JSSC CGL Paper Leak: नौकरी मिलने के बाद भी नहीं बच पाए भानु प्रताप और सुमित! 10-12 अभ्यर्थियों को नकल कराकर पास कराने का आरोप, CID ने क्यों की गिरफ्तारी?
JSSC CGL पेपर लीक मामले में CID ने भानु प्रताप और सुमित कुमार सिंह को गिरफ्तार किया। 10-12 अभ्यर्थियों को नकल कराकर पास कराने का आरोप, जानिए गिरफ्तारी की पूरी वजह।

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा पेपर लीक मामले में सीआईडी की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इस बार जांच एजेंसी के निशाने पर ऐसे दो आरोपी आए हैं, जिनका संबंध न केवल परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी के संचालक से है, बल्कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी के जरिए नौकरी हासिल करने के आरोप भी सामने आए हैं। सीआईडी ने शुक्रवार को भानु प्रताप और सुमित कुमार सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इस गिरफ्तारी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भानु प्रताप खुद JSSC CGL परीक्षा में सफल हुआ था और वर्तमान में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (ASO) के पद पर काम कर रहा था। सीआईडी की जांच में आरोप है कि उसने खुद परीक्षा पास करने के साथ-साथ दूसरे अभ्यर्थियों को भी नकल कराकर सफल कराया। जांच एजेंसी के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने करीब 10 से 12 अभ्यर्थियों को नकल कराने में भूमिका निभाई थी।
आखिर क्यों हुई भानु प्रताप और सुमित की गिरफ्तारी?
सीआईडी की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स ICN टेक्नोलॉजी के संचालक मिथिलेश सिंह के रिश्तेदार हैं। मिथिलेश सिंह फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
सीआईडी को जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर भानु प्रताप और सुमित कुमार सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि दोनों ने परीक्षा में नकल कराने और अभ्यर्थियों को सफल बनाने के लिए नेटवर्क के माध्यम से काम किया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए 10 से 12 अभ्यर्थियों को परीक्षा में नकल कराकर पास कराया गया। भानु प्रताप का मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि वह खुद इसी परीक्षा में सफल होकर सरकारी पद पर नियुक्त हो चुका था।
नौकरी हासिल कर चुका था भानु प्रताप, अब CID की गिरफ्त में
गिरफ्तार आरोपियों में भानु प्रताप रांची के बरियातू थाना क्षेत्र स्थित रविंद्र नगर का निवासी है। वह JSSC CGL परीक्षा में सफल होने के बाद उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था।सीआईडी की जांच में आरोप है कि भानु प्रताप ने परीक्षा में अनुचित तरीके अपनाकर सफलता हासिल की और दूसरे अभ्यर्थियों को भी नकल कराने में मदद की।
वहीं दूसरा आरोपी सुमित कुमार सिंह रांची के हटिया स्थित टोंको रोड, केशव विहार सिंह मेंशन का निवासी है। वह किराना और फोटोकॉपी की दुकान चलाता था। दोनों को इस मामले में अप्राथमिकी आरोपित बनाया गया था।
परीक्षा कराने वाली एजेंसी के संचालक के रिश्तेदारों तक पहुंची जांच
इस पूरे मामले में ICN टेक्नोलॉजी के संचालक मिथिलेश सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सीआईडी के मुताबिक, गिरफ्तार भानु प्रताप और सुमित कुमार सिंह दोनों मिथिलेश सिंह के रिश्तेदार हैं।
इससे पहले भी सीआईडी मिथिलेश सिंह के एक अन्य रिश्तेदार रितेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। रितेश मूल रूप से बिहार के भोजपुर का रहने वाला था और वर्तमान में बोकारो के दुग्धा में रह रहा था।अब एक ही परिवार और परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी की पड़ताल इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
करोड़ों में बिकती थीं सीटें, पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं दो दर्जन से ज्यादा आरोपी
JSSC CGL पेपर लीक प्रकरण की जांच में पहले भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो चुके हैं। सीआईडी अब तक दो दर्जन से अधिक एजेंटों और दलालों को गिरफ्तार कर चुकी है। इन पर प्रश्नपत्र लीक करने, अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर रटवाने और परीक्षा केंद्रों पर नकल कराने जैसे आरोप हैं।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि परीक्षा में सफल कराने के नाम पर करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ और अयोग्य अभ्यर्थियों को भी सफलता दिलाई गई।मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल कर चुके कुछ अभ्यर्थी भी फिलहाल रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद हैं।
अब जांच के घेरे में कौन-कौन?
भानु प्रताप और सुमित कुमार सिंह की गिरफ्तारी ने एक बार फिर JSSC CGL परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि जांच अब केवल पेपर लीक करने वाले एजेंटों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अभ्यर्थियों तक भी पहुंच रही है, जिन्होंने कथित तौर पर नकल के जरिए परीक्षा पास कर नौकरी हासिल की।
अब सीआईडी के सामने इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों की पहचान करने और कथित तौर पर अनुचित तरीके से सफल हुए अन्य अभ्यर्थियों की भूमिका स्पष्ट करने की चुनौती है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी के जरिए नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान जांच में सामने आ रही है, तो क्या आने वाले दिनों में सरकारी पदों पर कार्यरत और भी अभ्यर्थियों पर कार्रवाई होगी? JSSC CGL पेपर लीक मामले में सीआईडी की आगे की जांच से इस पूरे नेटवर्क के कई और राज खुलने की संभावना है।












