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भारत-वेस्टइंडीज मैच टिकट ब्लैक करने शातिरों ने लगाया गजब जुगाड़, मजदूर, कुली को लगवा दिया लाइन में, बाबूलाल मरांडी ने खोली पोल, पूछा, कैमरों में सब कैद, फिर भी पुलिस की आंखों पर पट्टी क्यों?

Cunning operators devised a clever scheme to scalp tickets for the India-West Indies match by getting laborers and porters to stand in the queue; Babulal Marandi exposed the racket, asking why the police turned a blind eye despite everything being captured on camera.

रांची में 9 अक्टूबर को होने वाले भारत-वेस्टइंडीज क्रिकेट मैच के टिकटों की कालाबाजारी खुलेआम चल रही है। दिहाड़ी मजदूरों, रेजा-कुलियों और गरीब मजदूरों को लाइन में खड़ा कर टिकट खरीदवाए जा रहे हैं और फिर वही टिकट दोगुने-तिगुने दाम पर बेचे जा रहे हैं।

 

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लानत है ऐसी व्यवस्था पर, जहाँ कैमरे में सबकुछ कैद है, मीडिया में खबरें छप रही हैं, फिर भी रांची पुलिस की आँखों पर पट्टी बंधी है। लगता है बालू की अवैध कमाई में व्यस्त पुलिस को अब टिकटों की कालाबाजारी भी “सामान्य कारोबार” लगने लगी है।

 

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@HemantSorenJMM जी, राजधानी रांची में आपकी नाक के नीचे यह खुली लूट चल रही है और सरकार मौन है। सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बालू की काली कमाई की तरह टिकटों की कालाबाजारी का हिस्सा भी ऊपर तक पहुँच रहा है?

 

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यह खेल सिर्फ टिकटों की कालाबाजारी नहीं, बल्कि आम क्रिकेट प्रेमियों के हक पर डाका है। हजारों लोग, जो अपने बच्चों और परिवार के साथ मैच देखने का सपना लिए बैठे थे, इस संगठित लूट के कारण स्टेडियम से बाहर रह जाएंगे।

 

मुख्यमंत्री जी, अब भी समय है। संज्ञान लीजिए, दलालों पर कार्रवाई कीजिए और रांची पुलिस से पूछिए कि जब सबकुछ खुलेआम दिख रहा है, तो उन्हें दिखाई क्यों नहीं दे रहा?

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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