अफसरों की पत्नियों से अवैध संबंध के आरोप में मेजर पर बर्खास्तगी की तलवार, AFT ने राहत देने से किया इनकार, पूर्व पत्नी की शिकायत से खुली थी पोल
सेना के एक मेजर पर चार महिलाओं से संबंध रखने के आरोप हैं। AFT ने बर्खास्तगी की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार किया। जानें पूरा मामला।

नई दिल्ली। भारतीय सेना के एक मेजर को रसिकमिजाजी भारी पड़ने वाली है। कई महिलाओं के साथ गंभीर आरोपों के बाद उनकी सेवा से बर्खास्तगी तय हो गयी है। आरोप है कि अधिकारी के साथी अफसरों की पत्नियों समेत चार महिलाओं के साथ संबंध थे। इसके अलावा उन पर नशाखोरी और परिवार की अनदेखी करने के आरोप भी लगाए गए हैं। सेना ने मामले में कोर्ट-मार्शल के बजाय प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू की है।
दरअसल मेजर ने इस कार्रवाई को रुकवाने के लिए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) की दिल्ली स्थित प्रिंसिपल बेंच का रुख किया था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने बर्खास्तगी की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। बेंच ने अधिकारी को निर्देश दिया कि वे कारण बताओ नोटिस के जवाब में ही अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं।
पत्नी की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामला अगस्त 2023 का है, जब मेजर की तत्कालीन पत्नी ने सेना मुख्यालय के अनुशासन एवं सतर्कता निदेशालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में अधिकारी पर व्यभिचार, नशाखोरी और परिवार की उपेक्षा करने के आरोप लगाए गए थे।
शिकायत में दावा किया गया था कि मेजर के चार महिलाओं के साथ संबंध थे। इनमें दो महिलाएं सेना में तैनात उनके साथी अधिकारियों की पत्नियां बताई गई थीं। शिकायत के बाद अक्टूबर 2023 में 55 (I) मैकेनाइज्ड ब्रिगेड मुख्यालय ने मामले की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की।
कोर्ट-मार्शल के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता
सेना ने 10 अगस्त को आर्मी रूल्स के नियम 19 और 14 के तहत मेजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में अधिकारी से पूछा गया कि मौजूदा परिस्थितियों में कोर्ट-मार्शल की प्रक्रिया व्यावहारिक नहीं होने के कारण उन्हें सीधे सेवा से बर्खास्त क्यों न किया जाए।
इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए मेजर ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की और प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।जस्टिस राजेंद्र मेनन और लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती की पीठ ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अधिकारी अपनी आपत्तियां कारण बताओ नोटिस के जवाब में प्रस्तुत कर सकते हैं।
जांच रिपोर्ट और सुनवाई के दस्तावेज देने का निर्देश
हालांकि, ट्रिब्यूनल ने सेना को निर्देश दिया कि मेजर को कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की जांच रिपोर्ट और चार्ज हियरिंग की कार्यवाही से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। अधिकारी लंबे समय से इन दस्तावेजों की मांग कर रहे थे।इस निर्देश से अधिकारी को अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों और जांच प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड देखने का अवसर मिलेगा।
बर्खास्तगी पर अंतिम फैसला अभी बाकी
आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल ने फिलहाल सेना की प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई है। मेजर को कारण बताओ नोटिस का जवाब देना होगा, जिसके बाद मामले में आगे की प्रक्रिया तय होगी।फिलहाल बर्खास्तगी की प्रक्रिया जारी है। अधिकारी पर लगाए गए आरोप शिकायत और जांच से जुड़े दावे हैं; अंतिम कार्रवाई का परिणाम संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।












