B.Ed से बने प्राथमिक शिक्षकों के लिए 6 महीने का ब्रिज कोर्स, नौकरी बचाए रखने के लिए करना होगा पूरा; जानें पात्रता और पढ़ाई का तरीका
B.Ed से प्राथमिक शिक्षक बने शिक्षकों के लिए NIOS का 6 महीने का ब्रिज कोर्स जरूरी है। जानें पात्रता, पाठ्यक्रम, स्कूल एक्सपीरियंस, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज।

नई दिल्ली। प्राथमिक स्कूलों में B.Ed की योग्यता के आधार पर नियुक्त होकर पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए छह महीने का स्पेशल ब्रिज कोर्स शुरू किया गया है। यह कोर्स राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) की ओर से संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर पढ़ा रहे इन-सेवा शिक्षकों को प्राथमिक शिक्षा की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देना है।
NIOS के अनुसार यह ब्रिज कोर्स खास तौर पर उन इन-सर्विस प्राथमिक शिक्षकों के लिए है, जिनके पास B.Ed की योग्यता है और जिनकी नियुक्ति 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के बीच हुई है। निर्धारित अवधि में कोर्स पूरा करना जरूरी है। NIOS ने स्पष्ट किया है कि कोर्स पूरा नहीं करने पर संबंधित नियुक्ति की वैधता प्रभावित हो सकती है।
किन शिक्षकों को करना है ब्रिज कोर्स?
यह कोर्स उन प्राथमिक शिक्षकों के लिए है, जिनकी नियुक्ति B.Ed को मान्य योग्यता मानते हुए उक्त अवधि में हुई है। NIOS के कार्यक्रम गाइड में इन्हें कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले इन-सर्विस शिक्षक बताया गया है।
इसका संबंध सुप्रीम कोर्ट के उस मामले से है, जिसमें प्राथमिक स्तर पर B.Ed योग्यता से जुड़ा विवाद सामने आया था। NIOS के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार यह ब्रिज कोर्स प्राथमिक स्तर पर कार्यरत B.Ed शिक्षकों के पेशेवर विकास के लिए तैयार किया गया है।
छह महीने में क्या पढ़ाया जाएगा?
ब्रिज कोर्स में सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई ही नहीं होगी, बल्कि प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाने से जुड़ी व्यावहारिक समझ भी विकसित की जाएगी।
NIOS के पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से ये विषय शामिल हैं—
बाल विकास और शैक्षिक मनोविज्ञान
पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और मूल्यांकन
भाषा-1 की शिक्षण पद्धति
भाषा-2 की शिक्षण पद्धति
गणित की शिक्षण पद्धति
हमारे आसपास की दुनिया की शिक्षण पद्धति
स्कूल एक्सपीरियंस
इसके अलावा शिक्षकों को प्राथमिक बच्चों की सीखने की प्रक्रिया, अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले बच्चों की जरूरतों, तकनीक के इस्तेमाल और मूल्यांकन की आधुनिक पद्धतियों से भी परिचित कराया जाएगा।
सिर्फ घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं, स्कूल एक्सपीरियंस भी
इस कोर्स को नौकरी के साथ करने की सुविधा दी गई है, लेकिन इसे पूरी तरह घर बैठे केवल ऑनलाइन पढ़ाई वाला कोर्स समझना सही नहीं होगा।
NIOS के कार्यक्रम गाइड के मुताबिक छह महीने के कार्यक्रम में कम से कम 20 दिन का स्कूल एक्सपीरियंस और कम से कम 10 दिन की ऑनलाइन कॉन्टैक्ट क्लास होगी। यानी शिक्षकों को अध्ययन के साथ व्यावहारिक अनुभव भी लेना होगा।
डिजिटल स्टडी मटेरियल से होगी पढ़ाई
कोर्स के लिए NIOS की ओर से डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। पाठ्यक्रम में भाषा, गणित, मूल्यांकन और शिक्षण पद्धति से संबंधित अध्ययन सामग्री शामिल है।
ऑनलाइन और ओपन डिस्टेंस लर्निंग (ODL) माध्यम के जरिए पाठ्यक्रम संचालित करने की व्यवस्था की गई है। इससे पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षक अपनी नौकरी के साथ कोर्स की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे।
एडमिशन और वेरिफिकेशन कैसे होगा?
NIOS के ब्रिज कोर्स पोर्टल पर शिक्षक आवेदन प्रक्रिया पूरी करते हैं। आवेदन के बाद शिक्षक की जानकारी का सत्यापन स्कूल के प्रिंसिपल/हेड ऑफ स्कूल की ओर से किया जाता है। इसके बाद राज्य के नोडल अधिकारी अंतिम पुष्टि करते हैं।
आवेदन के लिए B.Ed की मार्कशीट/सर्टिफिकेट, नियुक्ति पत्र, फोटो, हस्ताक्षर और स्कूल प्रिंसिपल से प्रमाणित सेल्फ डिक्लेरेशन जैसे दस्तावेज मांगे गए हैं।
कोर्स पूरा करना क्यों जरूरी है?
NIOS ने अपने आधिकारिक पोर्टल पर स्पष्ट किया है कि संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा में ब्रिज कोर्स पूरा करना होगा। ऐसा नहीं करने पर नियुक्ति की वैधता प्रभावित हो सकती है।
साथ ही यह ब्रिज कोर्स केवल मौजूदा नौकरी को बनाए रखने के लिए है। NIOS के मुताबिक इसे भविष्य में प्राथमिक शिक्षक की नई भर्ती के लिए वैध योग्यता के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
कोर्ट से राहत पाने वाले शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था
जिन शिक्षकों की नियुक्ति 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 की निर्धारित अवधि से बाहर है, लेकिन उन्हें किसी अदालत से इस संबंध में राहत मिली है, उनके लिए NIOS ने Court Order Registration की व्यवस्था भी दी है।
ऐसे आवेदकों को शपथपत्र, रिट याचिका और संबंधित कोर्ट के आदेश की प्रति जैसे अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने होते हैं।












