झारखंड सरकार बंगाल पुलिस को क्यों देगी 1 करोड़? खूंखार नक्सली असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद सामने आया इनाम का पूरा खेल
असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद बड़ा सवाल उठ रहा है कि झारखंड सरकार बंगाल पुलिस को 1 करोड़ रुपये क्यों देगी? जानिए इनाम की राशि और गिरफ्तारी से जुड़ा पूरा मामला।

रांची। आमतौर पर सरकार पुलिस को अपराधियों की गिरफ्तारी पर इनाम देती है, लेकिन झारखंड में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक राज्य की सरकार दूसरे राज्य की पुलिस को एक करोड़ रुपये देने जा रही है। सवाल है कि आखिर झारखंड सरकार बंगाल पुलिस को यह रकम क्यों देगी? दरअसल, यह रकम किसी नई योजना या सहायता के तहत नहीं, बल्कि एक करोड़ रुपये के उस इनाम की राशि है, जो झारखंड सरकार ने कुख्यात माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश के खिलाफ घोषित कर रखी थी।
असीम मंडल को कोलकाता पुलिस की STF ने पूर्व मेदिनीपुर से गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ झारखंड के अलावा ओडिशा में भी इनाम घोषित था। दोनों राज्यों की घोषित इनामी राशि मिलाकर 2.20 करोड़ रुपये थी।
जिस पर झारखंड ने रखा था 1 करोड़ का इनाम, उसे बंगाल पुलिस ने पकड़ा
असीम मंडल उर्फ आकाश CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य समिति-1 का सचिव बताया गया है। झारखंड पुलिस की आधिकारिक सूची में उसके नाम के सामने 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार दर्ज है। कोलकाता पुलिस STF ने 17 सितंबर को उसे पूर्व मेदिनीपुर के पटाशपुर इलाके से पकड़ा। रिपोर्टों के अनुसार वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचता रहा था और गिरफ्तारी के समय आम व्यक्ति की तरह वहां रह रहा था।
अब झारखंड सरकार देगी बंगाल पुलिस को 1 करोड़
असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद सबसे दिलचस्प पहलू इनाम की राशि से जुड़ा है। नियम के मुताबिक जिस राज्य की पुलिस इनामी आरोपी को पकड़ती है, निर्धारित प्रक्रिया के तहत इनाम की राशि गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम को दी जाती है।
इसी प्रक्रिया के तहत बंगाल पुलिस की ओर से झारखंड पुलिस को पत्र भेजे जाने के बाद झारखंड सरकार से एक करोड़ रुपये की इनामी राशि बंगाल पुलिस को देने की अनुशंसा की जाएगी। ओडिशा सरकार की ओर से भी उसके हिस्से की 1.20 करोड़ रुपये की इनामी राशि इसी प्रक्रिया के तहत दिए जाने की बात सामने आई है।यानी जिस आरोपी की तलाश झारखंड और ओडिशा की सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से कर रही थीं, उसे पकड़ने पर इनाम की रकम भी उसी पुलिस टीम को मिलेगी जिसने गिरफ्तारी की।
सारंडा से बंगाल तक रहा सक्रिय
असीम मंडल मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया जाता है। उसका माओवादी गतिविधियों से जुड़ाव काफी पुराना रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह 1980 के दशक में छात्र जीवन के दौरान माओवादी आंदोलन से जुड़ा और बाद में संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालता गया।
वर्ष 2011 में माओवादी नेता किशनजी के मारे जाने के बाद बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रमुख नेताओं में उसका नाम सामने आया। बाद में वह CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति तक पहुंचा। झारखंड के सारंडा और आसपास के इलाकों में भी उसकी सक्रियता रही। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में थीं।
तीन राज्यों में करीब 55 मामले
पुलिस रिकॉर्ड और रिपोर्टों के अनुसार असीम मंडल के खिलाफ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में करीब 55 मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वह लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देता रहा।गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पुराने संपर्कों, संगठन से जुड़े नेटवर्क और संभावित ठिकानों की भी पड़ताल कर रही है। उसके गांव और आसपास के इलाकों में हथियारों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
झारखंड के लिए क्यों अहम है यह गिरफ्तारी?
असीम मंडल उन बड़े माओवादी नेताओं में शामिल रहा, जिन पर झारखंड सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था। झारखंड पुलिस की मौजूदा सूची में भी उसका नाम एक करोड़ के इनामी माओवादी के तौर पर दर्ज था। इसलिए उसकी गिरफ्तारी का असर सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं माना जा रहा।
झारखंड के सारंडा और सीमावर्ती इलाकों में उसकी पुरानी सक्रियता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसके संपर्कों और नेटवर्क की जानकारी जुटाना भी महत्वपूर्ण जांच बिंदु है। यानी कहानी सिर्फ एक बड़े माओवादी की गिरफ्तारी की नहीं है—यह उस एक करोड़ रुपये की भी है, जिसे अब झारखंड सरकार उस राज्य की पुलिस को देगी, जहां जाकर लंबे समय से वांछित आरोपी पकड़ा गया।
पत्नी को 2010 में किया गया था गिरफ्तार
जांच अधिकारियों ने बताया कि असीम मंडल की पत्नी पटाशपुर क्षेत्र की रहने वाली है और कथित तौर पर सीपीआई (माओवादी) की कार्यकर्ता है। उसे कोलकाता पुलिस एसटीएफ ने वर्ष 2010 में गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। असीम मंडल सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य समिति-I का सचिव बताया जाता है। वो करीब चार दशक से अधिक समय से पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों से बचता रहा था। माओवादी साहित्य और इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरण











