Jharkhand High Court: खुले में मांस बेचने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- नियम कब बनेंगे? 20 अगस्त तक मांगा शपथ पत्र
झारखंड हाईकोर्ट ने खुले में कटे बकरे और चिकन की बिक्री पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से 20 अगस्त तक नियमावली की प्रगति पर शपथ पत्र मांगा है।

रांची। खुलेआम कटे हुए बकरे और चिकन की बिक्री को लेकर हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में अब और अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश देते हुए 20 अगस्त तक विस्तृत शपथ पत्र (एफिडेविट) दाखिल करने का आदेश दिया है।
सरकार को कार्रवाई तेज करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि खुले में मांस की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब उचित नहीं माना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी, जिसमें सरकार को बताना होगा कि नियम बनाने और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया किस चरण में पहुंची है।
सरकार बोली- नियमावली का ड्राफ्ट तैयार, वित्त विभाग के पास फाइल
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता योगेश मोदी ने अदालत को बताया कि खुले में मांस की बिक्री और स्लॉटर हाउस के संचालन से संबंधित नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। फिलहाल इसे वित्त विभाग के पास भेजा गया है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अदालत से एक माह का अतिरिक्त समय भी मांगा।
पहले भी मिला था समय, फिर भी लागू नहीं हुए नियम
खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान याद दिलाया कि इससे पहले भी सरकार को दो महीने के भीतर नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया गया था। बावजूद इसके अब तक नियम लागू नहीं हो सके हैं। इसी कारण अदालत सरकार की प्रगति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।
जनहित याचिका में उठाया गया स्वास्थ्य और स्वच्छता का मुद्दा
यह मामला जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचा है। याचिकाकर्ता श्यामानंद पांडेय ने कहा है कि रांची सहित झारखंड के कई शहरों और कस्बों में खुलेआम कटे हुए बकरे और चिकन को लटकाकर बेचा जाता है। इससे स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन होता है तथा लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।याचिका में कहा गया है कि खुले वातावरण में रखे मांस पर धूल, गंदगी, मक्खियां और अन्य प्रदूषक आसानी से पहुंच जाते हैं, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का भी दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि खुले में मांस की बिक्री खाद्य सुरक्षा संबंधी नियमों और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की भावना के विपरीत है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार स्पष्ट नियम बनाकर आधुनिक और स्वच्छ स्लॉटर हाउस की व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा दोनों की रक्षा हो सके।
2023 में भी कोर्ट दे चुका है आदेश
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 19 जुलाई 2023 को भी राज्य सरकार को खुले में मांस की बिक्री को विनियमित करने और स्लॉटर हाउस संचालन के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया था। दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद नियमावली पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है, जिसके कारण यह मामला अब भी न्यायालय में लंबित है।








