झारखंड में फर्जी प्रमाण-पत्र पर लगेगी रोक, झारखंड में नई SOP लागू; संदिग्ध दस्तावेजों पर FIR तक का प्रावधान, जानिये पूरा एसओपी, क्या है अब नया प्रावधान
Crackdown on fake certificates in Jharkhand; new SOP implemented—including provisions for filing FIRs over suspicious documents. Here are the details of the new SOP and the updated regulations.

रांची। झारखंड में फर्जी दाखिले पर लगाम लगाने की कोशिश शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत सरकारी और निजी मेडिकल, डेंटल और आयुष कॉलेजों में NEET UG/PG के जरिए होने वाले नामांकन से हुई है, जहां फर्जी प्रमाण-पत्र के इस्तेमाल पर अब सख्ती होगी। राज्य सरकार ने नामांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और गलत दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश की संभावना को खत्म करने के लिए नई Standard Operating Procedure (SOP) लागू की है।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी विभागीय संकल्प ज्ञापांक 472(9) के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है। नई SOP में अभ्यर्थियों के स्थानीय निवास, जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाण-पत्र का ऑनलाइन और जरूरत पड़ने पर भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है।
ऑनलाइन सत्यापन के बाद होगी भौतिक जांच
नई व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों का सत्यापन झारखंड सरकार के संबंधित ऑनलाइन पोर्टल से किया जाएगा। यदि ऑनलाइन जांच के दौरान किसी प्रमाण-पत्र में कोई विसंगति या संदेह सामने आता है तो उसे आगे की जांच के लिए संबंधित जिले के उपायुक्त को भेजा जाएगा।जिला प्रशासन ऐसे प्रमाण-पत्रों का भौतिक सत्यापन करेगा और जांच रिपोर्ट संबंधित प्राधिकारी को 10 कार्य दिवसों के भीतर उपलब्ध कराएगा।
जांच पूरी होने तक मिलेगा औपबंधिक नामांकन
संदिग्ध प्रमाण-पत्रों की जांच पूरी होने तक अभ्यर्थी को केवल औपबंधिक नामांकन (Provisional Admission) दिया जाएगा।यानी ऑनलाइन या भौतिक सत्यापन पूरा होने से पहले नामांकन को अंतिम नहीं माना जाएगा। प्रमाण-पत्र सही पाए जाने के बाद ही अभ्यर्थी का अंतिम नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा।
फर्जी प्रमाण-पत्र मिला तो नामांकन तत्काल रद्द
सरकार ने नई SOP में कार्रवाई को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किया है। यदि जांच में किसी अभ्यर्थी का प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है, तो संबंधित कॉलेज के प्राचार्य द्वारा उसका नामांकन तत्काल रद्द किया जाएगा।
इसके साथ ही संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ FIR दर्ज कराकर विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।इस व्यवस्था का असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जो आरक्षण, स्थानीय निवासी, आय या दिव्यांगता जैसी श्रेणियों का लाभ लेने के लिए गलत या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने की कोशिश करते हैं।
NEET Admission के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय समितियां
प्रमाण-पत्रों की जांच और नामांकन प्रक्रिया की निगरानी के लिए झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) के स्तर पर अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए समितियां गठित की गई हैं।
MBBS/MD/MS के लिए समिति
• नामांकन प्रभारी, RIMS रांची — सदस्य
• नामांकन प्रभारी, सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज — सदस्य
• स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग का प्रतिनिधि — सदस्य
• विशेष कार्य पदाधिकारी, JCECEB — सदस्य सचिव
BDS/MDS के लिए समिति
• नामांकन प्रभारी, RIMS रांची — सदस्य
• नामांकन प्रभारी, सभी सरकारी डेंटल कॉलेज — सदस्य
• विशेष कार्य पदाधिकारी, JCECEB — सदस्य सचिव
आयुष/बीएचएमएस के लिए समिति
• नामांकन प्रभारी, सभी सरकारी आयुष कॉलेज — सदस्य
• विशेष कार्य पदाधिकारी, JCECEB — सदस्य सचिव
कॉलेज स्तर पर भी होगी मूल दस्तावेजों की जांच
राज्य स्तरीय जांच के अलावा RIMS रांची और राज्य के संबंधित मेडिकल कॉलेजों में संस्थान स्तर पर भी समिति गठित की गई है। यह समिति अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण-पत्रों की दोबारा जांच करेगी।
इस समिति में—
• निदेशक/प्राचार्य/डीन — अध्यक्ष
• अधीक्षक — सदस्य
• नामांकन प्रभारी — सदस्य सचिव शामिल होंगे।
इससे अभ्यर्थी के दस्तावेजों की केवल एक स्तर पर नहीं, बल्कि संस्थान स्तर पर भी जांच सुनिश्चित की जाएगी।
डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे जाएंगे
नामांकन के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा जमा किए गए सभी डिजिटल और भौतिक अभिलेख सुरक्षित रखे जाएंगे। इसका उद्देश्य भविष्य में जरूरत पड़ने पर किसी भी अभ्यर्थी के प्रमाण-पत्रों की दोबारा जांच करने की सुविधा उपलब्ध रखना है।यानी नामांकन के बाद भी दस्तावेजों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और किसी शिकायत या संदेह की स्थिति में दोबारा सत्यापन किया जा सकेगा।
इन कॉलेजों में तत्काल लागू होगी SOP
सरकार की यह नई व्यवस्था RIMS रांची समेत राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल, डेंटल, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी महाविद्यालयों में तत्काल प्रभाव से लागू होगी।नई SOP के जरिए सरकार ने NEET UG/PG नामांकन प्रक्रिया में प्रमाण-पत्रों की जांच को कई स्तरों पर मजबूत किया है। खासतौर पर जाति, आय, स्थानीय निवास और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों के सत्यापन की व्यवस्था से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरक्षण या अन्य लाभ लेकर नामांकन लेने की कोशिशों पर रोक लगाने का लक्ष्य है।
एक नजर में नई व्यवस्था
फर्जी प्रमाण-पत्र मिला → नामांकन रद्द → FIR → कानूनी कार्रवाई
संदिग्ध प्रमाण-पत्र मिला → जिला उपायुक्त को भेजा जाएगा → 10 कार्य दिवस में भौतिक सत्यापन → रिपोर्ट के बाद अंतिम नामांकन।












