झारखंड : स्वास्थ्य विभाग की नियुक्तियों में रिश्वतखोरी का आरोप, DC ने गठित की जांच टीम; एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग की नियुक्तियों में 2 से 3 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोपों की जांच होगी। DC ने टीम गठित कर 7 दिन में रिपोर्ट मांगी।

Viral News । स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के नाम पर घूसखोरी का मामला गरम है। शिकायत के आधार पर विभाग ने जांच शुरू कर दी है। मामला झारखंड के गढ़वा जिले का है, जहां स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर लाखों रुपये की रिश्वत लेने का मामला सामने आया है।
दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल खबर में लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी पशुपति नाथ मिश्रा ने संयुक्त जांच दल का गठन किया है। जांच टीम को मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
नौकरी के नाम पर 2 से 3 लाख रुपये लेने का आरोप
वायरल खबर के अनुसार, गढ़वा जिले के विभिन्न प्रखंडों में आउटसोर्सिंग एजेंसी समानता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में नियुक्तियां दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से कथित रूप से प्रति व्यक्ति दो से तीन लाख रुपये तक की मांग या वसूली की गई।
आरोपों में लैब टेक्नीशियन, ओटी असिस्टेंट, एएनएम, जीएनएम और एमपीडब्ल्यू जैसे पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

स्वास्थ्य विभाग के दो लिपिकों के नाम भी चर्चा में
वायरल खबर में असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के कार्यालय में कार्यरत लिपिक और की कथित संलिप्तता का भी आरोप लगाया गया है।मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने आरोपों को केवल सोशल मीडिया पर वायरल जानकारी के आधार पर सही मानने के बजाय तथ्यों का सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। जांच के दौरान संबंधित आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी।
अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में बनी जांच टीम
उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा की ओर से गठित संयुक्त जांच दल में दो अधिकारियों को शामिल किया गया है।
• अध्यक्ष: विकास कुमार राय, अपर समाहर्ता (AC), गढ़वा।
• सदस्य: कुमार मयंक भूषण, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), गढ़वा।
जांच दल को वायरल खबर में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच करने और सभी संबंधित तथ्यों का सत्यापन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सात दिन में देनी होगी जांच रिपोर्ट
जिला प्रशासन ने जांच टीम को निर्देश दिया है कि मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कर स्पष्ट मंतव्य के साथ संयुक्त जांच प्रतिवेदन एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराया जाए।जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उसके निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, नियुक्तियों में रिश्वतखोरी और संबंधित कर्मचारियों की कथित भूमिका से जुड़े आरोप जांच के दायरे में हैं।
गढ़वा जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर यह तय होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाती है।











