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Diwali 2026 में पटाखे सिर्फ दो घंटे: दिवाली-छठ पर पटाखे चलाने की आजादी पर टाइम लिमिट! झारखंड में कड़े नियम से बदलेगा त्योहार का रंग, जानिये गाइडलाइन

Jharkhand Diwali Guidelines 2026: झारखंड में दिवाली पर रात 8 से 10 बजे तक पटाखे चलाने की अनुमति। छठ, गुरु पर्व, क्रिसमस और नववर्ष की टाइमिंग व नियम जानें।

Jharkhand Diwali Guidelines: रंग-रोशनी का त्योहार दिवाली आने वाली है। दिवाली का इंतजार सालों भर बच्चे-युवा करते हैं। वजह है दिवाली पर होने वाली आतिशबाजी, कोई मुहूर्त व परंपरा के लिए आतिशबाजी करता है तो कोई मनोरंजन के लिए पटाखे छोड़ता है। लेकिन इस बार पटाखे की मनमर्जी पर नियमों का ब्रेक लगने वाला है। आपको बता दें कि अगले महीने यानि नवंबर के दूसरे सप्ताह में दिवाली आने वाली है।

अभी से ही घरों में दीये, मिठाइयों और आतिशबाजी की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर कोई दिवाली की रात पटाखे फोड़कर त्योहार मनाना चाहता है। कोई इसे परंपरा से जोड़ता है, तो किसी के लिए आतिशबाजी खुशियों का इजहार है। लेकिन इस बार झारखंड में पटाखे चलाने वालों को घड़ी देखकर उत्सव मनाना होगा। राज्य में दिवाली से लेकर छठ, गुरु पर्व, क्रिसमस और नववर्ष तक पटाखे चलाने के लिए समय-सीमा तय की गई है।

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झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के आदेश के मुताबिक, दिवाली पर रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे चलाने की अनुमति होगी। यानी आतिशबाजी के लिए सिर्फ दो घंटे का समय मिलेगा। निर्धारित समय के बाहर पटाखे चलाने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

दिवाली की रात सिर्फ दो घंटे होगी आतिशबाजी, छठ पर भी तय समय

त्योहारों के दौरान बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने अलग-अलग पर्वों के लिए समय निर्धारित किया है। आदेश के अनुसार, दिवाली और गुरु पर्व पर रात 8 बजे से 10 बजे तक पटाखे चलाए जा सकेंगे। वहीं, छठ पर्व पर सुबह 6 बजे से 8 बजे तक ही आतिशबाजी की अनुमति होगी।क्रिसमस और नववर्ष के अवसर पर रात 11 बजकर 55 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक पटाखे चलाने की अनुमति दी गई है।

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पटाखे खरीदने से पहले जान लें ये नियम

झारखंड में अब पटाखों की बिक्री को लेकर भी वायु गुणवत्ता के मानकों का पालन करना होगा। शहरी क्षेत्रों में उन्हीं स्थानों पर पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अच्छी या संतोषजनक श्रेणी में है।
• अच्छी वायु गुणवत्ता: AQI 1 से 50 तक।
• संतोषजनक वायु गुणवत्ता: AQI 51 से 100 तक।
• ध्वनि सीमा: राज्य के शहरी क्षेत्रों में केवल उन्हीं पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी, जिनकी ध्वनि सीमा 125 डेसिबल (A) से कम होगी।
इन नियमों का उद्देश्य त्योहारों की खुशियों के साथ पर्यावरण और लोगों की सेहत का भी ध्यान रखना है।

नियम तोड़े तो हो सकती है कानूनी कार्रवाई

प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने साफ किया है कि निर्धारित समय-सीमा और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।पर्षद ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के अनुपालन में यह आदेश जारी किया है। आदेश पर पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी के हस्ताक्षर हैं।

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खुशियों के त्योहार में प्रदूषण पर भी नजर

दिवाली पर दीये जलाना, मां लक्ष्मी की पूजा करना और परिवार के साथ खुशियां बांटना सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। आतिशबाजी भी कई लोगों के लिए उत्सव का अहम हिस्सा है। हालांकि, पटाखों से निकलने वाला धुआं और तेज आवाज बच्चों, बुजुर्गों तथा सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को प्रभावित कर सकती है।

ऐसे में झारखंड में तय की गई समय-सीमा के तहत ही आतिशबाजी करनी होगी। त्योहार मनाने के साथ नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा, ताकि खुशियों के बीच प्रदूषण और शोर की समस्या को कम किया जा सके।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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