Parenting Tips: बच्चा हर छोटी बात पर करता है गुस्सा? जानें उसे शांत करने और व्यवहार सुधारने के 7 आसान तरीके
Parenting Tips: बच्चा छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है या जिद करता है? जानें बच्चे का गुस्सा शांत करने, व्यवहार सुधारने और अच्छी आदतें सिखाने के 7 आसान तरीके।

Lifestyle Desk : बच्चों की जिद कब आदत बन जाती है, माता-पिता को समझ ही नहीं आती। समझ तब आती है, जब ये जिद बेकाबू गुस्सा में बदल जाता है। ऐसे में बच्चों का जिद करना, नाराज होना या छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा दिखाना माता-पिता के लिए कई बार चिंता का कारण बन जाता है। कभी बच्चा अपनी बात मनवाने के लिए चिल्लाने लगता है, तो कभी गुस्से में रोने या चीजें फेंकने लगता है।
ऐसी स्थिति में पेरेंट्स अक्सर बच्चे को डांटने या सख्ती करने लगते हैं, लेकिन हर बार यह तरीका कारगर साबित हो, ऐसा जरूरी नहीं है।दरअसल, बच्चे का चिड़चिड़ापन और गुस्सा कई वजहों से जुड़ा हो सकता है। उम्र, स्वभाव, थकान, आसपास का माहौल और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में होने वाली परेशानी भी उसके व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
ऐसे में माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चे को सिर्फ अनुशासन सिखाने के बजाय उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश भी करें।अगर आपका बच्चा भी छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है, तो कुछ आसान पेरेंटिंग टिप्स अपनाकर आप उसे अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से संभालना सिखा सकते हैं। आइए जानते हैं बच्चे के गुस्से को शांत करने और उसके व्यवहार को बेहतर बनाने के 7 आसान तरीके।
1. हर बात पर डांटने और सख्ती करने से बचें
बच्चों की परवरिश आज के दौर में आसान नहीं है। आज के वक्त में बच्चों को अनुशासन सिखाना जरूरी है, लेकिन हर गलती पर तेज आवाज में डांटना या धमकाना उनकी परेशानी को बढ़ा सकता है। कई बार बच्चा डांट से डरकर चुप तो हो जाता है, लेकिन अपनी भावनाओं को संभालना नहीं सीख पाता।ऐसे में बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि उसका व्यवहार गलत क्यों है और वह अपनी बात दूसरे तरीके से कैसे रख सकता है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा गुस्से में चिल्ला रहा है, तो उसे शांत आवाज में समझाएं कि वह बिना चिल्लाए भी अपनी बात कह सकता है।
2. बच्चे को प्यार देने के साथ तय करें जरूरी सीमाएं
बच्चे की हर मांग पूरी करना या हर गलती को नजरअंदाज करना सही नहीं है। इसी तरह, छोटी-छोटी बातों पर जरूरत से ज्यादा सख्ती करना भी मददगार नहीं होता। बेहतर पेरेंटिंग के लिए प्यार, धैर्य और अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।अगर बच्चा गुस्से में खिलौना फेंकता है या किसी को मारने की कोशिश करता है, तो उसे स्पष्ट रूप से बताएं कि ऐसा करना स्वीकार्य नहीं है। साथ ही, उसे यह भी समझाएं कि गुस्सा आने पर वह अपनी बात शब्दों में बता सकता है।
3. बच्चे की बात ध्यान से सुनें
कई बार बच्चे अपनी परेशानी को सही शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे में उनकी निराशा गुस्से या चिड़चिड़ेपन के रूप में सामने आ सकती है। अगर माता-पिता बिना उसकी बात सुने उसे डांटने लगते हैं, तो बच्चा खुद को अनसुना महसूस कर सकता है।इसलिए जब बच्चा नाराज हो, तो उसे अपनी बात कहने का मौका दें। उससे प्यार से पूछें कि उसे किस बात से परेशानी हुई। उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें और उसे बताएं कि नाराज होना गलत नहीं है, लेकिन गुस्से में किसी को चोट पहुंचाना सही नहीं है।
