झारखंड: क्या है ‘जादुई कैप’, जो बिजली कर्मचारियों को करंट से बचाएगी? झारखंड में बड़े पैमाने पर खरीद की तैयारी, जानिए कैसे करती है काम
झारखंड में बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जेबीवीएनएल जल्द मेटल डिटेक्टर सेफ्टी कैप खरीदेगा। जानिए यह स्मार्ट कैप कैसे 11 केवी और 33 केवी बिजली लाइनों के पास पहुंचते ही अलर्ट देकर करंट से जान बचाने में मदद करती है।

रांची: बिजली लाइन पर काम करना जोखिमों से भरा है। एक चूक आपकी जान ले सकता है। काम के दौरान कई बार कर्मचारी यह समझ नहीं पाते कि जिस लाइन के पास वे काम कर रहे हैं, उसमें करंट प्रवाहित हो रहा है या नहीं। ऐसे में एक मामूली सी लापरवाही भी जानलेवा हादसे का कारण बन सकती है। इसी खतरे को कम करने के लिए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) अब आधुनिक तकनीक से लैस मेटल डिटेक्टर सेफ्टी कैप खरीदने जा रहा है।यह विशेष हेलमेट जैसी दिखने वाली सुरक्षा कैप कर्मचारियों को बिजली के उच्च वोल्टेज तारों के पास पहुंचते ही पहले से चेतावनी देगी। यही वजह है कि इसे लोग ‘जादुई कैप’ भी कह रहे हैं।
कैसे काम करती है यह कैप?
मेटल डिटेक्टर सेफ्टी कैप सामान्य हेलमेट नहीं है। इसमें ऐसे सेंसर लगाए जाते हैं जो उच्च वोल्टेज विद्युत क्षेत्र (इलेक्ट्रिक फील्ड) या विद्युत लाइन की मौजूदगी का पता लगा सकते हैं। जैसे ही कर्मचारी 11 केवी या 33 केवी बिजली लाइन के खतरनाक दायरे में पहुंचता है, कैप तुरंत अलर्ट देने लगती है।
अलर्ट मिलने के लिए इसमें कई तरह की व्यवस्था हो सकती है—
- बीप या अलार्म की आवाज
- एलईडी लाइट का चमकना
- कंपन (वाइब्रेशन) के माध्यम से चेतावनी
इससे कर्मचारी समय रहते सतर्क हो जाता है और सुरक्षित दूरी बना सकता है।
जीपीएस से भी होगी लैस
जेबीवीएनएल की योजना के अनुसार खरीदी जाने वाली कैप में जीपीएस सिस्टम भी होगा। इससे जरूरत पड़ने पर कर्मचारी की लोकेशन का पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा पीले रंग की यह कैप बारिश के दौरान भी अतिरिक्त सुरक्षा और दृश्यता (विजिबिलिटी) प्रदान करेगी।
पहले चरण में होगी लाखों की खरीद
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विभाग पहले चरण में करीब तीन लाख रुपये की लागत से इन सुरक्षा कैपों की खरीद करेगा। योजना के अनुसार प्रत्येक सब स्टेशन को 10-10 कैप उपलब्ध कराई जाएंगी।रांची सर्किल में कुल 98 सब स्टेशन हैं, जिनमें खूंटी के 11 सब स्टेशन भी शामिल हैं। शुरुआत में नगर निगम क्षेत्र के 47 सब स्टेशनों में इन कैपों का वितरण किया जाएगा। इसके बाद शेष कैप अन्य सब स्टेशनों में उपलब्ध कराई जाएंगी।
क्यों जरूरी है यह तकनीक?
बिजली विभाग के लाइनमैन अक्सर ऊंचे पोल, ट्रांसफार्मर और हाई टेंशन लाइनों के पास काम करते हैं। कई बार तकनीकी गड़बड़ी, गलत संचार या मानवीय भूल के कारण लाइन में करंट रहने के बावजूद कर्मचारी उसके संपर्क में आ जाते हैं। ऐसे हादसों में गंभीर चोट या मौत तक हो जाती है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर्मचारी को पहले ही खतरे की जानकारी मिल जाए तो दुर्घटना की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है। यही कारण है कि कई बिजली कंपनियां अब पारंपरिक सुरक्षा उपकरणों के साथ स्मार्ट सेफ्टी डिवाइस अपनाने लगी हैं।
कर्मचारियों की सुरक्षा होगी मजबूत
जेबीवीएनएल का मानना है कि इस आधुनिक सुरक्षा उपकरण के इस्तेमाल से लाइनमैन और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। यह तकनीक संभावित खतरे की समय रहते जानकारी देकर करंट से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।अगर यह पहल सफल रहती है, तो आने वाले समय में झारखंड के अन्य बिजली सर्किलों में भी इस तरह की स्मार्ट सेफ्टी कैप का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।
क्या है खास?
- 11 केवी और 33 केवी लाइन के पास पहुंचते ही अलर्ट।
- सेंसर आधारित सुरक्षा प्रणाली।
- बीप, लाइट या वाइब्रेशन के जरिए चेतावनी।
- जीपीएस से लैस स्मार्ट कैप।
- बारिश में भी उपयोगी।
- पहले चरण में लाखों रुपये की खरीद।
- लाइनमैनों के लिए दुर्घटना का खतरा कम करने की पहल।
जाहिर है मेटल डिटेक्टर सेफ्टी कैप ना सिर्फ बिजलीकर्मियों की जान की सुरक्षा करेगा, बल्कि जेबीवीएनएल के आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़ाया गया कदम होगा। हालांकि अब जबकि मेटल डिटेक्टर कैप खरीदी की बात शुरू हुई है, तो देखना होगा, कि कब तक खरीदी पूरी हो पाती है।









