झारखंड : प्रमोशन के लिए अब पास करनी होगी परीक्षा, लिपिकों के प्रमोशन की नियमावली में होने जा रहा ये खास संशोधन, आंगनबाड़ी सेविकाएं भी बनेंगी पर्यवेक्षिका
Jharkhand: Passing an Examination Now Mandatory for Promotion; Key Amendment Underway in Clerical Promotion Rules; Anganwadi Workers to Also Be Promoted to Supervisors

महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत लिपिकों की प्रोन्नति में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
________________________________________
Jharkhand Promotion News। झारखंड सरकार के महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा विभाग के अधीन संचालित बाल विकास परियोजनाओं में कार्यरत लिपिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से प्रोन्नति में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए राज्य सरकार अब नियमावली में संशोधन की तैयारी कर रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में लागू झारखंड बाल विकास सेवा अराजपत्रित कर्मचारी भर्ती एवं सेवाशर्त नियमावली, 2006 में कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जिनके कारण लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों को समय पर प्रोन्नति नहीं मिल पा रही है। यही कारण है कि अब इस नियमावली में संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत लिपिकों के लिए प्रोन्नति का स्पष्ट मार्ग तय किया जाएगा। नई नियमावली में सीमित प्रतियोगिता परीक्षा (Limited Departmental Examination) के माध्यम से पदोन्नति का प्रावधान शामिल किया जाएगा। इससे योग्य और अनुभवी लिपिकों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और विभागीय कार्यों में भी दक्षता आएगी।
विभाग ने इसके समानांतर एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रोन्नति योग्य पदों की पहचान करने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। इसके लिए विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि संशोधित नियमावली लागू होते ही लिपिकों को शीघ्र प्रोन्नति दी जा सके। यह पहल न केवल कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगी, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले विभाग ने महिला पर्यवेक्षिकाओं और बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को उच्चतर पदों पर प्रोन्नति दी है। वहीं, आंगनबाड़ी सेविकाओं को सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से महिला पर्यवेक्षिका के पद पर नियुक्ति का अवसर भी प्रदान किया गया है। ऐसे में अब लिपिकों के लिए भी समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।
इस तरह के सुधारात्मक कदम से विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के बीच पारदर्शिता और समानता का भाव मजबूत होगा। साथ ही, लंबे समय से लंबित प्रोन्नति के मामलों का समाधान भी संभव हो सकेगा।फिलहाल विभागीय स्तर पर नियमावली संशोधन की प्रक्रिया जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इसका अंतिम प्रारूप तैयार कर लागू कर दिया जाएगा। इससे हजारों लिपिकों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है और उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी हो सकेगी।









