झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: लेडी सुपरवाइजर के अभ्यर्थियों को 6 सप्ताह में नियुक्ति का आदेश, NCL-EWS प्रमाणपत्र पर मिली राहत
Jharkhand High Court ने लेडी सुपरवाइजर भर्ती में NCL-EWS प्रमाणपत्र विवाद पर अभ्यर्थियों को राहत दी। शो-कॉज नोटिस रद्द, 6 सप्ताह में नियुक्ति का आदेश।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। लेडी सुपरवाइजर भर्ती मामले में अभ्यर्थियों को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब भर्ती विज्ञापन में नॉन क्रीमी लेयर (NCL) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के प्रमाणपत्र आवेदन की अंतिम तारीख से पहले जारी होने की अनिवार्य शर्त नहीं थी, तो केवल प्रमाणपत्र बाद में जारी होने के आधार पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने संबंधित अभ्यर्थियों को जारी कारण बताओ नोटिस रद्द करते हुए छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।इस फैसले के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की लेडी सुपरवाइजर भर्ती में प्रभावित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। मामले में अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता अर्पण मिश्रा ने अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी की।
JSSC ने 444 पदों पर निकाली थी भर्ती
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने विज्ञापन संख्या 14/2023 के तहत लेडी सुपरवाइजर के 444 पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 2 अक्टूबर 2023 निर्धारित थी।
भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को 27 मई 2025 को दस्तावेज सत्यापन के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके बाद आयोग ने 14 अगस्त 2025 को परिणाम जारी किया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को भी सफल घोषित किया गया था।हालांकि, दस्तावेज सत्यापन के दौरान जमा किए गए NCL और EWS प्रमाणपत्रों की जारी होने की तारीख को लेकर उनकी नियुक्ति पर विवाद खड़ा हो गया।
प्रमाणपत्र बाद में बने तो जारी कर दिया शो-कॉज नोटिस
दस्तावेज सत्यापन के दौरान अभ्यर्थियों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के NCL/EWS प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे। बाद में राज्य सरकार ने प्रमाणपत्र आवेदन की अंतिम तारीख के बाद जारी होने का हवाला देते हुए 25 मई 2026 को संबंधित अभ्यर्थियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए।
इससे उनकी नियुक्ति अटक गई। इसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि भर्ती विज्ञापन और नियुक्ति नियमों में ऐसी कोई स्पष्ट शर्त नहीं थी कि NCL या EWS प्रमाणपत्र आवेदन की अंतिम तारीख से पहले ही जारी होना चाहिए।
विज्ञापन में नहीं थी प्रमाणपत्र की तारीख को लेकर स्पष्ट शर्त
हाईकोर्ट ने भर्ती विज्ञापन की शर्तों का अध्ययन करने के बाद कहा कि आवेदन की अंतिम तारीख तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करना आवश्यक था। लेडी सुपरवाइजर पद के लिए समाजशास्त्र, मनोविज्ञान या गृह विज्ञान में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक होना जरूरी था।
लेकिन NCL और EWS प्रमाणपत्र भी आवेदन की अंतिम तारीख तक जारी होना अनिवार्य है, ऐसा स्पष्ट प्रावधान विज्ञापन में नहीं था। विज्ञापन में दस्तावेज सत्यापन के समय आवश्यक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने का प्रावधान किया गया था।अदालत ने माना कि भर्ती विज्ञापन या लागू नियमों में स्पष्ट शर्त नहीं होने पर केवल विभागीय पत्राचार के आधार पर अभ्यर्थियों के अधिकार सीमित नहीं किए जा सकते।
विभागीय सर्कुलर के आधार पर नियुक्ति रोकना उचित नहीं
राज्य सरकार ने अपने पक्ष में वर्ष 2019 के विभागीय पत्र और सर्कुलर का हवाला दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि विभागों के बीच जारी पत्राचार के आधार पर ऐसी अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती, जिसका उल्लेख भर्ती विज्ञापन या लागू नियमों में नहीं है।
अदालत ने पुराने न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया और कहा कि उन मामलों की परिस्थितियां अलग थीं, क्योंकि उनमें प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख को लेकर स्पष्ट शर्तें मौजूद थीं।हाईकोर्ट के अनुसार, मौजूदा मामले में ऐसी शर्त के अभाव में प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख को नियुक्ति रोकने का आधार बनाना उचित नहीं था।
सभी संबंधित शो-कॉज नोटिस रद्द, 6 सप्ताह में नियुक्ति
हाईकोर्ट ने 25 मई 2026 को जारी संबंधित कारण बताओ नोटिस रद्द कर दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार और JSSC को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को NCL/EWS अभ्यर्थी मानते हुए संबंधित आरक्षित रिक्तियों पर नियुक्त किया जाए।
अदालत ने नियुक्ति से संबंधित आवश्यक आदेश छह सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है।इस फैसले से लेडी सुपरवाइजर भर्ती में प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख के कारण प्रभावित हुए अभ्यर्थियों को राहत मिली है। अब राज्य सरकार और JSSC को हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार निर्धारित समय-सीमा में आगे की कार्रवाई करनी होगी।












