close
LIVE UPDATE

Jharkhand High Court: सड़क पर जान बचाने की कोशिश लापरवाही नहीं, हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी; 21 साल पुराने हादसे में बढ़ाया मुआवजा

झारखंड हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़क पर अचानक आए व्यक्ति या पशु को बचाने की कोशिश लापरवाही नहीं है। 21 साल पुराने सड़क हादसे में घायल को बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश।

रांची। रोड एक्सीडेंट में मुआवजा को लेकर हाईकोर्ट ने अहम निर्णय लिया है। झारखंड हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि सड़क पर अचानक आए व्यक्ति या पशु को बचाने का प्रयास अपने आप में चालक की लापरवाही नहीं माना जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने 21 साल पुराने सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि बढ़ा दी।

इस मामल में मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), रांची के वर्ष 2014 के आदेश में संशोधन करते हुए घायल केदार नाथ अंबष्ठ को मिलने वाला मुआवजा 1,32,724 रुपये से बढ़ाकर 1,82,724 रुपये कर दिया। अदालत ने बीमा कंपनी को दावा दायर करने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि छह सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया।

‘जान बचाने की कोशिश को लापरवाही नहीं कहा जा सकता’

सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि दुर्घटना स्कूटर चालक की लापरवाही से हुई थी, इसलिए मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे चालक की लापरवाही साबित होती हो। सड़क पर अचानक आए कुत्ते और बुजुर्ग को बचाने की कोशिश में वाहन का फिसल जाना स्वतः लापरवाही का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

2003 के सड़क हादसे से जुड़ा है मामला

दरअसल यह मामला 5 जनवरी 2003 का है। केदार नाथ अंबष्ठ अपने बेटे के साथ स्कूटर से हटिया जा रहे थे। रास्ते में अचानक एक कुत्ता और एक बुजुर्ग सामने आ गए। उन्हें बचाने के प्रयास में स्कूटर अनियंत्रित होकर फिसल गई, जिससे अंबष्ठ गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद उन्हें लगभग दो महीने तक अस्पताल में भर्ती रहकर इलाज कराना पड़ा।

इन मदों में बढ़ाई गई मुआवजे की राशि

हाईकोर्ट ने पाया कि एमएसीटी ने घायल को हुए वास्तविक नुकसान का पर्याप्त आकलन नहीं किया था। इसलिए अदालत ने अटेंडेंट खर्च, दर्द एवं मानसिक कष्ट तथा जीवन की सुविधाओं में कमी जैसे मदों को जोड़ते हुए कुल मुआवजे में 50 हजार रुपये की वृद्धि कर दी।

दुर्घटना मामलों के लिए महत्वपूर्ण फैसला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार हाईकोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण नजीर मानी जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर दुर्घटना को केवल चालक की लापरवाही मान लेना उचित नहीं है। यदि चालक किसी की जान बचाने के प्रयास में वाहन पर नियंत्रण खो देता है और उसके विपरीत कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, तो उसे स्वतः दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

 

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *