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झारखंड-कर्मचारियों की खबर: कर्मचारियों-अधिकारियों को नहीं मिला अब तक मार्च का वेतन, जानिये अब तक क्यों नहीं दी गयी है सैलरी…

Jharkhand Employees' Update: Employees and Officers Yet to Receive March Salaries—Find Out Why the Payments Have Been Delayed So Far...

झारखंड में लाखों सरकारी कर्मचारियों को मार्च माह का वेतन अब तक नहीं मिला है। आवंटन में देरी और अधिकारियों की चुनाव ड्यूटी को इसकी बड़ी वजह बताया जा रहा है।
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रांची/11.4.26। अप्रैल का आधा महीना गुजर गया है, लेकिन झारखंड में कर्मचारियों को मार्च महीने का अब तक वेतन नहीं मिला है। नये वित्तीय वर्ष के साथ ही राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारी आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। वेतन भुगतान में हो रही इस देरी ने कर्मचारियों की दैनिक जरूरतों और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर असर डालना शुरू कर दिया है।

वेतन में देरी के पीछे कई कारण सामने आए हैं। सबसे प्रमुख कारण असम सहित पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव हैं। इन चुनावों में झारखंड के कई वरिष्ठ अधिकारी, खासकर सचिव स्तर के पदाधिकारी, चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं। उनके राज्य लौटने के बाद ही विभागों को आवश्यक वित्तीय आवंटन मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे साफ है कि कर्मचारियों को वेतन के लिए अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ सकता है।

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दूसरा बड़ा कारण नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में विभागों को वित्त विभाग द्वारा आवंटन का समय पर जारी नहीं होना बताया जा रहा है। हर साल वित्तीय वर्ष के शुरुआती दिनों में इस तरह की तकनीकी देरी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार चुनावी व्यस्तता के कारण स्थिति और जटिल हो गई है।हालांकि, कुछ विभागों के कर्मचारियों को राहत जरूर मिली है। वित्त विभाग, कार्मिक विभाग और लोकभवन सचिवालय जैसे कुछ प्रमुख कार्यालयों के कर्मचारियों को मार्च महीने का वेतन जारी कर दिया गया है।

लेकिन अधिकांश विभागों के कर्मचारी अब भी वेतन का इंतजार कर रहे हैं।वेतन में हो रही इस देरी को लेकर सरकारी कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। कर्मचारी महासंघ ने इस मुद्दे पर कड़ा एतराज जताया है। झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने सरकार से अविलंब वेतन भुगतान की मांग की है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और सरकार को इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।

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उन्होंने यह भी बताया कि हर साल नए वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में आवंटन को लेकर कुछ देरी होती है, लेकिन इस बार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। इसके अलावा केंद्र से मिलने वाले राज्यांश में देरी को भी एक अहम कारण माना जा रहा है।

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अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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