close
LIVE UPDATE

चेहरे पर दिख रहे हैं ये 5 बदलाव तो हो जाएं सावधान! आप फंस रहे हैं जानलेवा बीमारी की चाल में? नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

चेहरे पर पीलापन, आंखों के नीचे सूजन, लाल नसें या लगातार खुजली को न करें नजरअंदाज। जानें फैटी लिवर के 5 संकेत, गंभीर लक्षण और बचाव के उपाय।

Health Desk। शरीर की बनावट कुछ ऐसी है कि हर खतरे का संकेत देने लगती है। आपका शरीर किसी जानलेवा बीमारी के चंगुल में फंसता तो नहीं जा रहा, इसका संकेत भी शरीर में अचानक आये बदलाव से मिल जाता है। क्या आपके चेहरे पर अचानक पीलापन दिखने लगा है? आंखों के नीचे सूजन रहती है या त्वचा की चमक धीरे-धीरे गायब हो रही है? अगर आप इन बदलावों को सामान्य थकान, नींद की कमी या स्किन प्रॉब्लम समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए।

कुछ मामलों में चेहरे और आंखों में दिखने वाले ऐसे बदलाव लिवर की गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। खास बात यह है कि लिवर की कई बीमारियां शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखातीं और समस्या बढ़ने पर ही मरीज को इसका पता चलता है।फैटी लिवर आज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

इसमें लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। शुरुआती अवस्था में इसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन बीमारी बढ़ने पर कुछ लोगों में त्वचा और आंखों से जुड़े बदलाव नजर आ सकते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि चेहरे पर दिखने वाला हर बदलाव फैटी लिवर का संकेत नहीं होता। फिर भी कुछ लक्षण ऐसे हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

चेहरे पर दिखें ये 5 बदलाव तो रहें सतर्क

1. आंखों और चेहरे पर पीलापन, कहीं लिवर की परेशानी तो नहीं?
अगर आपकी आंखों की सफेदी पीली पड़ने लगी है या त्वचा में असामान्य पीलापन दिखाई दे रहा है, तो इसे हल्के में न लें। यह पीलिया का संकेत हो सकता है। ऐसा तब होता है, जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ का स्तर बढ़ जाता है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

लिवर की बीमारी के अलावा पित्त की नलियों में रुकावट और खून से जुड़ी कुछ समस्याएं भी इसका कारण हो सकती हैं। इसलिए आंखों में पीलापन दिखाई देने पर जल्द डॉक्टर से जांच कराएं। खासकर यदि इसके साथ पेशाब का रंग गहरा हो, मल का रंग हल्का पड़े या पेट में दर्द हो, तो चिकित्सा जांच में देरी न करें।

2. आंखों के नीचे या चेहरे पर लगातार सूजन

सुबह उठने पर आंखों के नीचे हल्की सूजन होना कई बार नींद की कमी, एलर्जी या शरीर में तरल पदार्थ के अस्थायी बदलावों से जुड़ा हो सकता है। लेकिन अगर चेहरे पर सूजन लगातार बनी रहती है या पेट और पैरों में भी सूजन आने लगती है, तो इसकी वजह की जांच जरूरी है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

लिवर की गंभीर बीमारी में शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है। हालांकि, चेहरे की सूजन अकेले फैटी लिवर की पहचान नहीं है। किडनी, हृदय और थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं।
कब सतर्क हों? यदि सूजन लगातार बनी रहे, तेजी से बढ़े या पेट में असामान्य फूलापन भी दिखाई दे, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

3. अचानक बढ़ने लगें पिंपल्स और मुंहासे

अगर आपके चेहरे पर अचानक मुंहासे बढ़ने लगे हैं, तो जरूरी नहीं कि इसका कारण लिवर ही हो। हार्मोनल बदलाव, तनाव, कुछ दवाएं, त्वचा की देखभाल से जुड़े उत्पाद और खानपान भी मुंहासों की वजह बन सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल पिंपल्स या तैलीय त्वचा के आधार पर फैटी लिवर का पता नहीं लगाया जा सकता। इसलिए इंटरनेट पर दिखाई देने वाले हर लक्षण को लिवर की बीमारी से जोड़कर घबराने के बजाय त्वचा की समस्या लगातार बनी रहने पर डॉक्टर से सलाह लें।

यदि मुंहासों के साथ आंखों में पीलापन, पेट में सूजन या अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई दें, तो चिकित्सकीय जांच कराना उचित होगा।

4. चेहरे पर लाल नसें या मकड़ी के जाले जैसी आकृतियां

क्या आपके चेहरे, गर्दन या छाती पर छोटी-छोटी लाल नसें दिखाई देने लगी हैं? कुछ मामलों में ये नसें मकड़ी के जाले जैसी आकृति बनाती हैं। इन्हें स्पाइडर एंजियोमा कहा जाता है।

