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झारखंड विमान हादसा – डोली से पहले पायलट विवेक की उठी अर्थी, 27 को आने वाले थे छुट्टी पर, लेकिन आयी मौत की खबर, रांची में पढ़ाई, साउथ अफ्रीका में ट्रेनिंग….

Jharkhand- Pilot Vivek's bier was taken out before the doli, he was supposed to come on leave on 27th, but news of his death came, studies in Ranchi, training in South Africa...

Pilot Vikas Bhagat/24.2.26 : चतरा विमान हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई सपनों के टूटने की दर्दनाक कहानी बन गया। इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले युवा पायलट विवेक विकास भगत की मौत ने लातेहार जिले के छोटे से लूटी गांव को शोक में डुबो दिया है। गांव की गलियों में पसरी खामोशी, हर घर में छलकते आंसू और हर चेहरे पर उभरी पीड़ा इस बात की गवाही दे रही है कि गांव ने अपना एक होनहार बेटा खो दिया।

26 वर्षीय विवेक विकास भगत, इंजीनियर देवसहाय भगत के इकलौते पुत्र थे। उनके पिता वर्तमान में चतरा जिले के ग्रामीण कार्य विभाग में कार्यपालक अभियंता के रूप में कार्यरत हैं। जैसे ही रात में यह खबर गांव पहुंची कि एयर एंबुलेंस क्रैश में विवेक अब इस दुनिया में नहीं रहे, पूरा गांव स्तब्ध रह गया। लोगों को मानो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जो युवक कल तक आसमान में उड़ान भर रहा था, वह आज हमेशा के लिए खामोश हो गया।

बताया जाता है कि विवेक बचपन से ही असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रांची के सेंट थॉमस स्कूल से हुई। आसमान में उड़ने का सपना उन्होंने बहुत पहले देख लिया था, और उसी सपने को सच करने के लिए उन्होंने कठिन परिश्रम किया। पहले कानपुर में पायलट ट्रेनिंग ली, फिर प्रशिक्षण के लिए साउथ अफ्रीका तक का सफर तय किया। वर्ष 2022 में उन्होंने एक निजी एविएशन कंपनी जॉइन की और अपनी मेहनत व लगन के दम पर छह माह पहले ही कैप्टन के पद पर पदोन्नति पाई।

परिजनों के अनुसार, विवेक केवल एक कुशल पायलट ही नहीं, बल्कि बेहद मिलनसार और व्यवहार कुशल इंसान भी थे। गांव के लोग बताते हैं कि पायलट बनने के बाद भी उनमें जरा सा भी घमंड नहीं था। वे जब भी गांव आते, हर किसी से आत्मीयता से मिलते, बुजुर्गों का हालचाल पूछते और बच्चों के साथ हंसते-खेलते नजर आते।

हादसे ने एक परिवार ही नहीं, पूरे समाज को गहरा आघात पहुंचाया है। विवेक के पिता देवसहाय भगत पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिन आंखों में बेटे की सफलता और शादी के सपने थे, आज वहीं आंखें नम हैं। गांव के लोग भावुक होकर बताते हैं कि पिता का सपना था कि बेटे का विवाह धूमधाम से करें, पर नियति को कुछ और ही मंजूर था।

विवेक के असमय निधन से न केवल परिवार, बल्कि मित्रों और परिचितों में भी शोक की लहर है। बताया गया कि वे जल्द ही एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे। किसे पता था कि यह इंतजार हमेशा के लिए अधूरा रह जाएगा।

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