झारखंड-बस किराया दोगुना: ट्रेन में सीट नहीं, बस का किराया दोगुना; दिवाली-छठ पर घर जाएं तो कैसे जाएं? रांची से सफर हुआ महंगा
रांची में दिवाली और छठ पूजा से पहले ट्रेनों में कन्फर्म सीट की परेशानी बढ़ी। सिलीगुड़ी जाने वाली बसों का किराया 2,000 रुपये तक पहुंचा, बिहार के रूटों पर भी बढ़ सकती हैं कीमतें।

रांची। दीपावली के बाद अब हिंदूओं का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली व छठ आने वाला है। परदेस से लोग बड़ी संख्या में लोग दिवाली और छठ पूजा पर घर आते हैं। लेकिन, घर जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों की मुश्किलें अभी से बढ़ने लगी हैं। ट्रेनों में कन्फर्म सीट मिलना मुश्किल है, तो दूसरी ओर बसों का किराया भी आसमान छूने लगा है। राजधानी रांची से सिलीगुड़ी और कोलकाता जाने वाली बसों का किराया सामान्य दिनों की तुलना में करीब दोगुना तक पहुंच गया है। ऐसे में त्योहारों पर परिवार के साथ घर जाने की योजना बना रहे लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर जाएं तो जाएं कैसे?
त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ का असर अब बस सेवाओं पर भी साफ दिखने लगा है। कई बसों में सीटों की उपलब्धता बेहद कम रह गई है। ऑनलाइन बुकिंग में सीट नहीं मिलने पर यात्रियों को बस टर्मिनल पहुंचकर महंगे दाम पर टिकट खरीदना पड़ रहा है। वहीं, बस एजेंटों का कहना है कि छठ पूजा के नजदीक आने पर बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली बसों का किराया भी दोगुना तक हो सकता है।
सिलीगुड़ी जाने के लिए देने पड़ रहे 2,000 रुपये तक
रांची से सिलीगुड़ी जाने वाले यात्रियों को इस समय सबसे ज्यादा परेशानी किराये को लेकर हो रही है। सामान्य दिनों में इस रूट पर बस का किराया 900 से 1,200 रुपये के बीच रहता है, लेकिन त्योहारों की भीड़ के कारण अब एक सीट के लिए 1,850 से 2,000 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
यानी यात्रियों को सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 650 से 1,100 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। परिवार के तीन से चार सदस्यों के साथ सफर करने वालों के लिए यह खर्च और भी बढ़ जाता है।
बसों में बचीं सिर्फ दो से चार सीटें
रांची के बिरसा मुंडा बस टर्मिनल, खादगढ़ा से सिलीगुड़ी के लिए प्रतिदिन सात बसों का संचालन होता है। दुर्गा पूजा के दौरान इन बसों में यात्रियों की मांग काफी बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, अधिकांश बसों में केवल दो से चार सीटें ही खाली बच रही हैं।
सीटें कम होने और यात्रियों की संख्या बढ़ने से लोगों को अपनी पसंद के समय पर टिकट मिलना मुश्किल हो रहा है। कई सेवाओं में ऑफलाइन बुकिंग भी बंद होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में अंतिम समय में यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रेन में कन्फर्म सीट नहीं, बस भी राहत देने को तैयार नहीं
त्योहारों के दौरान घर जाने के लिए ट्रेन आमतौर पर यात्रियों की पहली पसंद होती है। लेकिन ट्रेनों में कन्फर्म सीट नहीं मिलने की स्थिति में लोग बसों का विकल्प तलाशते हैं। इस बार बसों में भी बढ़ती मांग और महंगे किराये ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है।
यात्रियों के सामने अब दोहरी परेशानी है। एक ओर ट्रेन में सीट मिलने की अनिश्चितता है, तो दूसरी ओर बस से सफर करने पर बजट बिगड़ने का खतरा। ऐसे में दिवाली और छठ पर घर जाने के लिए लोगों को पहले से टिकट की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
छठ पूजा के लिए अभी से शुरू हुई बुकिंग
दुर्गा पूजा के बाद अब छठ पूजा को लेकर भी बसों में सीटों की मांग बढ़ने लगी है। रांची से बिहार, उत्तर प्रदेश और दूसरे शहरों के लिए ऑनलाइन बुकिंग जारी है। पटना, मुजफ्फरपुर, नवादा, बिहारशरीफ, फतुहा, बनारस, हाजीपुर और छत्तीसगढ़ के बिलासपुर समेत कई शहरों के लिए यात्री टिकट बुक करा रहे हैं।
बस एजेंटों के अनुसार, त्योहारों में यात्रियों की संख्या बढ़ने से बस संचालकों के लिए यह कमाई का प्रमुख समय होता है। छठ के दौरान बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। ऐसे में इन रूटों पर भी किराये में बढ़ोतरी हो सकती है।
त्योहार पर घर जाने का बजट बिगड़ने की आशंका
दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर दूसरे शहरों में काम करने वाले लोग अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए घर लौटते हैं। लेकिन ट्रेन में सीटों की कमी और बसों के बढ़ते किराये के कारण यात्रा का खर्च बढ़ने लगा है।
खासतौर पर परिवार के साथ यात्रा करने वालों को टिकट पर सामान्य से अधिक रकम खर्च करनी पड़ सकती है। ऐसे में यात्रियों के लिए समय रहते बुकिंग कराना और अलग-अलग परिवहन विकल्पों की उपलब्धता जांचना जरूरी हो गया है।
कुल मिलाकर, रांची से त्योहारों में घर लौटना इस बार यात्रियों की जेब पर भारी पड़ सकता है। ट्रेन में कन्फर्म सीट की परेशानी और बसों के दोगुने तक पहुंच चुके किराये के बीच लोगों के मन में एक ही सवाल है—दिवाली-छठ पर घर जाएं तो आखिर कैसे जाएं?












