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Jharkhand कर्मचारियों की खबर: सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- अपने ही आदेश का पालन नहीं कर रही सरकार, कार्मिक सचिव फिर होंगे तलब

Jharkhand High Court News: ग्रेड पे और समयबद्ध प्रोन्नति मामले में हाईकोर्ट ने झारखंड सरकार को फटकार लगाई। कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो को फिर से तलब किया गया। जानिए पूरा मामला।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट में कर्मचारियों के मुद्दे पर अहम सुनवाई की। सरकारी कर्मचारियों को समयबद्ध प्रोन्नति और ग्रेड पे का लाभ देने के मामले में राज्य सरकार को झारखंड हाईकोर्ट से कड़ी फटकार लगायी है। न्यूनतम सेवा अवधि पूरी करने के बावजूद कर्मचारियों को प्रोन्नति संबंधी ग्रेड पे का लाभ नहीं मिलने पर दायर अवमानना वाद की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार अपने ही आदेश का पालन नहीं कर रही है।

इतना ही नहीं, विधि विभाग के निर्देशों का भी अनुपालन नहीं किया जा रहा है।”जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने सरकार को अपने आदेशों का पूरी तरह पालन करने का निर्देश देते हुए कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो को 9 जुलाई 2026 की अगली सुनवाई में फिर से सशरीर उपस्थित रहने का आदेश दिया है।

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सरकार के रवैये पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

अवमानना वाद (सिविल) संख्या 318/2025 की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के जवाब पर नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो ने अदालत को बताया कि इसी मामले से संबंधित एलपीए (लेटर्स पेटेंट अपील) लंबित होने के कारण आदेश लागू नहीं किया गया।इस दलील से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार अपने ही जारी किए गए आदेशों का पालन नहीं कर रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद डब्ल्यूपी (एस) संख्या 1530/2021 से जुड़ा है। सचिवालय के तत्कालीन सहायक प्रशाखा पदाधिकारी अरविंद रवि कुजूर सहित अन्य कर्मचारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दायर की थी।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने 4 अप्रैल 2014 को संकल्प जारी कर समयबद्ध प्रोन्नति का प्रावधान किया था, लेकिन सरकार ने वर्षों तक इसका पालन नहीं किया।

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2015 से मिलना था लाभ, मिला 2022 में

याचिका के अनुसार कर्मचारियों को दो वर्ष की सेवा पूरी होने पर 4600 रुपये के ग्रेड पे से 4800 रुपये के ग्रेड पे पर प्रोन्नति का लाभ वर्ष 2015 से मिल जाना चाहिए था। लेकिन सरकार ने यह लाभ लगभग सात वर्ष की देरी के बाद 29 जुलाई 2022 से लागू किया।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे उन्हें सात वर्षों का आर्थिक नुकसान हुआ। उनका यह भी दावा है कि यदि समय पर पहली प्रोन्नति मिल जाती तो नियम के अनुसार उन्हें दूसरी प्रोन्नति का लाभ भी मिल चुका होता।

आठ साल में दो ग्रेड पे मिलने थे, मिला सिर्फ एक
राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार—
• 2 वर्ष की सेवा पूरी होने पर 4600 रुपये से 4800 रुपये ग्रेड पे का लाभ मिलना चाहिए।
• 4800 रुपये ग्रेड पे में 6 वर्ष की सेवा पूरी होने पर 6600 रुपये ग्रेड पे का लाभ दिया जाना चाहिए।
यानी कुल आठ वर्षों में कर्मचारियों को दो प्रोन्नति संबंधी ग्रेड पे मिलने का प्रावधान है। लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें अब तक केवल पहली प्रोन्नति का लाभ भी सात साल की देरी से मिला है, जबकि दूसरी प्रोन्नति का लाभ अभी तक नहीं दिया गया।

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कुछ विभागों में 2015 से मिल रहा है लाभ

सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि राज्य सरकार के कई विभागों में इसी आदेश का लाभ वर्ष 2015 से लगातार दिया जा रहा है।बताया गया कि कार्मिक विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों को समय पर ग्रेड पे का लाभ मिला है। इसके अलावा संयुक्त बिहार के समय वर्ष 1995 में नियुक्त कर्मचारियों को भी यह सुविधा मिल रही है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब समान नियम अन्य विभागों में लागू हैं, तो सचिवालय कर्मियों को इससे वंचित रखना समानता के सिद्धांत के विपरीत है।

9 जुलाई को फिर होगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह अपने आदेशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करे। साथ ही कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो को 9 जुलाई 2026 को फिर से व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।इस मामले की अगली सुनवाई में यह तय हो सकता है कि सरकार कर्मचारियों को लंबित ग्रेड पे का लाभ कब और किस प्रकार देगी तथा सात वर्षों के बकाया वित्तीय लाभ पर क्या निर्णय लिया जाएगा।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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