close
LIVE UPDATE

JPSC-JSSC गड़बड़ी मामला : 5 लाख की कथित रिश्वत से JSSC में एंट्री, फिर करोड़ों के टेंडर का खेल! TDPL पर CID जांच में बड़ा खुलासा

JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ी की जांच में CID को TDPL के इंपैनलमेंट को लेकर बड़ा खुलासा मिला है। 5 लाख की कथित रिश्वत और टेंडर कनेक्शन की जांच जारी है।

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही CID को परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL के JSSC में इंपैनलमेंट को लेकर हर दिन नयी कड़ी सामने आ रही है। जांच में सामने आए बयानों के मुताबिक, कंपनी ने कथित तौर पर रिश्वत देकर पहले JSSC में अपना इंपैनलमेंट कराया और इसके बाद परीक्षा संचालन का काम हासिल किया। इस मामले में CID ने TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय और कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

5 लाख की कथित रिश्वत से शुरू हुआ खेल

CID की पूछताछ में TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय ने कथित तौर पर कंपनी को JSSC में काम दिलाने की पूरी प्रक्रिया को लेकर अहम जानकारी दी है। उसके बयान के अनुसार, JSSC में इंपैनलमेंट कराने के लिए एक एसओ को 5 लाख रुपये नकद दिए गए थे।अभय ने जांच एजेंसी को बताया कि JSSC में उसका करीबी एसओ प्रेम कुमार था। उसकी मदद से ही TDPL का इंपैनलमेंट कराया गया।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

इसके एवज में JSSC कार्यालय के सामने स्थित मैदान में प्रेम कुमार को कथित तौर पर 5 लाख रुपये नकद दिए गए।अभय के मुताबिक, TDPL की ओर से इस काम के लिए उसे कुल 10 लाख रुपये दिए गए थे। इनमें से 5 लाख रुपये उसके पास रहे, जबकि बाकी 5 लाख रुपये कथित तौर पर प्रेम कुमार को दिए गए।

इंपैनलमेंट के बाद TDPL को मिला परीक्षा संचालन का काम

CID की जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि इंपैनलमेंट के बाद TDPL ने झारखंड में परीक्षा संचालन के काम में प्रवेश किया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी को इंपैनलमेंट मिलने से लेकर टेंडर हासिल करने तक की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

यही वजह है कि जांच में इंपैनलमेंट, टेंडर और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका को भी खंगाला जा रहा है। वर्ष 2025 में JSSC ने TDPL को प्रतिबंधित कर दिया था, जिसके बाद कंपनी की भूमिका और पुराने कामकाज को लेकर भी सवाल उठे हैं।

स्वास्थ्य विभाग में भी कनेक्शन का दावा

CID की पूछताछ में अभय ने वर्ष 2023 से जुड़े एक और मामले की जानकारी दी है। उसके अनुसार, उसने वर्ष 2023 में JSR एजेंसी में काम शुरू किया था। इस एजेंसी को स्वास्थ्य विभाग में इंपैनल कराकर भर्ती से जुड़ा काम दिलाया गया था।अभय ने कथित तौर पर बताया कि इस काम के बदले उसे 9 लाख रुपये मिले थे। बाद में दिल्ली के शेंटी के माध्यम से उसका संपर्क TDPL से हुआ और इसके बाद उसने JSSC में कंपनी का इंपैनलमेंट कराने में मदद की।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

TDPL निदेशक ने भी अभय की भूमिका बताई

CID की जांच में TDPL के निदेशक रामवीर सिंह के बयान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रामवीर सिंह ने जांच एजेंसी को दिए बयान में कथित तौर पर स्वीकार किया कि अभय ने JSSC में कंपनी को काम दिलाने में मदद की थी।इसके बाद CID ने अभय और रामवीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। दोनों से पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

5 लाख से लेकर करोड़ों के खेल तक पहुंची जांच

मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि जांच की शुरुआत JSSC में कथित 5 लाख रुपये की रिश्वत देकर इंपैनलमेंट कराने के आरोप से हुई, लेकिन अब जांच परीक्षा संचालन से जुड़े बड़े आर्थिक लेन-देन और नेटवर्क तक पहुंचती दिखाई दे रही है।CID यह पता लगाने में जुटी है कि TDPL को काम दिलाने में सिर्फ अभय और कथित रूप से जुड़े अधिकारियों की भूमिका थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य साक्ष्य इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट कर सकते हैं।

ये सवाल पूछे जा रहे हैं…

Q1. JSSC में TDPL के इंपैनलमेंट को लेकर क्या खुलासा हुआ है?
CID की जांच में आरोपी एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर अभय ने कथित तौर पर 5 लाख रुपये रिश्वत देने की बात बताई है।
Q2. कथित तौर पर 5 लाख रुपये किसे दिए गए?
अभय के बयान के अनुसार, यह रकम JSSC के एक एसओ प्रेम कुमार को दी गई थी।
Q3. TDPL को JSSC में इंपैनलमेंट के बाद क्या काम मिला?
जांच के अनुसार इंपैनलमेंट के बाद कंपनी को परीक्षा संचालन से जुड़ा काम मिला।
Q4. CID ने इस मामले में किसे गिरफ्तार किया है?
CID ने TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय और कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह को गिरफ्तार किया है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *