रांची में CCTV व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, फुटेज नहीं मिलने पर गृह सचिव और DGP को तलब किया, 12 अक्टूबर को होगी अब अगली सुनवाई
रांची के डोरंडा थाना से जुड़े कथित अवैध हिरासत मामले में CCTV फुटेज पेश नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट नाराज हुआ। गृह सचिव और DGP को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से तलब किया गया।

रांची। CCTV को लेकर हाईकोर्ट का एक बार फिर सख्त देखने को मिला है। झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा थाना पुलिस से जुड़े एक कथित अवैध हिरासत मामले की सुनवाई के दौरान CCTV फुटेज पेश नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट के निर्देश के बावजूद डोरंडा थाना प्रभारी घटना से संबंधित फुटेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके।
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने अब राजधानी रांची में CCTV कैमरों की कार्यशीलता को लेकर पुलिस-प्रशासन से जवाब मांगा है।अदालत ने गृह सचिव और डीजीपी को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
थानों के CCTV को लेकर कोर्ट ने मांगी स्थिति रिपोर्ट
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर प्रसाद और अधिवक्ता आयुषी अमन ने पक्ष रखा।सुनवाई के दौरान डोरंडा थाना प्रभारी सशरीर अदालत में मौजूद रहे। कोर्ट ने कहा कि राजधानी की सड़कों, प्रमुख चौक-चौराहों व जिले के सभी थानों में लगे CCTV कैमरों की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट पेश की जाए।
कोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में अब तक उपलब्ध नहीं होने को अदालत ने गंभीरता से लेते हुए अब गृह विभाग और पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से जवाब मांगा है भी दर्ज नहीं की गई थी। बाद में उसकीौराहों और पुलिस थानों में लगे CCTV कैमरों का फंक्शनल रहना बेहद जरूरी है।
अदालत ने यह भी याद दिलाया कि रांची के एसएसपी को पहले निर्देश दिया गया था कि जिले के सभी थानों में लगे CCTV कैमरों की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में अब तक कोई अद्यतन जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।CCTV फुटेज के उपलब्ध नहीं होने को अदालत ने गंभीरता से लेते हुए अब गृह विभाग और पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से जवाब मांगा है।
बच्चे को अवैध हिरासत में रखने का आरोप
यह मामला प्रार्थी फिरोज अंसारी एवं अन्य की ओर से दाखिल हेवियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके पुत्र को 4 सितंबर 2026 से डोरंडा थाना में कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था।याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उस समय बच्चे के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की गई थी। बाद में उसकी उम्र को लेकर भी विवाद सामने आया।
उम्र 17 साल होने का दावा
कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार बच्चे की जन्मतिथि 21 अप्रैल 2009 है। इस आधार पर 4 सितंबर 2026 को उसकी उम्र करीब 17 वर्ष बताई गई है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि उसकी उम्र 19 वर्ष बताते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उम्र के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड की प्रति भी अदालत के समक्ष पेश की गई।
CCTV फुटेज नहीं मिलने से बढ़ी अधिकारियों की जवाबदेही
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने घटना से संबंधित CCTV फुटेज पेश करने का निर्देश डोरंडा थाना गृह सचिव और डीजीपी की मौजूदगी में इस संबंध के डोरंडा थाना से जुड़े कथित अवैध हिरासत मामले में CCTV फुटेज पेश नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट नाराज हुआ। गृह सचिव और DGP को प्रभारी को दिया था। लेकिन फुटेज अदालत के सामने पेश नहीं हो सका।
इसके बाद कोर्ट ने सिर्फ संबंधित थाने की CCTV व्यवस्था ही नहीं, बल्कि पूरे रांची शहर में CCTV कैमरों के फंक्शनल होने की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। अब अगली सुनवाई में गृह सचिव और डीजीपी की मौजूदगी में इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।