4. घर में शांत और सकारात्मक माहौल बनाए रखें
बच्चे अपने आसपास के लोगों को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। अगर घर में अक्सर तेज आवाज में बहस होती है या छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा किया जाता है, तो बच्चा भी इसी तरह प्रतिक्रिया देना सीख सकता है।इसलिए माता-पिता को अपने व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए। असहमति होने पर शांत तरीके से बात करें और बच्चे के सामने समस्याओं को सुलझाने का सकारात्मक उदाहरण पेश करें। घर में बातचीत, सम्मान और सहयोग का माहौल बच्चे के भावनात्मक विकास में मदद कर सकता है।
5. बच्चे के गुस्से के पीछे की वजह समझें
हर बार बच्चे के गुस्से को जिद समझना सही नहीं है। कई बार भूख, नींद की कमी, थकान, ज्यादा शोर या दिनचर्या में बदलाव के कारण भी बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है।अगर बच्चा अक्सर एक ही परिस्थिति में गुस्सा करता है, तो ध्यान दें कि उस समय क्या हो रहा होता है। उदाहरण के लिए, अगर वह स्कूल से लौटने के बाद चिड़चिड़ा रहता है, तो हो सकता है कि उसे आराम या कुछ समय अकेले बिताने की जरूरत हो।बच्चे के व्यवहार के पीछे की वजह समझने से माता-पिता उसके लिए बेहतर तरीका अपना सकते हैं।
6. अच्छे व्यवहार की तारीफ करना न भूलें
बच्चे को सिर्फ गलतियों पर टोकने के बजाय उसके अच्छे व्यवहार की तारीफ करना भी जरूरी है। जब बच्चा गुस्सा आने पर चिल्लाने के बजाय शांति से अपनी बात कहता है या किसी परेशानी को बातचीत से सुलझाने की कोशिश करता है, तो उसकी सराहना करें।आप उससे कह सकते हैं, “तुमने आज अपनी बात बहुत अच्छे तरीके से समझाई।” इस तरह की सकारात्मक प्रतिक्रिया बच्चे को समझने में मदद करती है कि अपनी भावनाओं को शांत तरीके से व्यक्त करना एक अच्छी आदत है।
7. बच्चे के साथ रोज बिताएं थोड़ा खास समय
कई बार बच्चों को माता-पिता के साथ समय बिताने, बातचीत करने और अपनी बातें साझा करने की जरूरत होती है। अगर बच्चा खुद को अनदेखा महसूस करता है, तो कुछ परिस्थितियों में वह जिद या गुस्से के जरिए ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर सकता है।इसलिए रोज कुछ समय बच्चे के साथ बिना मोबाइल या टीवी के बिताएं। उसके साथ खेलें, कहानी पढ़ें या दिनभर की बातें पूछें। इससे बच्चे को अपनी भावनाएं साझा करने का मौका मिलेगा और माता-पिता के साथ उसका जुड़ाव भी मजबूत हो सकता है।
बच्चे का गुस्सा शांत करने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
• बच्चे के गुस्से के समय खुद शांत रहने की कोशिश करें।
• मारने, चिल्लाने या चीजें फेंकने पर स्पष्ट और शांत तरीके से सीमा तय करें।
• बच्चे की बात बीच में काटने के बजाय उसे पूरा सुनें।
• अच्छे व्यवहार और शांत तरीके से बात करने पर उसकी तारीफ करें।
• हर गलती पर सजा देने के बजाय सही व्यवहार करना सिखाएं।
• बच्चे के साथ रोज कुछ समय बिना स्क्रीन के बिताएं।
• पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या और आराम का ध्यान रखें।
कब बच्चे के व्यवहार को गंभीरता से लेना चाहिए?
बच्चों में कभी-कभी गुस्सा करना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर आक्रामक व्यवहार लंबे समय तक बना रहे, घर या स्कूल में लगातार परेशानी पैदा करे या बच्चा खुद को अथवा दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।ऐसी स्थिति में बाल रोग विशेषज्ञ या बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। सही समय पर मदद मिलने से बच्चे की भावनात्मक जरूरतों को समझने और उसके व्यवहार को बेहतर तरीके से संभालने में सहायता मिल सकती है।












