JPSC-JSSC परीक्षा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, PGTTCE-2023 की जांच का मुद्दा भी उठा, 5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
JPSC-JSSC Exam Scam: Hearing held in the Supreme Court; the issue of the PGTTCE-2023 investigation was also raised; next hearing scheduled for October 5.

नई दिल्ली। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में कथित गड़बड़ी और अनियमितता का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। परीक्षा में गड़बड़ी की CBI जांच की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
दरअसल याचिका हरिशरण देवनाथ की ओर से दाखिल की गई है।मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति बी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े अन्य पक्षों की ओर से भी विभिन्न आवेदन और हस्तक्षेप याचिकाएं अदालत के समक्ष रखी गईं।
PGTTCE-2023 को लेकर भी हस्तक्षेप आवेदन
इसी मामले में कोशीलाल प्रसाद एवं अन्य की ओर से PGTTCE-2023 परीक्षा में कथित सिस्टम हैकिंग और नियोजन प्राप्त करने के लिए परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों से संबंधित एक हस्तक्षेप आवेदन (I.A.) भी दाखिल किया गया है।
मामले से जुड़े पक्षकारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता अभिषेक राय, आकृती श्री और समीर रंजन (AoR-वात्सल्य विज्ञा) उपस्थित रहे।हस्तक्षेप आवेदन में PGTTCE-2023 परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच का मुद्दा उठाया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना अभी बाकी है।
सरकार के 17 अगस्त के फैसले पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत के समक्ष दावा किया गया कि PGTTCE-2023 में कथित अनियमितताएं गंभीर प्रकृति की हैं। उनका आरोप है कि झारखंड सरकार की ओर से 17 अगस्त 2026 को JPSC और JSSC से जुड़ी कथित धांधली के संबंध में लिए गए फैसलों में PGT परीक्षा को रद्द नहीं किया गया और न ही इसे जांच के दायरे में शामिल किया गया।
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से इस मुद्दे को भी अदालत के समक्ष उठाया गया। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में क्या रुख रखा गया, इसका अंतिम आकलन सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और आदेश के आधार पर ही किया जाएगा।
अभय कुमार तिवारी को लेकर भी दावे
मामले में अभय कुमार तिवारी का नाम भी सामने आया है। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से दावा किया गया कि उन्हें JPSC-JSSC से जुड़े कथित घोटाले का मास्टरमाइंड माना जाता है और उनका संबंध PGTTCE-2023 से भी है।
याचिका पक्ष ने यह भी दावा किया कि उन्होंने स्वयं कथित अनियमितताओं से संबंधित जानकारी सामने रखी है।इन दावों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों और अदालत द्वारा स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की ओर से भी हस्तक्षेप याचिका
सुप्रीम कोर्ट में JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की ओर से भी दो हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन आवेदनों के जरिए आयोगों की परीक्षा प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं को अदालत के समक्ष रखने की कोशिश की गई है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित याचिकाओं और हस्तक्षेप आवेदनों पर आगे की कार्यवाही होगी। झारखंड के प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की नजर अब 5 अक्टूबर की सुनवाई पर है।










