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उंगलियों के जोड़, कोहनी और घुटनों में हो रहा कालापन? जानिए कारण, बीमारियों के संकेत और क्या करें

उंगलियों के जोड़, कोहनी, घुटनों और पैरों का कालापन क्यों होता है? जानें रगड़, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज, विटामिन B12 और अन्य संभावित कारण।

नई दिल्ली। उंगलियों के जोड़, कोहनी, घुटने, पैर या हाथ की त्वचा का काला पड़ना हमेशा गंदगी या सफाई की कमी का नतीजा नहीं होता। कई बार लगातार रगड़, दबाव, त्वचा में सूजन या रूखापन इसकी वजह हो सकता है। कई मामलों में आपको चिकित्सक की भी सलाह की जरूरत पड़ सकती है। त्वचा रोग विशेषज्ञ डाक्टर सुहानी बताती है कि वहीं कुछ मामलों में त्वचा का बढ़ता कालापन शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज, पोषण की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है।

खासकर अगर त्वचा का रंग अचानक बदल रहा है, कालापन बढ़ता जा रहा है या इसके साथ खुजली, सूजन, कमजोरी अथवा वजन में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

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सिर्फ गंदगी नहीं, रगड़ भी हो सकती है वजह

डाक्टर सुहानी के मुताबिक उंगलियों के जोड़, कोहनी और घुटनों की त्वचा शरीर के दूसरे हिस्सों की तुलना में मोटी होती है। इन जगहों पर लगातार दबाव और घर्षण होने से त्वचा की ऊपरी परत मोटी हो सकती है और रंग गहरा दिखाई देने लगता है।

बार-बार रगड़ पड़ने पर शरीर की त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन भी बढ़ सकता है। मेलेनिन त्वचा के रंग के लिए जिम्मेदार पिगमेंट है। इसी वजह से लंबे समय तक घर्षण वाले हिस्सों में कालापन नजर आ सकता है।

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इंसुलिन रेजिस्टेंस से भी जुड़ा हो सकता है कालापन

अगर गर्दन, बगल, उंगलियों के जोड़ या शरीर के दूसरे हिस्सों की त्वचा मोटी होने के साथ गहरी पड़ने लगे, तो यह Acanthosis Nigricans जैसी स्थिति से जुड़ा हो सकता है। डाक्टर सुहानी के मुताबिक यह कई बार इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापे या डायबिटीज के साथ देखा जाता है।ऐसी स्थिति में केवल त्वचा पर क्रीम या घरेलू नुस्खे लगाने के बजाय इसके मूल कारण की जांच जरूरी हो सकती है।

विटामिन B12 की कमी भी हो सकती है कारण

मेडिकल साइंस की मानें तो कुछ मामलों में विटामिन B12 की कमी से भी त्वचा में गहरे रंग के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। खासकर उंगलियों के जोड़ों में असामान्य कालापन नजर आने पर डॉक्टर पोषण संबंधी कमी की जांच की सलाह दे सकते हैं।हालांकि, केवल त्वचा के रंग को देखकर किसी एक विटामिन की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।

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पैरों का कालापन हो तो रक्त संचार पर भी दें ध्यान

डाक्टर सुहानी के मुताबिक यदि पैरों, खासकर टखनों और निचले हिस्से की त्वचा का रंग भूरा या काला पड़ रहा है, तो कुछ मामलों में यह रक्त संचार से जुड़ी समस्या से संबंधित हो सकता है। नसों में रक्त के प्रवाह से जुड़ी समस्या होने पर त्वचा के रंग में बदलाव देखा जा सकता है।इसके अलावा एक्जिमा, सोरायसिस, संक्रमण या किसी अन्य त्वचा की सूजन के बाद भी प्रभावित जगह पर गहरे रंग के निशान रह सकते हैं।

थायरॉइड और अन्य समस्याओं में भी बदल सकता है त्वचा का रंग

त्वचा में असामान्य पिगमेंटेशन कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है। थायरॉइड से संबंधित समस्या, कुछ हार्मोनल बदलाव और दुर्लभ स्थितियां भी त्वचा के रंग में बदलाव कर सकती हैं। कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव से भी त्वचा का रंग बदल सकता है।इसलिए लंबे समय से बने हुए या तेजी से बढ़ रहे कालेपन को केवल कॉस्मेटिक समस्या मानना उचित नहीं है।

नींबू और बेकिंग सोडा से बचें

डाक्टर सुहानी सलाह देती है कि कालेपन को दूर करने के लिए लोग अक्सर नींबू, बेकिंग सोडा या तेज स्क्रब का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन संवेदनशील या पहले से प्रभावित त्वचा पर ऐसी चीजों को लगाने से जलन और सूजन बढ़ सकती है और कालापन और अधिक दिखाई दे सकता है।त्वचा को जोर से रगड़ने के बजाय नियमित रूप से मॉइस्चराइजर लगाना और घर्षण कम करना बेहतर तरीका है। किसी भी घरेलू उपाय को इस्तेमाल करने से पहले त्वचा की संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए।

दही-हल्दी जैसे घरेलू उपाय कितने कारगर?

दही और हल्दी, एलोवेरा या बादाम जैसे घरेलू मिश्रणों का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता है। दही में लैक्टिक एसिड और हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जबकि एलोवेरा त्वचा को नमी देने में मदद कर सकता है।हालांकि, इन घरेलू उपायों को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर कालापन किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या की वजह से है, तो केवल घरेलू नुस्खों से मूल कारण दूर नहीं होगा।

कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर उंगलियों के जोड़, कोहनी, घुटनों या पैरों का कालापन अचानक बढ़ रहा है, लंबे समय से बना हुआ है या इसके साथ अन्य लक्षण भी हैं, तो त्वचा विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए।डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड शुगर/HbA1c, विटामिन B12 या अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। जांच का निर्णय व्यक्ति के लक्षणों और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर किया जाता है।

खास बात: त्वचा का कालापन कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। इसलिए बिना जांच के इसे डायबिटीज, विटामिन की कमी या किसी दूसरी बीमारी का निश्चित संकेत मानना सही नहीं है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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