हजारीबाग की ‘हाई सिक्योरिटी’ जेल ब्रेक कांड: ग्रिल काटकर 3 कैदी फरार, 24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली; 2 हेड वार्डन सस्पेंड 18जवान ….
Hazaribagh's 'high security' jailbreak: 3 inmates escape by cutting through the grill, police remain empty-handed even after 24 hours; 2 head wardens suspended

हजारीबाग:झारखंड की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (JP Jail) की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। यहाँ से तीन सजायाफ्ता कैदियों के फरार होने के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस और प्रशासन के हाथ खाली हैं। इस गंभीर लापरवाही के चलते जेल प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से दो हेड वार्डन को सस्पेंड कर दिया है, जबकि 18 अन्य जवानों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
कैसे हुई यह बड़ी घटना?
जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन द्वारा लोहसिंघना थाना में दर्ज प्राथमिकी (संख्या 196/2025) और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार:
- कैदियों ने बैरक नंबर 6 की खिड़की नंबर 4 के ग्रिल को काटा।
- घटना को रात के 1:36 से 2:45 बजे के बीच अंजाम दिया गया।
- कैदियों ने घने कोहरे, अंधेरे और रात में बिजली गुल होने का फायदा उठाया।
- फरार होने वाले तीनों कैदी इसी वार्ड में बंद थे।
लापरवाही पर एक्शन: 2 हेड वार्डन सस्पेंड
जेल प्रशासन की प्रारंभिक जांच में घोर लापरवाही सामने आई है। जिस वक्त यह घटना हुई, वार्ड नंबर 4 में हेड वार्डन हरेंद्र महतो और उमेश सिंह की ड्यूटी थी। आरोप है कि इनकी लापरवाही के कारण ही कैदी घंटों ग्रिल काटते रहे और भागने में सफल रहे। जेल अधीक्षक सीपी सुमन ने दोनों को निलंबित (Suspend) कर दिया है। इसके अलावा, सुरक्षा में तैनात 18 जवानों पर भी कार्रवाई की तैयारी है।
मास्टरमाइंड है ‘देवा भुईया’: पहले भी जेल तोड़कर भाग चुका है
फरार कैदियों में सबसे खतरनाक देवा भुईया है, जो इस फरारी का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
- इतिहास: देवा 2021 में धनबाद जेल की शौचालय की खिड़की तोड़कर भाग चुका था और साढ़े तीन साल बाद पकड़ा गया था। वह हजारीबाग के रास्तों से अच्छी तरह वाकिफ है। उस पर गैंग रेप समेत दर्जन भर गंभीर मामले दर्ज हैं।
- अन्य दो कैदी: दूसरा कैदी जीतेंद्र रवानी (22 साल की सजा, पोक्सो एक्ट) और तीसरा राहुल रजवार (उम्रकैद, पोक्सो एक्ट) है। जीतेंद्र पहले धनबाद जेल में खुदकुशी की कोशिश भी कर चुका है।
SIT का गठन, 5 टीमें कर रहीं छापेमारी
घटना के बाद हजारीबाग एसपी ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस की 5 अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
- एक टीम बिहार भेजी गई है।
- बाकी टीमें धनबाद और रांची में दबिश दे रही हैं।
- फोरेंसिक टीम कॉल डिटेल्स खंगाल रही है ताकि मददगारों का पता लगाया जा सके।
जैप-7 के डीएसपी राजेंद्र कुमार ने भी जेल पहुंचकर सुरक्षा समीक्षा की है, लेकिन सवाल अब भी वही है कि इतनी हाई सिक्योरिटी जेल से कैदी ग्रिल काटने का सामान लेकर अंदर कैसे पहुंचे और भागने में सफल कैसे हुए?