ऐसी नसें स्वस्थ लोगों में भी दिखाई दे सकती हैं, लेकिन इनकी संख्या बढ़ना या इनके साथ लिवर से जुड़े अन्य लक्षण होना चिकित्सकीय जांच की वजह हो सकता है। ये कभी-कभी गंभीर और लंबे समय से चली आ रही लिवर बीमारी में भी दिखाई देती हैं।

चेहरे पर सामान्य लालिमा या रोजेशिया को सीधे फैटी लिवर का संकेत नहीं माना जा सकता। यदि त्वचा में बदलाव लगातार बढ़ रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराएं।

5. त्वचा में खुजली, रूखापन या असामान्य बदलाव

त्वचा पर लगातार खुजली होना, रूखापन या रंग में बदलाव कई कारणों से हो सकता है। लेकिन बिना स्पष्ट वजह के पूरे शरीर में खुजली होना, खासकर यदि इसके साथ पीलिया या गहरे रंग का पेशाब भी हो, तो लिवर या पित्त संबंधी समस्या की जांच जरूरी हो सकती है।
लिवर और पित्त की नलियों से जुड़ी कुछ बीमारियों में पित्त के घटकों के जमा होने से खुजली हो सकती है। वहीं, त्वचा का रूखापन सामान्यतः कई अन्य कारणों से भी होता है।
इसलिए केवल त्वचा की चमक कम होने या रूखेपन को फैटी लिवर का पक्का संकेत न समझें। लगातार बने रहने वाले बदलावों की सही वजह जानना ज्यादा जरूरी है।

फैटी लिवर को क्यों कहा जाता है साइलेंट बीमारी?

फैटी लिवर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। कई लोगों को इसका पता नियमित स्वास्थ्य जांच या अल्ट्रासाउंड के दौरान चलता है।

यदि लिवर में जमा वसा के साथ सूजन और कोशिकाओं को नुकसान होने लगे, तो कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। लंबे समय तक नुकसान जारी रहने पर फाइब्रोसिस, सिरोसिस और लिवर फेल्योर जैसी जटिलताएं विकसित हो सकती हैं।

यही वजह है कि केवल चेहरे के बदलावों पर निर्भर रहने के बजाय जोखिम वाले लोगों के लिए समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण है।

फैटी लिवर का खतरा किन लोगों को ज्यादा?

कुछ स्थितियां फैटी लिवर का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इनमें शामिल हैं:
• मोटापा, खासकर पेट के आसपास ज्यादा चर्बी होना।
• टाइप-2 डायबिटीज या ब्लड शुगर का बढ़ा रहना।
• कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का असामान्य स्तर।
• शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खानपान।
• शराब का सेवन, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
इनमें से कोई जोखिम मौजूद होने का मतलब यह नहीं है कि आपको फैटी लिवर है। सही स्थिति जानने के लिए डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और जरूरत के अनुसार रक्त जांच या इमेजिंग की सलाह दे सकते हैं।

क्या शुरुआती फैटी लिवर को ठीक किया जा सकता है?

राहत की बात यह है कि शुरुआती फैटी लिवर में जीवनशैली में बदलाव से लिवर में जमा वसा कम हो सकती है और उसकी सेहत में सुधार आ सकता है। इसके लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।
• वजन नियंत्रित रखें: यदि वजन ज्यादा है, तो डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे वजन कम करें। कई लोगों में शरीर के वजन का 5 से 10 प्रतिशत कम करना लाभकारी हो सकता है, हालांकि जरूरी सुधार बीमारी की अवस्था पर निर्भर करता है।
• संतुलित भोजन करें: सब्जियां, फल, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को आहार में शामिल करें। मीठे पेय, ज्यादा चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
• नियमित व्यायाम करें: अपनी क्षमता के अनुसार नियमित पैदल चलें और शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं।
• शराब से बचें: लिवर की बीमारी होने पर शराब से दूरी रखें और डॉक्टर से उचित सलाह लें।
• समय पर जांच कराएं: यदि आपको डायबिटीज, मोटापा या अन्य जोखिम कारक हैं, तो डॉक्टर से लिवर की जांच की जरूरत के बारे में चर्चा करें।
बिना चिकित्सकीय सलाह के लिवर को साफ करने वाले उत्पादों, हर्बल सप्लीमेंट या तथाकथित डिटॉक्स उपचारों पर भरोसा न करें। कुछ उत्पाद लिवर को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

इन लक्षणों में बिल्कुल न करें देरी

यदि आंखों में नया पीलापन दिखाई दे, तो जल्द चिकित्सकीय जांच कराएं। वहीं, पीलिया के साथ तेज पेट दर्द, बुखार, लगातार उल्टी, अत्यधिक सुस्ती या भ्रम की स्थिति हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

सबसे जरूरी बात: चेहरे पर पीलापन, सूजन, लाल नसें या खुजली लिवर की बीमारी के संकेत हो सकते हैं, लेकिन इनसे अकेले फैटी लिवर की पुष्टि नहीं होती। असली खतरा लक्षणों को देखकर खुद बीमारी तय करना या उन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज करना है। समय पर डॉक्टर से जांच कराना ही गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने की दिशा में सही कदम है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *