झारखंड DGP विवाद: बाबूलाल मरांडी ने तदाशा मिश्रा पर साधा निशाना, कहा- ‘अब भी समय है, स्वतः इस्तीफा दीजिए’ सोशल मीडिया पर डीजीपी के नाम संबोधित लिखा पोस्ट, पढ़िये क्या है पोस्ट में…

रांची। झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति विवाद खत्म नहीं हो रहा है। एक तरफ कोर्ट में जिरह, दूसरी तरफ तीखे बयानों का दौरा…इन्ही नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी तदाशा मिश्रा को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला देते हुए राज्य सरकार और डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
मरांडी ने अपनी पोस्ट में तदाशा मिश्रा से कहा है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस सुनी होगी और आरोप लगाया कि सरकार डीजीपी नियुक्ति के नियमों को लेकर अदालत के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। हालांकि, ये मरांडी के राजनीतिक आरोप और टिप्पणियां हैं, अदालत का अंतिम फैसला नहीं।
तदाशा मिश्रा जी,
आज सर्वोच्च न्यायालय में झारखंड के डीजीपी नियुक्ति मामले की बहस आपने भी सुनी होगी। अपनी कुर्सी बचाने की इस कवायद में आपकी और राज्य सरकार की कैसी भद्द पिट रही है, यह अब किसी से छिपा नहीं है। झारखंड की जनता सब देख रही है, सब समझ रही है।
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— Babulal Marandi (@yourBabulal) September 29, 2026
सुप्रीम कोर्ट में डीजीपी नियुक्ति को लेकर चल रहा मामला
झारखंड डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। तदाशा मिश्रा को दिसंबर 2025 में डीजीपी नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति को लेकर यह सवाल उठा कि उन्हें निर्धारित सेवानिवृत्ति से महज एक दिन पहले पुलिस महानिदेशक बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट में एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में भी इस नियुक्ति को प्रकाश सिंह मामले में तय दिशा-निर्देशों के संदर्भ में चुनौतीपूर्ण बताया गया है।
मामले में अदालत ने झारखंड सरकार द्वारा डीजीपी नियुक्ति से जुड़े नियमों और उनके कानूनी आधार पर भी सवालों पर सुनवाई की है। 24 सितंबर की सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को तय की गई थी।
‘महंगे वकीलों से गैरकानूनी फैसला वैध नहीं होता’
बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट में राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि सरकार को डीजीपी नियुक्ति से जुड़े अपने फैसले का कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में वरिष्ठ वकीलों की मौजूदगी से किसी फैसले की वैधता स्वतः साबित नहीं हो जाती।
मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने राज्यों से डीजीपी नियुक्ति में अपने पूर्व निर्देशों के अनुपालन को लेकर जवाब मांगा है। यह मामला प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार में पुलिस सुधारों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन से संबंधित है।
डीजीपी को लेकर मरांडी ने लगाए गंभीर आरोप
अपनी पोस्ट में मरांडी ने तदाशा मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की पुलिस व्यवस्था में वास्तविक निर्णय किसी अन्य व्यक्ति के प्रभाव में लिए जा रहे हैं। हालांकि, इस दावे के समर्थन में मरांडी ने अपनी पोस्ट में कोई स्वतंत्र दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है।उन्होंने तदाशा मिश्रा से उनकी प्रशासनिक और पेशेवर भूमिका को लेकर सवाल करते हुए इस्तीफा देने की अपील की।
‘वर्दी और पद की गरिमा बचाने का फैसला आज भी ले सकती हैं’
मरांडी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट अपना निर्णय करेगा, लेकिन डीजीपी के रूप मंी अपनी वर्दी, पद और सेवा-जीवन की गरिमा को लेकर निर्णय तदाशा मिश्रा स्वयं ले सकती हैं।उन्होंने पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता का उदाहरण देते हुए भी राजनीतिक टिप्पणी की और तदाशा मिश्रा से इस्तीफा देने की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल डीजीपी नियुक्ति से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया, सेवानिवृत्ति से ठीक पहले पद पर नियुक्ति और राज्य के नियमों के कानूनी आधार से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई की है। ऐसे में अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और आदेश महत्वपूर्ण होंगे।मरांडी की सोशल मीडिया पोस्ट को इसी न्यायिक विवाद के बीच उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।












