डीएवी गुआ में CBSE की दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ, 54 शिक्षक-शिक्षिकाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण

गुआ (पश्चिमी सिंहभूम)। डीएवी सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल, गुआ में शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की दो दिवसीय शिक्षक संवर्धन कार्यशाला (CBP) का भव्य शुभारंभ हुआ। ‘विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण’ (School Health and Wellness) विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में डीएवी गुआ, डीएवी नोवामुंडी और डीएवी चिड़िया के लगभग 54 शिक्षक-शिक्षिकाएं हिस्सा ले रहे हैं। कार्यशाला का आयोजन 30 और 31 अक्टूबर को किया जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में SAIL-बीएसएल, गुआ के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) चन्द्रभूषण कुमार उपस्थित रहे। समारोह की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और डीएवी गान के साथ हुई। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागतगान और आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि चन्द्रभूषण कुमार ने शिक्षकों को बताया राष्ट्र का भविष्य निर्माता
विद्यालय के प्राचार्य प्रवीण कुमार ने मुख्य अतिथि चन्द्रभूषण कुमार को पुष्पगुच्छ भेंट कर और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यशाला के संसाधक प्रशांत तिवारी, प्राचार्य, मधुसूदन महतो हाई स्कूल, चक्रधरपुर और संसाधिका सुमित्रा कुमारी, टीजीटी, एस. जे. डीएवी पब्लिक स्कूल, चाईबासा का भी सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। डीएवी पब्लिक स्कूल, चिड़िया के प्राचार्य देवेंद्र कुमार पाणिनि का भी अभिनंदन किया गया।

स्वागत भाषण में प्राचार्य प्रवीण कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक कल्याण पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यशाला से शिक्षकों को मिलने वाला ज्ञान और अनुभव विद्यालयों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक एवं सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक होगा।
मुख्य अतिथि चन्द्रभूषण कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक ऐसा व्यक्तित्व है, जो जीवनभर सीखने की प्रक्रिया से जुड़ा रहता है। एक आदर्श शिक्षक स्वयं निरंतर सीखता है, अपने ज्ञान और कौशल को विकसित करता है तथा उसी के माध्यम से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल वर्तमान पीढ़ी को शिक्षित नहीं करता, बल्कि राष्ट्र और समाज के उज्ज्वल भविष्य का निर्माता भी होता है। शिक्षकों के ज्ञान और शिक्षण कौशल को समृद्ध करने में इस तरह की प्रशिक्षण कार्यशालाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं और प्राचार्य प्रवीण कुमार के नेतृत्व एवं शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की।
विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण पर दिया गया प्रशिक्षण
कार्यशाला के प्रथम दिन संसाधक प्रशांत तिवारी और संसाधिका सुमित्रा कुमारी ने शिक्षकों को विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान मुख्य रूप से इन विषयों पर चर्चा हुई:
• विद्यार्थियों का शारीरिक स्वास्थ्य।
• मानसिक और भावनात्मक कल्याण।
• संतुलित पोषण और व्यक्तिगत स्वच्छता।
• किशोरावस्था से जुड़ी समस्याएं।
• स्वस्थ जीवनशैली और स्वास्थ्य जागरूकता।
प्रशिक्षकों ने बताया कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
समूह चर्चा और व्यावहारिक गतिविधियों से मिला प्रशिक्षण
कार्यशाला में शिक्षकों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि विभिन्न सहभागितापूर्ण गतिविधियों, संवाद, समूह चर्चा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने और विषयों का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने में भी शिक्षक की अहम भूमिका होती है।
जयमंगल कुमार साव के योगदान की हुई सराहना
कार्यशाला के सफल आयोजन में विद्यालय के स्कूल ट्रेनिंग नोडल कोऑर्डिनेटर (STNC) शिक्षक जयमंगल कुमार साव (TGT) के योगदान की भी विशेष सराहना की गई। आयोजन को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने में उनके सक्रिय सहयोग, तत्परता और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शनिवार को होगा कार्यशाला का समापन
इस दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण से संबंधित आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है, ताकि वे विद्यार्थियों के लिए स्वस्थ, सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार कर सकें।
कार्यशाला का दूसरा और अंतिम दिन शनिवार, 31 अक्टूबर को आयोजित होगा। इस दौरान विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों, गतिविधियों और विचार-विमर्श के माध्यम से शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता और ज्ञान को और अधिक समृद्ध किया जाएगा।










