दीपों, फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाने की परंपरा है। इस दिन लोग अपने घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाते हैं और स्वस्तिक का चिह्न भी बनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली पर रंगोली और स्वस्तिक बनाने की परंपरा के पीछे केवल सजावट नहीं, बल्कि गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी जुड़ा है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने से मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीकात्मक भाव प्रकट होता है, जबकि स्वस्तिक को शुभता, सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं दिवाली पर इन शुभ चिह्नों को बनाने का महत्व।
रंगोली बनाने से जुड़ी है मां लक्ष्मी के स्वागत की परंपरा
रंगोली शब्द संस्कृत के ‘रंगावली’ शब्द से जुड़ा है, जिसका अर्थ रंगों की पंक्ति होता है। भारतीय परंपरा में रंगोली को शुभ अवसरों पर घर-आंगन सजाने का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। दिवाली के दिन लोग मुख्य द्वार और आंगन में अलग-अलग रंगों से सुंदर आकृतियां बनाते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी स्वच्छ और सुंदर स्थानों पर निवास करती हैं। ऐसे में घर की साफ-सफाई करने और प्रवेश द्वार पर रंगोली सजाने को मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी माना जाता है। मान्यता के अनुसार, रंगोली से सजा घर सकारात्मकता और खुशहाली का प्रतीक होता है।
मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाने का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म में स्वस्तिक को अत्यंत शुभ और मंगलकारी चिह्न माना गया है। इसे सुख, शांति, समृद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। दिवाली पर घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और तिजोरी के पास स्वस्तिक बनाने की परंपरा है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वस्तिक बनाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता दूर रहती है। इसके चारों ओर बनी भुजाओं को जीवन के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से भी जोड़कर देखा जाता है।
दिवाली पर रंगोली और स्वस्तिक बनाने का सही स्थान
• मुख्य द्वार: घर के प्रवेश द्वार पर रंगोली और स्वस्तिक बनाना शुभ माना जाता है।
• पूजा स्थल: मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के स्थान पर स्वस्तिक बनाया जाता है।
• आंगन: रंग-बिरंगी रंगोली से आंगन सजाने की परंपरा है।
• तिजोरी और धन रखने का स्थान: धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां स्वस्तिक बनाना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
दिवाली पर क्यों जरूरी मानी जाती है घर की साफ-सफाई?
दिवाली से पहले घर की साफ-सफाई करने की परंपरा भी मां लक्ष्मी के स्वागत से जुड़ी है। मान्यता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यही वजह है कि लोग दिवाली से पहले घर के कोने-कोने की सफाई करते हैं, दीप जलाते हैं और फूलों से सजावट करते हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार, दिवाली पर रंगोली, दीप और स्वस्तिक केवल सजावट के साधन नहीं हैं, बल्कि ये शुभता, प्रकाश, सकारात्मकता और समृद्धि के प्रतीक हैं। यही परंपराएं दीपावली के त्योहार को खास बनाती हैं।












