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झारखंड में हाथी का आतंक: जंगली हाथी ने फिर ले ली युवक की जान, वन विभाग सुरक्षा में नाकाम, ग्रामीणों का बढ़ा आक्रोश.. बड़ा सवाल – अब और कितने की जाएगी जान?

Elephant terror in Jharkhand: Wild elephant again takes the life of a youth, forest department fails in providing security, villagers' anger increases... Big question - how many more will lose their lives now?

बोकारो/25.1.26: जिले के गोमिया में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. गोमिया वन क्षेत्र के महुआटांड़ इलाके में बीते शनिवार की देर रात हाथियों ने एक और युवक जान ले ली. घटना कंडेर पंचायत के दरहाबेड़ा गांव की है. घटना के बाद ग्रामीण आक्रोश में हैं और वन विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।ग्रामीणों ने कहा है कि जंगली हाथी से  वन विभाग सुरक्षा देने में विफल है।

गोमिया प्रखंड अंतर्गत कंडेर पंचायत के दरहाबेडा गांव में जंगली हाथियों के हमले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। बीती रात हाथियों के झुंड ने गांव में घुसकर जमकर उत्पात मचाया, जिसमें एक पिता ने अपने पुत्र को बचाने के प्रयास में अपनी जान गंवा दी, जबकि बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया।

मामला ग्राम दरहा बेडा पोस्ट कांडेर थाना महुआटांड़ जिला बोकारो की है जहां 31/12/2025को बलिया सोरेन के बेटे करमचंद सोरेन इसके घर से ही हाथियों ने घुसा कर 8क्विंटल चावल और आलू खा कर खतम कर दिया था और  24/01/2026को उसकी जान ले ली।

wild elephant attack in balrampur
wild elephant attack in balrampur

कैसे हुई घटना

पहले 18 जनवरी की रात कंडेर पंचायत के सिमराबेड़ा महतो टोला के पास मुख्य सड़क पर हाथियों ने तांडव मचाया था. हाथियों ने चलती ओमनी कार पर हमला करके चालक, सब्जी विक्रेता रवींद्र दांगी को मौत के घाट उतार दिया था. लगातार हो रही इन घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.

कौन कौन से गांव हाथी आतंक के साए में

हाथियों के आतंक से तिरला, होन्हें, कंडेर, बारीडारी, बड़कीपुन्नू, महुआटांड़, टीकाहारा, केंदुआ, चोरगांवां, कुंदा, खखंडा, मुरपा समेत करीब ढाई दर्जन गांव-टोले प्रभावित हैं. हाथियों ने घर, चहारदीवारी, वाहन और फसलों को नुकसान पहुंचाकर ग्रामीणों की कमर तोड़ दी है. लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है. लोग रात में घर से निकलने से डर रहे हैं. अब लोगों की नजरें प्रशासन और वन विभाग पर टिकी है.

कैसे हुई घटना

मृतक की पहचान करमचंद सोरेन के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात 5 से 6 हाथियों का झुंड गांव में दाखिल हुआ और एक घर की दीवार तोड़ने लगा। खतरे को भांपते हुए करमचंद सोरेन ने पहले अपनी पत्नी और छोटे बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला।

इसके बाद वह अपने बड़े बेटे को बचाने गया, इसी दौरान एक हाथी ने करमचंद पर अचानक हमला कर दिया। हाथी ने उसकी गर्दन में दांत घुसाकर उसे जमीन पर पटक दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हमले में उसका पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

ढाई माह में इतने की गई जान

पिछले करीब ढाई महीने में हाथी के हमलों से इस क्षेत्र में रहने वाले पांच लोगों की जान जा चुकी है. 10 नवंबर की रात तिलैया रेलवे अंडरपास के पास पूर्व मुखिया बालेश्वर महतो के पुत्र प्रकाश कुमार महतो और टूनक महतो के पुत्र चरकू महतो की मौत हुई थी. 16 नवंबर की रात सांझो देवी नामक महिला हाथी हमले का शिकार बनी. 18 जनवरी को रवींद्र दांगी और अब दरहाबेड़ा में करमचंद सोरेन की जान चली गई.

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